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यूरोप भी चखेगा भारत का स्वाद: बाजारों में भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों का दबदबा, अब निर्यात के लिए रास्ता साफ
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 15 May 2026 05:35 AM IST
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सार
भारत अब यूरोपीय संघ के बाजारों में समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यात जारी रख सकेगा। यूरोपीय संघ ने संशोधित मसौदा सूची में भारत को शामिल कर लिया है। यह सफलता भारत द्वारा उत्पादों को हानिकारक दवाओं से मुक्त रखने की गारंटी देने के बाद मिली है। यूरोपीय संघ भारतीय सीफूड के लिए तीसरा सबसे बड़ा बाजार है, जिसकी कुल निर्यात मूल्य में 18.94 फीसदी हिस्सेदारी है। आइए, विस्तार से समझते हैं...
समुद्री खाद्य उत्पादों
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
भारत अब यूरोपीय संघ के देशों में अपने समुद्री उत्पादों का निर्यात बिना किसी बाधा के जारी रख सकेगा। यूरोपीय संघ ने अपनी नई और संशोधित मसौदा सूची में भारत का नाम शामिल कर लिया है, जिससे भारतीय व्यापारियों और मछुआरों के लिए विदेशी कमाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। पहले इस बात का डर था कि भारत को इस सूची से बाहर रखा जा सकता है, लेकिन अब सरकार के प्रयासों के बाद भारत ने अपनी जगह पक्की कर ली है।
यूरोपीय संघ की सूची में भारत का नाम शामिल होना क्यों जरूरी था?
यूरोपीय संघ दुनिया के उन बाजारों में से एक है जहाँ खाने-पीने की चीजों को लेकर बहुत सख्त नियम होते हैं। भारत पहले उन देशों की सूची में शामिल नहीं था जिन्हें सितंबर 2026 से पशु मूल के उत्पादों के निर्यात की अनुमति मिलने वाली थी। यदि भारत इस सूची में नहीं आता, तो भारतीय मछली और अन्य समुद्री उत्पादों का यूरोप जाना बंद हो सकता था। लेकिन अब भारत ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि हमारे यहाँ से भेजे जाने वाले उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं और यूरोपीय संघ के सभी कड़े मानकों को पूरा करते हैं, जिसके बाद हमें यह हरी झंडी मिल गई है।
ये भी पढ़ें- नीट परीक्षा रद्द होने पर एक्शन में सरकार: शिक्षा मंत्री के घर देर शाम तक चली बैठक, NTA के अफसर भी रहे मौजूद
भारत ने निर्यात को सुरक्षित बनाने के लिए कौन से बड़े कदम उठाए?
भारत को इस सूची में शामिल करने के पीछे सबसे बड़ी वजह स्वास्थ्य सुरक्षा है। असल में, यूरोपीय संघ इस बात को लेकर बहुत गंभीर है कि जानवरों या मछलियों के पालन में ऐसी दवाओं का उपयोग न हो जो इंसानों के लिए हानिकारक हों। भारत ने गारंटी दी कि यूरोपीय संघ को भेजे जा रहे उत्पाद रोगाणुरोधी औषधीय उत्पादों और मानव चिकित्सा के लिए संरक्षित दवाओं से पूरी तरह मुक्त हैं। आसान भाषा में कहें तो भारतीय सीफूड में ऐसी किसी दवा का अंश नहीं है जो सेहत बिगाड़ दे। इसी भरोसे और आश्वासन के बाद यूरोपीय संघ ने भारत को अपनी सुरक्षित देशों की सूची में जगह दी है।
भारतीय समुद्री खाद्य उद्योग के लिए यूरोपीय बाजार कितना महत्वपूर्ण है?
यूरोपीय संघ भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों के लिए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है। आंकड़ों की बात करें तो साल 2025-26 के दौरान भारत ने यूरोप को 1.593 अरब डॉलर मूल्य का सीफूड निर्यात किया। पूरे भारत से होने वाले समुद्री उत्पाद निर्यात में अकेले यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी 18.94 फीसदी है। यह बाजार इतना बड़ा है कि अगर यहाँ निर्यात रुकता, तो भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता। अब रास्ता साफ होने से न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि देश के राजस्व में भी बड़ा इजाफा होगा।
निर्यात की इस मंजूरी का आने वाले समय में क्या असर होगा?
इस मंजूरी के बाद अब भारतीय समुद्री उत्पादों की साख पूरी दुनिया में और बढ़ेगी। यूरोपीय संघ ने साफ़ कहा है कि संशोधित सूची में केवल उन्हीं देशों को जगह दी गई है जिन्होंने खाद्य उत्पादन में रोगाणुरोधी उपयोग के प्रतिबंधों को प्रभावी रूप से लागू किया है। इसका मतलब है कि भारत का सीफूड अब दुनिया के सबसे भरोसेमंद उत्पादों में गिना जाएगा। इससे न केवल यूरोप बल्कि अन्य विकसित देशों में भी भारतीय समुद्री उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिसका सीधा फायदा हमारे देश के निर्यातकों और इस क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों को होगा।
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यूरोपीय संघ की सूची में भारत का नाम शामिल होना क्यों जरूरी था?
यूरोपीय संघ दुनिया के उन बाजारों में से एक है जहाँ खाने-पीने की चीजों को लेकर बहुत सख्त नियम होते हैं। भारत पहले उन देशों की सूची में शामिल नहीं था जिन्हें सितंबर 2026 से पशु मूल के उत्पादों के निर्यात की अनुमति मिलने वाली थी। यदि भारत इस सूची में नहीं आता, तो भारतीय मछली और अन्य समुद्री उत्पादों का यूरोप जाना बंद हो सकता था। लेकिन अब भारत ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि हमारे यहाँ से भेजे जाने वाले उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं और यूरोपीय संघ के सभी कड़े मानकों को पूरा करते हैं, जिसके बाद हमें यह हरी झंडी मिल गई है।
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भारत को इस सूची में शामिल करने के पीछे सबसे बड़ी वजह स्वास्थ्य सुरक्षा है। असल में, यूरोपीय संघ इस बात को लेकर बहुत गंभीर है कि जानवरों या मछलियों के पालन में ऐसी दवाओं का उपयोग न हो जो इंसानों के लिए हानिकारक हों। भारत ने गारंटी दी कि यूरोपीय संघ को भेजे जा रहे उत्पाद रोगाणुरोधी औषधीय उत्पादों और मानव चिकित्सा के लिए संरक्षित दवाओं से पूरी तरह मुक्त हैं। आसान भाषा में कहें तो भारतीय सीफूड में ऐसी किसी दवा का अंश नहीं है जो सेहत बिगाड़ दे। इसी भरोसे और आश्वासन के बाद यूरोपीय संघ ने भारत को अपनी सुरक्षित देशों की सूची में जगह दी है।
भारतीय समुद्री खाद्य उद्योग के लिए यूरोपीय बाजार कितना महत्वपूर्ण है?
यूरोपीय संघ भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों के लिए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है। आंकड़ों की बात करें तो साल 2025-26 के दौरान भारत ने यूरोप को 1.593 अरब डॉलर मूल्य का सीफूड निर्यात किया। पूरे भारत से होने वाले समुद्री उत्पाद निर्यात में अकेले यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी 18.94 फीसदी है। यह बाजार इतना बड़ा है कि अगर यहाँ निर्यात रुकता, तो भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता। अब रास्ता साफ होने से न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि देश के राजस्व में भी बड़ा इजाफा होगा।
निर्यात की इस मंजूरी का आने वाले समय में क्या असर होगा?
इस मंजूरी के बाद अब भारतीय समुद्री उत्पादों की साख पूरी दुनिया में और बढ़ेगी। यूरोपीय संघ ने साफ़ कहा है कि संशोधित सूची में केवल उन्हीं देशों को जगह दी गई है जिन्होंने खाद्य उत्पादन में रोगाणुरोधी उपयोग के प्रतिबंधों को प्रभावी रूप से लागू किया है। इसका मतलब है कि भारत का सीफूड अब दुनिया के सबसे भरोसेमंद उत्पादों में गिना जाएगा। इससे न केवल यूरोप बल्कि अन्य विकसित देशों में भी भारतीय समुद्री उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिसका सीधा फायदा हमारे देश के निर्यातकों और इस क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों को होगा।
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