India South Korea CEPA: 'चिप से शिप' तक व्यापार बढ़ाने पर सहमति, दोनों देशों के बीच सहयोग के नए दौर की शुरुआत
भारत और दक्षिण कोरिया ने वैश्विक तनावों के बीच अपने आर्थिक समझौते (CEPA) को अपग्रेड करने का फैसला किया है। 'चिप्स से शिप्स' तक इस नई 'भविष्य की साझेदारी' के व्यापारिक मायने पढ़ें। अभी पूरी खबर जानने के लिए क्लिक करें!
विस्तार
वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और बढ़ती व्यापारिक बाधाओं के बीच, भारत और दक्षिण कोरिया ने अपने द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने का अहम फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे मायुंग के बीच सोमवार को हुई उच्च स्तरीय वार्ता के बाद, दोनों देशों ने अपने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) को अपग्रेड करने के लिए बातचीत शुरू करने की आधिकारिक घोषणा की। यह कदम आपूर्ति शृखलाओं को सुरक्षित करने और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक व्यापारिक व्यवधानों से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रतिक्रिया है।
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापारिक और आर्थिक संबंधों ने मुख्य रूप से साल 2010 में सीईपीए लागू होने के बाद काफी तेज गति पकड़ी थी। पिछले एक दशक से अधिक समय में इस समझौते ने दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक आदान-प्रदान का एक ठोस आधार तैयार किया है। हालांकि, वर्तमान वैश्विक परिदृश्य और नई तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस पुराने ढांचे का मूल्यांकन और आधुनिकीकरण अपरिहार्य हो गया था। इसी के मद्देनजर दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने इस साझेदारी को विस्तार देने पर मुहर लगाई है।
तकनीकी और औद्योगिक विस्तार
इस नई व्यापारिक रणनीति का मूल उद्देश्य मौजूदा संबंधों को एक ऐसी 'भविष्य की साझेदारी' के रूप में तैयार करना है जो दोनों देशों के उद्योगों को सीधा और दीर्घकालिक लाभ पहुंचाए। बातचीत के दौरान मुख्य रूप से आधुनिक अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके तहत निम्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया जाएगा:
निवेश और व्यापार: दोनों देशों के बीच पूंजी प्रवाह और वाणिज्यिक गतिविधियों को आसान बनाना।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर्स: वैश्विक तकनीकी आपूर्ति शृंखलाओं में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए इन भविष्य की तकनीकों पर संयुक्त विकास।
- महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकें: नवाचार और नई तकनीकी खोजों को बढ़ावा देना।
- पीपल-टू-पीपल कनेक्ट: दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का विस्तार।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस व्यापक सहयोग को परिभाषित करते हुए कहा, "चिप से लेकर शिप (जहाज) तक, टैलेंट (प्रतिभा) से लेकर टेक्नोलॉजी तक, एंटरटेनमेंट (मनोरंजन) से लेकर एनर्जी (ऊर्जा) तक, हम हर क्षेत्र में सहयोग के नए अवसरों को साकार करेंगे"।
व्यापारिक और निवेश मोर्चे के साथ-साथ दोनों देशों के नेताओं ने इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र की स्थिरता पर भी विशेष रूप से चर्चा की। दुनिया भर में चल रहे मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने साफ किया कि ऐसे संकट के समय में भारत और दक्षिण कोरिया का एक साथ आना पूरी दुनिया के लिए एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा, "वैश्विक तनाव के इस युग में, भारत और दक्षिण कोरिया एक साथ मिलकर शांति और स्थिरता का संदेश देते हैं"।
दोनों पक्षों ने एक समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए काम करना जारी रखने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री ने आगे जोड़ा, "हमारे साझा प्रयासों के माध्यम से, हम एक शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपना योगदान देना जारी रखेंगे"।
राष्ट्रपति ली जे मायुंग की भारत यात्रा के बाद, भारत और दक्षिण कोरिया का दशकों पुराना विश्वसनीय सहयोग अब आधिकारिक तौर पर एक भविष्योन्मुखी साझेदारी में तब्दील होने जा रहा है। सीईपीए के अपग्रेडेशन के लिए शुरू हो रही यह वार्ता न केवल एआई और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करेगी, बल्कि बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक संतुलित और सुरक्षित आर्थिक ढांचा भी तैयार करेगी।
