West Asia Crisis: युद्ध खत्म होने पर भी नहीं घटेंगी तेल-गैस कीमतें, जानें यूरोपीय संघ ने ऐसा क्यों कहा
ईरान युद्ध के चलते यूरोप में तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है, जो जल्द कम होने की संभावना नहीं है। ईयू ने राहत के लिए टैक्स कटौती और अन्य उपायों की तैयारी शुरू की है। आइए विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
ईरान के साथ जारी युद्ध के चलते यूरोप में तेल और गैस की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी जल्द कम होने की उम्मीद नहीं है। यूरोपीय संघ के ऊर्जा आयुक्त डैन जोर्गेनसेन ने चेतावनी दी कि भले ही कल शांति स्थापित हो जाए, फिर भी कीमतें निकट भविष्य में सामान्य स्तर पर नहीं लौटेंगी।
उन्होंने बताया कि 27 सदस्य देशों वाले यूरोपीय संघ में तेल और गैस की सप्लाई में कोई तत्काल कमी नहीं है, लेकिन डीजल और जेट फ्यूल की उपलब्धता पर दबाव है। साथ ही वैश्विक गैस बाजार में बढ़ती बाधाओं के कारण बिजली की कीमतें भी ऊपर जा रही हैं।
युद्ध के बाद से यूरोप में गैस की कीमतों में करीब 70% और तेल की कीमतों में 60% तक का उछाल आ चुका है। इससे आयातित जीवाश्म ईंधन पर ईयू का खर्च भी 14 अरब यूरो तक बढ़ गया है।
राहत के लिए तैयार हो रहा प्लान
यूरोपीय आयोग अब परिवारों और उद्योगों को राहत देने के लिए कई कदम तैयार कर रहा है। इसमें गैस और बिजली की कीमतों को अलग करने के उपाय, बिजली पर टैक्स में कटौती और जरूरत पड़ने पर कंपनियों पर विंडफॉल टैक्स लगाने जैसे विकल्प शामिल हैं। यह सुझाव उर्सुला वॉन डेर लेयेन की ओर से भी सामने आया है।
ऊर्जा निर्भरता घटाने पर जोर
आयुक्त ने कहा कि ईयू अब रूस पर ऊर्जा निर्भरता खत्म करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। युद्ध से पहले जहां 45% गैस रूस से आती थी, अब यह घटकर 10% रह गई है और आने वाले समय में इसे शून्य तक लाने की योजना है। इसके लिए अमेरिका, अज़रबैजान, अल्जीरिया और कनाडा जैसे देशों से सप्लाई बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
एकजुटता की अपील
जॉर्गेंसन ने सदस्य देशों से समन्वित कदम उठाने की अपील करते हुए कहा कि अलग-अलग राष्ट्रीय नीतियां बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि EU को अतीत की गलतियों को नहीं दोहराना चाहिए, जब रूस ने ऊर्जा को हथियार की तरह इस्तेमाल किया।