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बैंकिंग क्षेत्र में बड़ा बदलाव: कर्ज बकाया 90 दिन से ज्यादा, तभी माना जाएगा एनपीए
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 28 Apr 2026 05:11 AM IST
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सार
आरबीआई ने बैंकों के लिए नए नियम जारी किए हैं, जो एक अप्रैल 2027 से प्रभावी होगा। इसके तहत बैंकों को संभावित नुकसान का पहले ही प्रावधान करना होगा। यह कदम एनपीए पहचान, कर्ज वर्गीकरण और जोखिम प्रबंधन को पूरी तरह बदल देगा।
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- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
लंबे समय के इंतजार और तैयारी के बाद बैंकिंग क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव दस्तक देने वाला है। आरबीआई ने बैंकों के लिए ऐसे नए नियम जारी किए हैं, जो आने वाले समय में कर्ज देने से लेकर मुनाफा दिखाने तक सब कुछ बदल सकते हैं। इसके तहत, अगर कोई कर्ज 90 दिन से ज्यादा समय तक बकाया रहा, तभी उसे एनपीए यानी खराब कर्ज माना जाएगा। नया नियम एक अप्रैल, 2027 से लागू होगा।
आरबीआई ने संपत्ति वर्गीकरण, एनपीए प्रोविजनिंग और आय की पहचान से जुड़े नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें सबसे बड़ा बदलाव अपेक्षित ऋण हानि (ईसीएल) आधारित ढांचा है। इसके तहत, बैंक को लगता है कि किसी कर्ज में भविष्य में नुकसान हो सकता है, तो उसे पहले से रकम अलग रखनी होगी। अब तक प्रणाली में नुकसान होने के बाद प्रावधान होता था, लेकिन अब नुकसान होने की संभावना पर प्रावधान करना होगा।
आरबीआई ने सोमवार को ईसीएल आधारित ढांचे को अपनाने के लिए और अधिक समय देने की याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा, नई प्रणाली अगले साल एक अप्रैल से ही लागू होगी। केंद्रीय बैंक ने इस संबंध में 7 अक्तूबर, 2025 को पहली बार जारी किए गए मसौदे पर मिले इस सुझाव को अस्वीकार करते हुए कहा, बैंकों को नए ढांचे के कार्यान्वयन के लिए अपनी आंतरिक व्यवस्था तैयार करने को एक साल का समय दिया गया है।
तीन हिस्सों में बटेंगे कर्ज खाते
आरबीआई ने कर्ज खातों को तीन हिस्सों में बांटने का रास्ता दिया है। पहले हिस्से के तहत वे खाते होंगे, जो सामान्य हैं। इन पर अगले 12 महीने के संभावित नुकसान का हिसाब लगाया जाएगा।
दूसरे हिस्से में वे खाते आएंगे, जिनमें खतरे की घंटी बज चुकी है। अगर ग्राहक की हालत कमजोर दिख रही है या भुगतान में परेशानी है, तो बैंक को पूरे लोन अवधि के संभावित नुकसान का हिसाब रखना होगा।
तीसरा हिस्सा सबसे गंभीर स्थिति है। ऐसे खाते तनावग्रस्त या खराब माने जाएंगे। इनके लिए भी बैंक को अब लाइफटाइम नुकसान का प्रावधान करना होगा। यानी, अब हर कर्ज सिर्फ अच्छा या खराब नहीं माना जाएगा, बल्कि बीच की अवधि में खतरे वाले क्षेत्र को भी पहचान मिलेगी।
अब दो तारीख की अहमियत
आरबीआई के नए नियमों में दो तारीख की अहमियत ज्यादा हो गई है। अगर कोई कर्ज 30 दिन तक बकाया हो जाता है, तो यह खतरे का शुरुआती संकेत माना जाएगा। बैंक को तुरंत सतर्क होना पड़ेगा। अगर वही कर्ज 90 दिन से ज्यादा बकाया रहा, तो पुराना नियम जारी रहेगा और वह एनपीए यानी खराब कर्ज माना जाएगा।
एक लोन डूबा तो बाकी भी बचेंगे नहीं
पहले कई बार ऐसा होता था कि ग्राहक का एक लोन खराब हो गया, लेकिन दूसरे खाते सामान्य चलते रहे। अब ऐसा आसान नहीं होगा। आरबीआई ने बॉरोअर लेवल क्लासिफिकेशन लागू किया है। अगर किसी ग्राहक का एक बड़ा लोन एनपीए बनता है, तो बैंक को उस ग्राहक के बाकी एक्सपोजर को भी नए नजरिये से देखना होगा। यह नियम खराब खातों को छुपाने से रोकने के लिए है।
अब 10 करोड़ रुपये तक के व्यक्तिगत कर्ज को मिलेगा कम जोखिम भार का लाभ: आरबीआई ने सोमवार को पूंजी शुल्क पर अंतिम निर्देशों में व्यक्तिगत ऋण जोखिम की सीमा को 7.5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया। यानी अब इतनी राशि तक के व्यक्तिगत कर्ज कम जोखिम भार का लाभ उठा सकेंगे।
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आरबीआई ने सोमवार को ईसीएल आधारित ढांचे को अपनाने के लिए और अधिक समय देने की याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा, नई प्रणाली अगले साल एक अप्रैल से ही लागू होगी। केंद्रीय बैंक ने इस संबंध में 7 अक्तूबर, 2025 को पहली बार जारी किए गए मसौदे पर मिले इस सुझाव को अस्वीकार करते हुए कहा, बैंकों को नए ढांचे के कार्यान्वयन के लिए अपनी आंतरिक व्यवस्था तैयार करने को एक साल का समय दिया गया है।
तीन हिस्सों में बटेंगे कर्ज खाते
आरबीआई ने कर्ज खातों को तीन हिस्सों में बांटने का रास्ता दिया है। पहले हिस्से के तहत वे खाते होंगे, जो सामान्य हैं। इन पर अगले 12 महीने के संभावित नुकसान का हिसाब लगाया जाएगा।
दूसरे हिस्से में वे खाते आएंगे, जिनमें खतरे की घंटी बज चुकी है। अगर ग्राहक की हालत कमजोर दिख रही है या भुगतान में परेशानी है, तो बैंक को पूरे लोन अवधि के संभावित नुकसान का हिसाब रखना होगा।
तीसरा हिस्सा सबसे गंभीर स्थिति है। ऐसे खाते तनावग्रस्त या खराब माने जाएंगे। इनके लिए भी बैंक को अब लाइफटाइम नुकसान का प्रावधान करना होगा। यानी, अब हर कर्ज सिर्फ अच्छा या खराब नहीं माना जाएगा, बल्कि बीच की अवधि में खतरे वाले क्षेत्र को भी पहचान मिलेगी।
अब दो तारीख की अहमियत
आरबीआई के नए नियमों में दो तारीख की अहमियत ज्यादा हो गई है। अगर कोई कर्ज 30 दिन तक बकाया हो जाता है, तो यह खतरे का शुरुआती संकेत माना जाएगा। बैंक को तुरंत सतर्क होना पड़ेगा। अगर वही कर्ज 90 दिन से ज्यादा बकाया रहा, तो पुराना नियम जारी रहेगा और वह एनपीए यानी खराब कर्ज माना जाएगा।
एक लोन डूबा तो बाकी भी बचेंगे नहीं
पहले कई बार ऐसा होता था कि ग्राहक का एक लोन खराब हो गया, लेकिन दूसरे खाते सामान्य चलते रहे। अब ऐसा आसान नहीं होगा। आरबीआई ने बॉरोअर लेवल क्लासिफिकेशन लागू किया है। अगर किसी ग्राहक का एक बड़ा लोन एनपीए बनता है, तो बैंक को उस ग्राहक के बाकी एक्सपोजर को भी नए नजरिये से देखना होगा। यह नियम खराब खातों को छुपाने से रोकने के लिए है।
अब 10 करोड़ रुपये तक के व्यक्तिगत कर्ज को मिलेगा कम जोखिम भार का लाभ: आरबीआई ने सोमवार को पूंजी शुल्क पर अंतिम निर्देशों में व्यक्तिगत ऋण जोखिम की सीमा को 7.5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया। यानी अब इतनी राशि तक के व्यक्तिगत कर्ज कम जोखिम भार का लाभ उठा सकेंगे।
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