सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Iran Crisis Impact: Oil Price Volatility Hits India, Macro Pressures Rise, Supply Remains Stable

ईरान संकट का असर: भारत में तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव, महंगाई और मैक्रो इकोनॉमिक दबाव; आपूर्ति फिलहाल सुरक्षित

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shivam Garg Updated Sun, 01 Mar 2026 04:21 PM IST
विज्ञापन
सार

ईरान संकट के चलते भारत में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल देश की तेल आपूर्ति सुरक्षित है, लेकिन ब्रेंट क्रूड की बढ़ती कीमतें और बढ़े हुए परिवहन एवं बीमा खर्चों से महंगाई और मैक्रोइकोनॉमिक दबाव बढ़ सकता है।

Iran Crisis Impact: Oil Price Volatility Hits India, Macro Pressures Rise, Supply Remains Stable
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock
विज्ञापन

विस्तार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान संकट के बीच विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत को तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और व्यापक मैक्रोइकोनॉमिक प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, देश की तेल आपूर्ति श्रृंखला पर फिलहाल कोई संरचनात्मक खतरा नहीं है।

Trending Videos


विशेषज्ञों के अनुसार, हॉर्मुज जलसंधि से होकर भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा कच्चा तेल और एलएनजी आता है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से ब्रेंट क्रूड की कीमतें सात महीने के उच्चतम स्तर, लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भूराजनीतिक जोखिम और महंगाई पर दबाव बढ़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


विशेषज्ञों की क्या राय?

  • कंपोडिटी मार्केट एनालिस्ट कंपनी केप्लर के सुमित रितोलिया ने कहा कि प्रारंभिक असर कीमतों पर केंद्रित होगा, आपूर्ति पर फिलहाल दबाव नहीं है। उच्च ब्रेंट कीमतें, बढ़ी हुई फ्रेट दरें और युद्ध जोखिम बीमा लागत भारत के इंपोर्ट बिल को प्रभावित कर सकती हैं।
  • इन्वेस्टमेंट इंफॉर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ऑफ इंडिया लिमिटेड (आईसीआरए) की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि पश्चिम एशिया में हालात भारत के ट्विन डेफिसिट, महंगाई और विदेशी धन प्रवाह पर असर डाल सकते हैं।
  • प्रशांत वसिष्ठ, आईसीआरए के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ने कहा कि कई तेल उत्पादकों पर हमले से क्रूड तेल की अस्थिरता बढ़ सकती है।

हॉर्मुज जलसंधि का महत्व
लगभग 20% वैश्विक पेट्रोलियम और LNG शिपमेंट हॉर्मुज जलसंधि के माध्यम से गुजरते हैं, जो इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग बनाता है। भारत के तेल आयात का करीब 50% हिस्सा इराक, सऊदी अरब, UAE और कुवैत जैसे देशों से आता है। अगर क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है या संघर्ष गहरा होता है, तो इस मार्ग से होने वाली तेल शिपमेंट पर असर पड़ सकता है, जिससे भारत समेत वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

भारत की तैयारी और विकल्प
भारत ने तेल आपूर्ति के लिए रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से विविध स्रोत विकसित किए हैं। हालांकि, रूस और अन्य विकल्पों से तेल की आपूर्ति संभव है, लेकिन इन मार्गों पर यात्रा लंबी और लागत अधिक है। देश के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) और रिफाइनरी स्टॉक्स अस्थायी आपूर्ति व्यवधान को संभालने में सक्षम हैं, जिससे ईंधन की उपलब्धता बनी रहती है। घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी की संभावना कम है, क्योंकि मूल्य समायोजन आमतौर पर लंबे समय तक मजबूत क्रूड कीमतों पर निर्भर करता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed