महादेव एप केस में ईडी एक्शन: बुर्ज खलीफा के फ्लैट्स सहित ₹1700 करोड़ की संपत्ति अटैच, जानिए क्या अपडेट
महादेव ऐप मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने बुर्ज खलीफा के फ्लैट्स सहित ₹1,700 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है। क्या है पूरा मामला विस्तार से जानने के लिए पढ़ें खबर।
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को महादेव एप मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने धनशोधन से जुड़े इस मामले में लगभग 1,700 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। यह कार्रवाई दुनिया की सबसे ऊंची इमारत दुबई के बुर्ज खलीफा (829.8 मीटर) में स्थित अपार्टमेंट में भी की गई है। यह हाई-प्रोफाइल मामला अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़ा है। इस जांच के दायरे में छत्तीसगढ़ के कई बड़े नेता और नौकरशाह भी हैं।
ईडी ने क्या कार्रवाई की थी?
धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी के रायपुर जोनल ऑफिस ने यह अस्थायी आदेश जारी किया है। इसके तहत दुबई हिल्स एस्टेट (हिल्स व्यू, फेयरवे रेजिडेंसी और सिद्रा) में 18 'हाई-वैल्यू' लग्जरी विला और अपार्टमेंट्स को अटैच किया गया है। इसके अलावा दुबई के बिजनेस बे, एसएलएस होटल एंड रेजिडेंसेस और बुर्ज खलीफा में कई 'हाई-एंड' अपार्टमेंट्स भी इस जब्ती का हिस्सा हैं। अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों के साथ-साथ दिल्ली में स्थित दो अचल संपत्तियों को भी अटैच किया गया है। ईडी के अनुसार, कुर्क की गई इन सभी संपत्तियों का उचित बाजार मूल्य लगभग 1,700 करोड़ रुपये है।
कैसे चलाया जा रहा था सट्टेबाजी का नेटवर्क?
जांच एजेंसी ने साफ किया है कि ये संपत्तियां महादेव ऑनलाइन बुक और टाइगर एक्सचेंज, गोल्ड365 व लेजर247 जैसे कई अन्य प्लेटफॉर्म्स के जरिए किए गए अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी के पैसे से खरीदी गई थीं। महादेव एप एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी सिंडिकेट के रूप में काम कर रहा था।
इस सिंडिकेट को मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई से नियंत्रित करते थे, जबकि भारत में इसका पूरा नेटवर्क पैनल और ब्रांच के फ्रैंचाइजी मॉडल पर चल रहा था। जब्त की गई संपत्तियां सौरभ चंद्राकर की हैं और इन्हें उसके तथा उसके सहयोगियों (विकास छापरिया, रोहित गुलाटी, अतुल अरोड़ा, नितिन टिबरेवाल, सुरेंद्र बागरी) की ओर से नियंत्रित संस्थाओं के नाम पर रखा गया था।
क्या है महादेव एप घोटाला और कानूनी कार्रवाई क्या हुई?
- कुल अवैध कमाई और जब्ती: एजेंसी के अनुसार, इस पूरे मामले में लगभग 6,000 करोड़ रुपये की 'अवैध' कमाई की गई है। ताजा कुर्की के बाद, इस केस में अटैच की गई संपत्तियों का कुल मूल्य अब 4,336 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
- गिरफ्तारी और चार्जशीट: ईडी अब तक इस जांच के तहत 13 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। साथ ही, रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में 5 चार्जशीट दायर कर कुल 74 संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है।
भगोड़ा घोषित करने की तैयारी:भारत सरकार लगातार चंद्राकर और उप्पल के प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है। सौरभ चंद्राकर की आखिरी लोकेशन संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में थी, जबकि उप्पल के बारे में बताया गया है कि वह यूएई से वानुअतु भाग चुका है। ईडी ने चंद्राकर, उप्पल, अनिल अग्रवाल (उर्फ अतुल) और शुभम सोनी को 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018' के तहत भगोड़ा घोषित करने के लिए भी अदालत का रुख किया है।
आगे का आउटलुक क्या है?
भारत के बाद दुबई में ईडी कार्रवाई बताती है कि जांच एजेंसियां धनशोधन के वैश्विक सिंडिकेट को जड़ से खत्म करने के लिए आक्रामक हैं। प्रत्यर्पण की कोशिशों और भगोड़ा घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया के चलते आने वाले दिनों में इस सट्टेबाजी नेटवर्क कर्ताधर्ता कानून के शिकंजे में आ सके हैं।