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राहत नहीं: महंगा पेट्रोल-डीजल बेचकर तेल कंपनियों ने कमाए 23743 करोड़, ग्राहकों को नहीं मिला फायदा
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: लव गौर
Updated Thu, 19 Feb 2026 05:21 AM IST
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सार
Crude Oil: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय से 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई राहत नहीं मिली। उल्टा इस दौरान सरकारी तेल कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया है।
कच्चे तेल के व्यापार से जुड़ी कंपनियों के शेयर गिरे
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय से 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। इस दौरान घरेलू तेल कंपनियों ने ग्राहकों को महंगा पेट्रोल और डीजल बेचकर भारी मुनाफा कमाया है। तीन प्रमुख सरकारी कंपनियों को चालू वित्त वर्ष 2025-26 की दिसंबर तिमाही में 23,743 करोड़ का मुनाफा हुआ है, जो एक साल पहले की समान अवधि के 10,545 करोड़ रुपये की तुलना में दोगुना से भी ज्यादा है।
आंकड़े बताते हैं कि तेल कंपनियों के मुनाफे में यह भारी वृद्धि मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन और एलपीजी की कम अंडर रिकवरी के कारण हुई है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) दिसंबर तिमाही में चार गुना बढ़ गया। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) का जीआरएम दो गुना से अधिक हो गया। यह वृद्धि कच्चे तेल की नरम कीमतों और उत्पाद क्रैक में मजबूती के कारण हुई। देशभर में इस समय एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं। इसमें से 90 फीसदी हिस्सेदारी तीनों सरकारी कंपनियों के पास है। बाकी नायरा और रिलायंस के पास हैं।
ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन में बढ़ोतरी
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के आंकड़ों के मुताबिक, आईओसी का जीआरएम एक साल पहले के तीन डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 12.2 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। बीपीसीएल का जीआरएम 5.6 डॉलर से बढ़कर 13.3 डॉलर हो गया। एचपीसीएल का जीआरएम 6 डॉलर से बढ़कर 8.9 डॉलर हो गया। एक साल पहले तीनों सरकारी कंपनियों को 10545 करोड़ का मुनाफा हुआ था।
क्रैक स्प्रेड में भी एक साल पहले की तुलना में सुधार
डीजल, पेट्रोल और विमानन टरबाइन ईंधन पर क्रैक स्प्रेड (कच्चे तेल की कीमत और उसके रिफाइनिंग उत्पादों की कीमत के बीच का अंतर) में पिछले वर्ष की तुलना में सुधार हुआ है। दिसंबर तिमाही में बेंचमार्क सिंगापुर जीआरएम बढ़कर 6.2 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 4.9 डॉलर प्रति बैरल था।
सरकारी मुआवजे और एलपीजी की कम कीमतों ने भी बढ़ाई कंपनियों की कमाई
आईओसी ने दिसंबर तिमाही में 12,126 करोड़ का लाभ दर्ज किया। बीपीसीएल और एचपीसीएल ने क्रमशः 7,545 करोड़ और 4,072 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया। दिसंबर तिमाही में सरकार ने खाना पकाने की गैस को बाजार दर से कम दामों पर बेचने के लिए तेल विपणन कंपनियों को वादे के तहत मुआवजा देना शुरू कर दिया है। मुआवजे की प्राप्ति के साथ तिमाही के दौरान एलपीजी की कम कीमतों ने भी कंपनियों की कमाई बढ़ाने में मदद की।
ये भी पढ़ें: Russia: भारत ने बंद नहीं किया रूसी तेल खरीदना, अमेरिका के दावे पर रूस ने दिया जवाब; शांति और ऊर्जा पर जोर
मार्केटिंग मार्जिन में गिरावट
पंप की कीमतें अपरिवर्तित रहने से तीनों सरकारी रिफाइनरियों के मार्केटिंग मार्जिन में गिरावट आई। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर तिमाही में पेट्रोल पर खुदरा मार्जिन 7.8 रुपये प्रति लीटर रहा, जो एक साल पहले के 12 रुपये प्रति लीटर से कम है। डीजल पर खुदरा मार्जिन 2.9 रुपये प्रति लीटर रहा, जो पहले के 8 रुपये से कम है।
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ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन में बढ़ोतरी
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के आंकड़ों के मुताबिक, आईओसी का जीआरएम एक साल पहले के तीन डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 12.2 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। बीपीसीएल का जीआरएम 5.6 डॉलर से बढ़कर 13.3 डॉलर हो गया। एचपीसीएल का जीआरएम 6 डॉलर से बढ़कर 8.9 डॉलर हो गया। एक साल पहले तीनों सरकारी कंपनियों को 10545 करोड़ का मुनाफा हुआ था।
क्रैक स्प्रेड में भी एक साल पहले की तुलना में सुधार
डीजल, पेट्रोल और विमानन टरबाइन ईंधन पर क्रैक स्प्रेड (कच्चे तेल की कीमत और उसके रिफाइनिंग उत्पादों की कीमत के बीच का अंतर) में पिछले वर्ष की तुलना में सुधार हुआ है। दिसंबर तिमाही में बेंचमार्क सिंगापुर जीआरएम बढ़कर 6.2 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 4.9 डॉलर प्रति बैरल था।
सरकारी मुआवजे और एलपीजी की कम कीमतों ने भी बढ़ाई कंपनियों की कमाई
आईओसी ने दिसंबर तिमाही में 12,126 करोड़ का लाभ दर्ज किया। बीपीसीएल और एचपीसीएल ने क्रमशः 7,545 करोड़ और 4,072 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया। दिसंबर तिमाही में सरकार ने खाना पकाने की गैस को बाजार दर से कम दामों पर बेचने के लिए तेल विपणन कंपनियों को वादे के तहत मुआवजा देना शुरू कर दिया है। मुआवजे की प्राप्ति के साथ तिमाही के दौरान एलपीजी की कम कीमतों ने भी कंपनियों की कमाई बढ़ाने में मदद की।
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मार्केटिंग मार्जिन में गिरावट
पंप की कीमतें अपरिवर्तित रहने से तीनों सरकारी रिफाइनरियों के मार्केटिंग मार्जिन में गिरावट आई। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर तिमाही में पेट्रोल पर खुदरा मार्जिन 7.8 रुपये प्रति लीटर रहा, जो एक साल पहले के 12 रुपये प्रति लीटर से कम है। डीजल पर खुदरा मार्जिन 2.9 रुपये प्रति लीटर रहा, जो पहले के 8 रुपये से कम है।
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