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Moody's Report: पश्चिम एशिया तनाव का भारत पर पड़ेगा बड़ा असर, बढ़ेगी महंगाई; जीडीपी वृद्धि दर भी गिरेगी

Sun, 05 Apr 2026 11:55 AM IST
Devesh Tripathi बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Sun, 05 Apr 2026 11:55 AM IST
सार

मूडीज ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते भारत की आर्थिक वृद्धि और महंगाई को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति बाधाओं के कारण विकास दर धीमी हो सकती है और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

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Moody's Report West Asia tensions will have major impact on India inflation rise GDP growth rate fall
वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज का अनुमान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मूडीज रेटिंग्स ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाते हुए नए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इसे 6 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.8 प्रतिशत आंका गया था। वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से भारत की आर्थिक गति पर असर पड़ेगा और महंगाई के जोखिम बढ़ेंगे।
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रिपोर्ट के अनुसार, एलपीजी आपूर्ति में बाधा और ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से घरेलू स्तर पर असर दिख सकता है। इससे परिवहन लागत बढ़ेगी और खाद्य महंगाई पर भी दबाव पड़ेगा, क्योंकि भारत उर्वरकों के आयात पर निर्भर है। पश्चिम एशिया से भारत में कच्चे तेल का लगभग 55 प्रतिशत और एलपीजी का 90 प्रतिशत से अधिक आयात होता है।
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महंगाई बढ़ने का अनुमान
मूडीज ने नए वित्त वर्ष में औसत महंगाई दर 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो 2025-26 के 2.4 प्रतिशत से अधिक है। एजेंसी के अनुसार, भू-राजनीतिक जोखिमों के चलते महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती महंगाई और स्थिर आर्थिक वृद्धि के बीच नीतिगत ब्याज दरों को स्थिर रखा जा सकता है या धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है, जो संघर्ष की अवधि और उसके प्रभाव पर निर्भर करेगा।


विकास दर पर दबाव के कारण
एजेंसी के मुताबिक निजी खपत में कमी, औद्योगिक गतिविधियों में नरमी और उच्च लागत के कारण निवेश की गति धीमी पड़ सकती है, जिससे विकास दर प्रभावित होगी। 

अन्य रेटिंग एजेंसियों का क्या है अनुमान?
  • ओईसीडी ने भी हाल ही में भारत की वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।
  • वहीं ईवाई की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर संघर्ष जारी रहा तो वृद्धि दर में लगभग एक प्रतिशत की कमी आ सकती है। 
  • घरेलू रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने वित्त वर्ष 2026-27 में विकास दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

राजकोषीय दबाव बढ़ने की आशंका
रिपोर्ट के अनुसार, तेल, गैस और उर्वरकों की ऊंची कीमतों से सरकारी सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा और राजस्व पर दबाव पड़ेगा। इसके साथ ही पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से टैक्स संग्रह पर असर पड़ सकता है।

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बाहरी क्षेत्र पर प्रभाव
भारत का चालू खाता घाटा 2025 में घटकर 0.4 प्रतिशत रहा, लेकिन 2026-27 में इसके 1-1.5 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। महंगे आयात और व्यापार में बाधाओं के कारण यह दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि खाड़ी क्षेत्र से आने वाली रेमिटेंस, जो कुल प्रवाह का लगभग 40 प्रतिशत है, भी जोखिम में आ सकता है।

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