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India-NZ FTA : भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से वस्त्र, परिधान व चमड़े से जुड़े कारोबार को लाभ, जानिए सबकुछ

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Navita R Asthana Updated Mon, 27 Apr 2026 08:12 PM IST
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सार

भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते से वस्त्र, परिधान, चमड़ा और जूते जैसे क्षेत्रों को फायदा होगा साथ ही कृषि और लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए विकास की प्रबल संभावना है। वित्त वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय माल व्यापार 1 अरब अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गया।  हालांकि, वित्त वर्ष 2026 में यह गति धीमी हो गई, अप्रैल-फरवरी के दौरान कुल माल व्यापार घटकर 1.06 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया।  

India-New Zealand FTA to benefit sectors such as textiles apparel leather and footwear
भारत-न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता - फोटो : X/@PiyushGoyal
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विस्तार

भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए जो कि एक साल से भी कम समय में भारत की सबसे तेज व्यापार वार्ताओं में से एक समापन है। दिसंबर में समाप्त हुए इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारत से होने वाले सभी निर्यातों पर शुल्क को समाप्त कर देगा, जबकि भारत दक्षिण प्रशांत देश से आयात होने वाले 95 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क कम कर करेगा। इस समझौते से वस्त्र, परिधान, चमड़ा और जूते जैसे क्षेत्रों को फायदा होगा साथ ही कृषि और लघु व मध्यम उद्यमों के लिए विकास की प्रबल संभावना है।

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इस समझौते पर रुबिक्स डेटा साइंसेज ने एक रिपोर्ट जारी कर बताया है कि समझौता द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में एक समायोचित हस्तक्षेप है, जिसने मजबूत वृद्धि दिखाई है, लेकिन हाल ही में कुछ नरमी के संकेत भी मिले हैं। वित्त वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय माल व्यापार 1 अरब अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गया। हालांकि, वित्त वर्ष 2026 में यह गति धीमी हो गई, अप्रैल-फरवरी के दौरान कुल माल व्यापार घटकर 1.06 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया, जो एक चरम वर्ष के बाद ठहराव का संकेत देता है। उम्मीद है कि यह समझौता व्यापार प्रवाह को अधिक स्थिरता और पूर्वानुमान प्रदान करेगा, साथ ही दीर्घकालिक विकास के लिए एक ढांचा तैयार करेगा।

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एफटीएफ से किस सेक्टर को होगा फायदा?

न्यूजीलैंड के सभी 8,284 टैरिफ लाइनों पर टैरिफ समाप्त करने देने से भारतीय निर्यात को शुरुआत से ही शुल्क मुक्त बाजार मिलेगा। इसमें वस्त्र, परिधान, चमड़ा और जूते जैसे क्षेत्रों को फायदा होगा साथ ही कृषि और लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए प्रबल विकास की संभावना है। इसके साथ ही इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और रसानय क्षत्रों में भी वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

  • कृषि व्यापार: कृषि व्यापार में फलो, सब्जियों, मसालों, अनाज और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्द जैसे उत्पादों के लिए बेहतर पहुंच से लाभ होगा, साथ ही उत्पादकता बढा़ने और किसानों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करने के उद्देश्य से किए गए सहयोगात्मक पहलों से भी लाभ मिलेगा।
  • सेवा क्षेत्र: सेवाओं के क्षेत्र में न्यूजीलैंड ने 118 क्षेत्रों में प्रतिबद्धताएं व्यक्त की हैं, साथ ही स्वास्थ्य सेवा, पारंपरिक चिकित्सा, पर्यटन और ऑडियो विजुअल इंडस्ट्री, सहित तकनीकी सहयोग का विस्तार किया जाएगा।

छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसर

इस समझौते के तहत 20 अरब अमेरिकी डॉलर की दीघकालिक निवेश किया जाएगा और छोत्रों तथा कुशल पेशवरों के लिए नए अवसरों को पैदा करेगा।

भारत से न्यूजीलैंड को निर्यात

भारत से न्यूजीलैंड को निर्यात आधारित क्षेत्रों में फार्मास्युटिकल उत्पादों का हिस्सा सबसे बड़ा है। जबकि यात्री वाहनों और पेट्रोलियम उत्पादों का महत्व भी बढ़ा है, जो उच्च मूल्य और रणनीतिक रूप से प्रतिस्पर्धी श्रेणियों में से एक हैं।

न्यूजीलैंड से आयात होने वाले उत्पाद 

आयात के मामले में कच्चे माल यानी कोर रॉ मटीरियल, लकड़ी के लट्ठों और फेरस स्क्रैप के साथ ही एल्युमीनियम स्क्रैप और कोयले को भारत न्यूजीलैंड से आयात करता है। इसका इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन, रीसाइक्लिंग और औद्योगिक एनर्जी की जरूरतों से जुड़ी हुई मांग को पूरा किया जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार दोनों देशों के व्यापार पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2025 के बीच न्यूजीलैंड को भारत के माल निर्यात में 13 प्रतिशत के सीएजीआर से वृद्धि हुई जो 488 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 711 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल-फरवरी) में इस वृद्धि में कुछ सुधार देखा गया, जब माल निर्यात घटकर 524 मिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया।

माल आयात की बात करें तो वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2025 के बीच न्यूजीलैंड से भारत की खरीद में 16% की CAGR से वृद्धि हुई, जिसके बाद वित्त वर्ष 2026 में इसमें थोड़ी कमी आई। इन दोनों बदलावों के संयुक्त प्रभाव से भारत के व्यापार अधिशेष में उल्लेखनीय कमी आई है, जो वित्त वर्ष 2024 में 203 मिलियन अमेरिकी डॉलर से घटकर वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल-फरवरी) में 9.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।

एफटीए पर जानकारों की क्या राय?

विशेषज्ञों का कहना है कि बातचीत के दौरान भारत ने अपने घरेलू किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए समझौता किया है। यह भारत के लिए अच्छा होगा क्योंकि इस समझौते से चुनिंदा कृषि उत्पादों के लिए प्रवेश आसान तो होगा साथ वैश्विक स्तर पर मौजूदा समय में जो दबाव देख रहे हैं, उससे यह राहत देगा। फिलहाल न्यूजीलैंड से आने वाले भेड़ के मांस, ऊन और कोयले के साथ ही उत्पादों पर लगने वाले शुल्क को तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाएगा। इस समझौते से कीवी, चेरी, एवोकाडो, पर्सिमोन और ब्लूबेरी जैसे फलो की भारतीय बाजारों में आसानी से मिल सकेंगे।

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