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पश्चिम एशिया में युद्ध की आग: भारत समेत वैश्विक बाजार पर कैसा होगा असर? तेल से शेयर बाजार तक; यहां जानिए सबकुछ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Mon, 02 Mar 2026 04:56 AM IST
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सार

पिछले 36 घंटों से अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी हमले शुरू कर दिए। खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों और इस्राइल पर मिसाइल और ड्रोन हमलों ने पूरे क्षेत्र को आग के घेरे में ला दिया है। तनाव अपने चरम पर है और दोनों तरफ भारी बमबारी जारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस युद्ध की लपटों का असर भारत समेत वैश्विक व्यापार और बाजार कैसा  होगा? आइए यहां जानते हैं। 

War rages in West Asia How will it impact global markets including India From oil to the stock market
होर्मुज जलडमरूमध्य का भारत पर असर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बीते 36 घंटों से पश्चिम एशिया आग की लपटों में है। ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के हमलों ने दुनियाभर में हलचल तेज कर दी है। दूसरी ओर ईरान के जवाबी हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। इसका कारण है कि ईरान ने जवाब में इस्राइल और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे हैं, जिसके चलते हर तरफ विस्फोट और तबाही के दृश्य हैं। क्षेत्र तनाव की कगार पर है और अब सवाल यह है कि इस हिंसक संघर्ष का असर वैश्विक व्यापार, तेल की कीमतों और दुनिया की सुरक्षा पर कितना गहरा होगा। 

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वैश्विक व्यापार जगत पर इस संघर्ष के असर को ऐसे समझते हैं कि जब अमेरिका और इस्राइल जैसे बड़े ताकतवर देश मिलकर किसी देश पर हमला करते हैं और तनाव फैलता है तो इसका असर वन महत्वपूर्ण वस्तु पर सबसे पहले होता है। यानी कच्चे तेल पर। पश्चिम एशिया दुनिया के सबसे बड़े पेट्रोल और डीजल के निर्यात केंद्रों में से एक है। दिन में लगभग एक-पांचवां हिस्सा तेल जहाजी मार्ग जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। 
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होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल की कीमत
बता दें कि इस जलडमरूमध्य के बंद होने या उसके आसपास की नौवहन जोखिमों में वृद्धि होने की धमकी से ही तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। आज की स्थिति में तेल बाजार पहले से ही तनाव के निशानों के साथ उछल रहा है। पिछले कुछ दिनों में तेल की कीमतों में लगभग दस प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रविवार को प्रति बैरल 80 डॉलर पर पहुंच गईं जो 10 फीसदी अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द ही दाम 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि यदि संकट और गहराता है तो तेल एक बैरल का दाम और भी बढ़ सकता है। 



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स्वेज नहर के रास्ते जहाजों की आवाजाही पर रोक
इस संघर्ष के चलते कई शिपिंग कंपनियों ने स्वेज नहर के रास्ते जहाजों की आवाजाही रोक दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को असुरक्षित बना देता है तो इसका बड़ा असर दुनिया भर के तेल व्यापार पर पड़ेगा। दुनिया में बेचे जाने वाले कुल तेल का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में तेल के दाम बढ़ेंगे और इसकासीधा असर आम लोगों की जेब पर होगा। तब भारत जैसे तेल आयातक देशों में यह पुरे उत्पाद और परिवहन के खर्चों को बढ़ा सकता है। इससे खाद्य पदार्थ और रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है। 

शेयर बाजार पर कैसा होगा असर?
इस संघर्ष का असर केवल तेल पर ही नहीं है। इसका अच्छा खास असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिला है। हाल की घटना का जिक्र करे तो, ईरान के हमले से जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के कई स्थानों पर ईरान ने हमले किए तो यूएई ने अपने प्रमुख शेयर बाजार को दो दिनों के लिए बंद करने की घोषणा की है। देश के वित्तीय बाजार सोमवार दो मार्च और मंगलवार तीन मार्च को बंद रहेंगे। इसमें अबू धाबी सिक्योरिटीज एक्सचेंज (एडीएक्स) और दुबई फाइनेंशियल मार्केट (डीएफएम) शामिल हैं।

शेयर बाजार पर संकट को ऐसे समझा जा सकता है कि जब वैश्विक संकट की स्थिति बनती है तो निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ झुकते हैं और जोखिम वाले शेयर बेचते हैं। हाल की घटना के अनुसार पश्चिम एशिया में तनाव के चलते बाजारों में निराशा का माहौल बना है, जिससे प्रमुख शेयर सूचकांकों जैसे सेंसेक्स और निफ्टी को गिरावट का सामना करना पड़ा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कारोबारियों को लगता है कि भविष्य में लाभ कम होने या अनिश्चय अधिक होने की वजह से शेयरों की कीमतें और गिर सकती हैं। 

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विमान सेवाएं, निर्यात और आयात पर भी असर

शेयर बाजार, तेल के साथ-साथ इस संघर्ष के चलते विमानन सेवाएं, निर्यात और आयात के कारोबार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग और बीमा कंपनियों के प्रीमियम तक प्रभावित होते दिख रहे हैं। मसलन पिछले कुछ दिनों में 700 से अधिक उड़ान रद्द कर दी गईं और कई विमान सेवाओं को मार्ग बदलना पड़ा क्योंकि पश्चिम एशिया का हवाई मार्ग अस्थिर हो गया था। इस्राइल, कतर, सीरिया, ईरान, इराक, कुवैत और बहरीन ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। इसके कारण लाखों यात्री फंसे हुए हैं या उन्हें दूसरे हवाई अड्डों पर भेजा गया है।

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