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देश में नौकरियों की बहार: बंगलूरू बना भर्ती का बॉस: टेक में पैसा बढ़ा फिर भी एआई अपनाने में कंपनियां पीछे

Fri, 25 Sep 2026 04:21 AM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Fri, 25 Sep 2026 04:21 AM IST
सार

अगली छमाही में भारत में रोजगार बढ़ने की उम्मीद है और कंपनियां खासकर बड़े उद्यम लक्षित भर्ती पर जोर दे रहे हैं। बेंगलूरू भर्ती के इरादे में सबसे आगे है। वहीं, एआई का इस्तेमाल व्यापक हो रहा है, लेकिन इसे आधे से ज्यादा कर्मचारियों तक पहुंचाने वाली कंपनियों की संख्या अभी कम है।

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Job boom across country Bengaluru emerges as hiring hub tech salaries rise yet companies lag in AI adoption
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही यानी अक्तूबर से मार्च के बीच देश के अलग-अलग उद्योगों में रोजगार बढ़ने की उम्मीद है। स्टाफिंग कंपनी टीमलीज सर्विसेज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान कंपनियों के कार्यबल में 5.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है। रोजगार में शुद्ध बदलाव (एनईसी) का यह आंकड़ा पिछले चार छमाहियों में सबसे ज्यादा है। वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह 4.7 प्रतिशत रहा था। यह रिपोर्ट जुलाई से अगस्त 2026 के बीच 23 उद्योगों और 20 शहरों के 1,239 नियोक्ताओं के बीच किए गए सर्वे पर आधारित है।

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कंपनियां अब जरूरत के हिसाब से करेंगी भर्ती
रिपोर्ट के मुताबिक, 5.4 प्रतिशत की अनुमानित रोजगार वृद्धि से संकेत मिलता है कि कंपनियां अब बड़े पैमाने पर भर्ती करने के बजाय जरूरत और भूमिका के हिसाब से सही लोगों को जोड़ने पर जोर दे रही हैं। इसमें एआई का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है, लेकिन कंपनियां इसे मानवीय क्षमताओं के साथ संतुलित तरीके से अपनाने की कोशिश कर रही हैं। टीमलीज सर्विसेज के उपाध्यक्ष बालासुब्रमण्यम ए के मुताबिक, कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती भर्ती की योजनाओं को सही कौशल और योग्यताओं वाले कर्मचारियों में बदलने की होगी। इसके लिए नियोक्ताओं को अपने टैलेंट पूल का दायरा बढ़ाने, तेजी से कर्मचारियों को नए कौशल सिखाने और जरूरत के मुताबिक अधिक लचीले वर्कफोर्स मॉडल अपनाने की जरूरत होगी।
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बड़े उद्यमों में भर्ती की तैयारी सबसे ज्यादा
आकार के हिसाब से देखें तो बड़े उद्यम अपने कार्यबल का 66 प्रतिशत तक विस्तार करने की योजना बना रहे हैं। वहीं, मध्यम आकार के उद्यमों में यह आंकड़ा 59 प्रतिशत और स्टार्टअप, सूक्ष्म व लघु कारोबारों में 53 प्रतिशत है। यानी बड़ी कंपनियां आने वाली छमाही में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने को लेकर अपेक्षाकृत ज्यादा सक्रिय नजर आ रही हैं।
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बेंगलूरू में नौकरियों की सबसे ज्यादा उम्मीद
शहरों में बेंगलूरू भर्ती की योजनाओं में 68 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है। इसके बाद हैदराबाद 61 प्रतिशत और पुणे 60 प्रतिशत के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। खास बात यह है कि इस छमाही में पुणे ने भर्ती के इरादे में सबसे बड़ी बढ़त दर्ज की है।

एआई का इस्तेमाल बढ़ा, लेकिन कर्मचारियों तक पहुंच अभी सीमित
कंपनियों में एआई और जेनरेटिव एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसे पूरे कार्यबल में लागू करने के मामले में अभी बड़ा अंतर दिखाई देता है। सर्वे में 85 प्रतिशत नियोक्ताओं ने किसी न किसी स्तर पर एआई या जेनरेटिव एआई के इस्तेमाल की बात कही। हालांकि, सिर्फ 13 प्रतिशत नियोक्ताओं ने बताया कि उनके आधे से ज्यादा कर्मचारी एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।

टेक कंपनियों में निवेश बढ़ा, लेकिन छोटे सौदों की रफ्तार घटी
जनवरी से सितंबर 2026 के बीच भारत में टेक कंपनियों को मिलने वाली फंडिंग सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 10 अरब डॉलर यानी करीब 86,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई। डाटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैक्सन की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल इसी अवधि में भारत में 9.7 अरब डॉलर की फंडिंग हुई थी, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 10 अरब डॉलर रहा था।

पैसा ज्यादा आया, लेकिन सौदे 38 प्रतिशत घटे
कुल फंडिंग बढ़ने के बावजूद शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स के लिए निवेश जुटाना मुश्किल होता दिख रहा है। 2026 के पहले नौ महीनों में फंडिंग राउंड्स की संख्या 38 प्रतिशत घट गई। यह संख्या पिछले साल के 1,838 राउंड से घटकर इस साल 1,134 रह गई है। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अब बड़ी संख्या में छोटे स्टार्टअप्स में पैसा लगाने के बजाय चुनिंदा और बड़े वेंचर्स पर ज्यादा रकम लगा रहे हैं। यानी बाजार में कुल पैसा बढ़ा है, लेकिन उसका फायदा सभी स्टार्टअप्स तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है।


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टेक फंडिंग में भारत पांचवें पायदान पर
वैश्विक स्तर पर भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा टेक फंडिंग हब बना हुआ है। जनवरी से सितंबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने 10 अरब डॉलर से अधिक की टेक फंडिंग के साथ जर्मनी के 9.9 अरब डॉलर और फ्रांस के 8 अरब डॉलर के निवेश को पीछे छोड़ा है।

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