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महाराष्ट्र: 11 अगस्त से बढ़ने वाले हैं दूध के दाम, जानें प्रति लीटर कितने रुपये का होगा इजाफा
Sun, 09 Aug 2026 05:05 PM IST
राहुल कुमार
आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Sun, 09 Aug 2026 05:05 PM IST
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दूध
- फोटो : Freepik.com
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महाराष्ट्र में 11 अगस्त से गाय और भैंस दोनों के दूध के दाम 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ जाएंगे। दूध उत्पादक और प्रसंस्करण कल्याण संघ ने खुदरा कीमतों में संशोधन का फैसला किया है। इस कदम का असर पूरे राज्य में उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है। दूध की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब दूध के दाम को लेकर लगातार चर्चा चल रही है और बढ़ते घरेलू खर्चों का सामना कर रहे उपभोक्ताओं के हितों के साथ डेयरी किसानों के हितों में संतुलन बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
'दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने का उसका कोई प्रस्ताव नहीं'
उत्पादकों और प्रसंस्करणकर्ताओं का कहना है कि खरीद और परिचालन लागत बढ़ने के कारण कीमतों में वृद्धि जरूरी हो गई है। यह घटनाक्रम केंद्र सरकार के हालिया स्पष्टीकरण के बाद सामने आया है कि दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने का उसका कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार ने कहा है कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों के आधार पर सहकारी समितियां और निजी डेयरियां ही दूध की कीमतें तय करती रहेंगी।
पिछले महीने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने कहा कि दूध की कीमतें बाजार आधारित प्रक्रिया के तहत तय होती हैं और सरकार इस क्षेत्र के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था पर विचार नहीं कर रही है।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार डेयरी किसानों के हितों की रक्षा करने, दूध की कीमतों को स्थिर रखने, उपभोक्ताओं की सुरक्षा करने और पूरी डेयरी मूल्य श्रृंखला में गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से कई उपाय लागू कर रही है।
सरकार के अनुसार, अधिक से अधिक उत्पादकों को संगठित डेयरी क्षेत्र से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। मार्च 2026 तक गांव स्तर पर कुल 36,283 नई डेयरी सहकारी समितियां स्थापित की जा चुकी थीं, जबकि 31,150 मौजूदा समितियों को मजबूत किया गया था।
सरकार ने प्रतिदिन 168 लाख लीटर की दूध शीतलन क्षमता भी विकसित की है और देशभर में दूध की गुणवत्ता जांच के लिए 76,748 उपकरण वितरित किए हैं। इसके अलावा, डेयरी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और दक्षता बढ़ाने के लिए प्रतिदिन कुल 418 लाख लीटर की दूध प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन क्षमता वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
सरकार ने पिछले एक दशक में भारत के दूध उत्पादन में हुई मजबूत वृद्धि का भी जिक्र किया। भारत का दूध उत्पादन 2014-15 में 146 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 248 मिलियन मीट्रिक टन हो गया, जो लगभग 69 प्रतिशत की वृद्धि है।
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'दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने का उसका कोई प्रस्ताव नहीं'
उत्पादकों और प्रसंस्करणकर्ताओं का कहना है कि खरीद और परिचालन लागत बढ़ने के कारण कीमतों में वृद्धि जरूरी हो गई है। यह घटनाक्रम केंद्र सरकार के हालिया स्पष्टीकरण के बाद सामने आया है कि दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने का उसका कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार ने कहा है कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों के आधार पर सहकारी समितियां और निजी डेयरियां ही दूध की कीमतें तय करती रहेंगी।
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पिछले महीने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने कहा कि दूध की कीमतें बाजार आधारित प्रक्रिया के तहत तय होती हैं और सरकार इस क्षेत्र के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था पर विचार नहीं कर रही है।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार डेयरी किसानों के हितों की रक्षा करने, दूध की कीमतों को स्थिर रखने, उपभोक्ताओं की सुरक्षा करने और पूरी डेयरी मूल्य श्रृंखला में गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से कई उपाय लागू कर रही है।
सरकार के अनुसार, अधिक से अधिक उत्पादकों को संगठित डेयरी क्षेत्र से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। मार्च 2026 तक गांव स्तर पर कुल 36,283 नई डेयरी सहकारी समितियां स्थापित की जा चुकी थीं, जबकि 31,150 मौजूदा समितियों को मजबूत किया गया था।
सरकार ने प्रतिदिन 168 लाख लीटर की दूध शीतलन क्षमता भी विकसित की है और देशभर में दूध की गुणवत्ता जांच के लिए 76,748 उपकरण वितरित किए हैं। इसके अलावा, डेयरी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और दक्षता बढ़ाने के लिए प्रतिदिन कुल 418 लाख लीटर की दूध प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन क्षमता वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
सरकार ने पिछले एक दशक में भारत के दूध उत्पादन में हुई मजबूत वृद्धि का भी जिक्र किया। भारत का दूध उत्पादन 2014-15 में 146 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 248 मिलियन मीट्रिक टन हो गया, जो लगभग 69 प्रतिशत की वृद्धि है।