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Report: पश्चिम एशिया तनाव के बीच बाजार स्थिर, जेफरीज की आशंका होर्मुज संकट से भारत पर पड़ेगा ये असर

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Fri, 20 Mar 2026 01:50 PM IST
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सार

जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल बाजार स्थिर हैं, लेकिन होर्मुज में लंबे व्यवधान की स्थिति भारत जैसे ऊर्जा-निर्भर देशों के लिए महंगाई और ग्रोथ पर बड़ा खतरा बन सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं। 

Markets remain stable amid West Asia tensions; Jefferies expects the Hormuz crisis to impact India
पश्चिम एशिया संकट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद वैश्विक बाजारों में अब तक कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है, लेकिन स्थिति तेजी से बदल सकती है। जेफरीज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाएं लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो भारत जैसे ऊर्जा-आयात पर निर्भर देशों के लिए आर्थिक जोखिम काफी बढ़ सकते हैं।

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घटनाओं को लेकर क्या है निवेशकों का रुख?

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया से आ रही ऐतिहासिक और गंभीर खबरों के बावजूद बाजार अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं। यह इस बात का संकेत है कि निवेशक फिलहाल इन घटनाओं को अस्थायी मानकर चल रहे हैं।

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इस स्थिरता की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति का जारी रहना है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मार्ग से गुजरने वाली करीब 85% ऊर्जा एशिया के लिए होती है, जिसमें चीन, भारत और दक्षिण एशिया की हिस्सेदारी लगभग 60% है। ईरान द्वारा जहाजों को चुनिंदा तौर पर गुजरने की अनुमति देने से फिलहाल सप्लाई पर दबाव नहीं बना है और बाजारों में घबराहट सीमित रही है।

रिपोर्ट ने क्या दी चेतावनी?

हालांकि, रिपोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि यह स्थिति बेहद नाजुक है। अगर होर्मुज में आवाजाही बाधित होती है या जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो इसके आर्थिक प्रभाव गहरे और लंबे समय तक रहने वाले होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, जितनी लंबी अवधि तक यह मार्ग बंद रहेगा, उतना ही नकारात्मक असर वैश्विक और एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।


जेफरीज ने ऊर्जा और आर्थिक विकास के सीधे संबंध को भी रेखांकित किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक विकास मूल रूप से ऊर्जा खपत पर निर्भर करता है, ऐसे में ऊर्जा आपूर्ति में कोई भी व्यवधान सीधे ग्रोथ को प्रभावित करेगा, खासकर भारत जैसे देशों में।

एशियाई बाजारों के नजरिए से रिपोर्ट बताती है कि हाल के वर्षों में निवेशक ऐसे भू-राजनीतिक झटकों को अस्थायी मानने लगे हैं और अक्सर इन्हें खरीदारी के अवसर के रूप में देखते हैं। यही वजह है कि मौजूदा संकट के बावजूद बाजारों में बड़ी गिरावट नहीं आई है।

हालांकि, भारत के लिए जोखिम स्पष्ट बना हुआ है। होर्मुज मार्ग पर भारी निर्भरता के कारण तेल की कीमतों में उछाल, सप्लाई में रुकावट और महंगाई बढ़ने का खतरा बना रहेगा। यदि संकट गहराता है या लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर भारत समेत प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर पर पड़ सकता है।


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