फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   NABARD Survey raises concerns Rural India's earnings stagnate while expenses rise dampens confidence in future

Nabard Survey: ग्रामीण भारत की कमाई थमी: खर्च बढ़ा; नाबार्ड सर्वे ने बढ़ाई चिंता, भविष्य को लेकर भी घटा भरोसा

Sat, 25 Jul 2026 05:26 AM IST
प्रशांत तिवारी अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sat, 25 Jul 2026 05:26 AM IST
सार

नाबार्ड के जुलाई 2026 के सर्वे के अनुसार ग्रामीण भारत में आय वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ गई है। 52.6% परिवारों की आय पिछले एक वर्ष में नहीं बढ़ी, जबकि करीब 20% परिवारों की आमदनी घटी है। इसके बावजूद 74.1% परिवारों का घरेलू खर्च बढ़ा है और अधिकांश आय उपभोग पर खर्च हो रही है। वहीं, ग्रामीण परिवारों ने अगले एक वर्ष में महंगाई 5.8% रहने का अनुमान जताया है, जिससे भविष्य को लेकर उनकी चिंता भी बढ़ती दिख रही है।

विज्ञापन
NABARD Survey raises concerns Rural India's earnings stagnate while expenses rise dampens confidence in future
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ग्रामीण भारत में आमदनी की रफ्तार कमजोर पड़ रही है और इसका असर बचत, रोजगार तथा भविष्य को लेकर परिवारों के भरोसे पर भी दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के जुलाई 2026 के सर्वे में देशभर के 20,000 ग्रामीण परिवारों से मिली प्रतिक्रियाओं में 52.6% ने कहा कि पिछले एक वर्ष में उनकी आय नहीं बढ़ी, जबकि 19.8% परिवारों की आमदनी घट गई। केवल 27.7% परिवारों ने आय बढ़ने की बात कही, जो सितंबर 2024 में सर्वे शुरू होने के बाद सबसे कम है। इसके बावजूद घरेलू खर्च बढ़ा है और ग्रामीण परिवारों के उपभोग व्यय में भोजन की हिस्सेदारी सबसे अधिक बनी हुई है। अगले तीन महीनों में रोजगार की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद केवल 39.3% परिवारों ने जताई है। इसी अवधि में आय बढ़ने की संभावना देखने वाले परिवारों की हिस्सेदारी 41.2% रह गई, जो अब तक के सर्वे में सबसे कम है।

विज्ञापन


आमदनी नहीं बढ़ी, फिर भी खर्च क्यों बढ़ता जा रहा है?
आय में कमजोरी के बावजूद ग्रामीण परिवारों के घरेलू खर्च में वृद्धि जारी है। सर्वे में 74.1% परिवारों ने कहा कि पिछले एक वर्ष में उनका उपभोग व्यय बढ़ा है। औसतन ग्रामीण परिवार अपनी मासिक आय का 66.5% उपभोग पर खर्च कर रहे हैं। इसके मुकाबले 13.6% आय बचत में जाती है, जबकि 12.5% हिस्सा पुराने कर्ज की अदायगी में खर्च हो रहा है।
विज्ञापन


सर्वे के प्रमुख आंकड़े क्या बताते हैं?
69.6% परिवारों को अगले एक साल में आय बढ़ने की उम्मीद है।
74.1% परिवारों का पिछले एक वर्ष में उपभोग खर्च बढ़ा है।
66.5% मासिक आय औसतन उपभोग पर खर्च होती है।
13.6% मासिक आय बचत में जाती है।
12.5% मासिक आय पुराने कर्ज की अदायगी में खर्च होती है।
23.6% परिवार केवल अनौपचारिक स्रोतों से कर्ज ले रहे हैं।
5.8% अगले एक वर्ष की औसत महंगाई दर का अनुमान लगाया गया है।

ये भी पढ़ें: Vaishno Devi Yatra: पांच दिन बाद बहाल होगी वैष्णो देवी यात्रा, फिलहाल एक दिन में 10 हजार को दर्शन की अनुमति
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या महंगाई को लेकर ग्रामीण परिवारों की चिंता बढ़ रही है?
ग्रामीण परिवारों के बीच कीमतों को लेकर चिंता भी बढ़ी है। जुलाई 2026 के सर्वे में उत्तरदाताओं ने अगले एक वर्ष के दौरान औसत महंगाई दर 5.8% रहने का अनुमान लगाया है। मार्च 2026 के सर्वे में यही अनुमान 4.4% था। यानी कुछ ही महीनों में ग्रामीण परिवारों की महंगाई संबंधी अपेक्षाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आय की धीमी वृद्धि के बीच महंगाई की बढ़ती आशंका इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ग्रामीण परिवार पहले ही अपनी आमदनी का बड़ा हिस्सा रोजमर्रा के उपभोग पर खर्च कर रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed