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पश्चिम एशिया संकट की मार: महंगे तेल और गैस संकट से छोटे और मझोले उद्योग पर पड़ा असर, जानें विशेषज्ञों की राय

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Riya Dubey Updated Fri, 20 Mar 2026 02:44 PM IST
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सार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं और एलपीजी की कमी भी सामने आ रही है, जिससे एमएसएमई की लागत और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ गया है। खासकर सिरेमिक उद्योग पर असर दिख रहा है। 

West Asia crisis hits: Expensive oil and gas crisis impacts small and medium-sized enterprises
पश्चिम एशिया में संघर्ष - फोटो : ANI
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विस्तार

पश्चिम एशिया में संघर्ष का असर अब लघु और मध्यम उद्यम  (एमएसएमई) पर दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतें जो लगातार बढ़ रही हैं और लगभग 114 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं। वहीं एलपीजी की कमी ने भी कारोबारियों को परेशान कर दिया हैं। विशेषज्ञों का कहना है, भारत के एमएसएमई क्षेत्रों के लिए तेल की बढ़ती कीमतें परिचालन की लागत को बढ़ा रही हैं। लागत में वृद्धि होने से निर्माताओं और व्यापारियों के लिए माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है।

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सिरेमिक उद्योग के रेवन्यू में एक से दो फीसदी तक कमी आने की संभावना

नुवामा और क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार गैस और प्रोपेन की आपूर्ति में व्यवधान से टाइल्स निर्माताओं का कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनके मुनाफे में कमी आई है और उत्पादन लगात भी बढ़ी है। क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक नितिन कंसल ने कहा पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से सिरेमिक उद्योग को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। विशेषकर गैस सप्लाई की उपल्ब्धता और विदेशी बाजार के लिए बढ़ी हुई लॉजिस्टिक लागत का सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। अगर यही स्थिति अगले दो से तीन हफ्ते तक बनी रहती हैं, तो इससे कंपनियों को लंबे समय के लिए बंद करना पड़ सकता है। इससे उन्हें काफी नुकसान हो सकता है और चालू वित्तीय वर्ष में रेवन्यू में एक से दो प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।  नुवामा के अनुसार सिरेमिक उद्योग अपना 25 प्रतिशत हिस्सा निर्यात करता है, जो कि पश्चिम एशिया के बाजारों से जुड़ा हुआ है और वर्तमान में चल रहे सघर्ष की वजह से प्रभावित हुआ है।

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तेल की बढ़ती कीमतें  एमएसएमई की परिचालन की लागत को बढ़ा रही हैं

श्रीराम वेल्थ लिमिटेड के सीओओ और उत्पाद प्रमुख, नवल कागलवाला कहते हैं, एमएसएमई क्षेत्रों के लिए तेल की बढ़ती कीमतें परिचालन की लागत को बढ़ा रही हैं। लागत में वृद्धि होने से निर्माताओं और व्यापारियों के लिए माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है। प्लास्टिक, पैकेजिंग, केमिकल और कपड़े में उपयोग होने वाले पेट्रोकेमिकल जैसे कच्चे माल महंगे हो रहे हैं। कार्यशील पूंजी का दबाव बढ़ेगा, क्योंकि उच्च इनपुट लागत मार्जिन को कम करता है और कार्यशील पूंज वित्तपोषण की जरूरत को बढ़ाता है। वहीं दूसरी ओर भारत की तेल आयात पर अत्यधिक निर्भरता और रुपये के अवमूल्यन से छोटे व्यवसायों पर वित्तीय दबाव और बढ़ जाता है।

मांग में मंदी आने की आशंका

जानकार कहते हैं अगर संघर्ष लंबे समय तक चलता है, तो कच्चे तेल और ऊर्जा क्षेत्रों में कीमतें उच्च स्तर पर पहुंचने की संभावना है। इसकी वजह से महंगाई बढ़ती है तो उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति कमजोर हो सकती है, जिससे एमएसएमई उत्पादों की मांग प्रभावित हो सकती है। हालांकि मौजूदा समय में शहरी और ग्रामीण बाजार में उपभोक्ता मांग स्थिर बनी हुई है। बावजूद इसके लोग सतर्क होकर अपनी खरीदारी कर रहे हैं।



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