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The Bonus Market Updates: शेयर बाजार की उतार-चढ़ाव भरी शुरुआत; सेंसेक्स 479 अंक गिरा, निफ्टी 23900 के करीब

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 27 May 2026 09:36 AM IST
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सार

ईरान पर अमेरिकी हमलों के बीच भारतीय शेयर बाजार की बुधवार को उतार-चढ़ाव भरी शुरुआत। सेंसेक्स 76,091 पर, निफ्टी 23,900 के ऊपर, जबकि एचडीएफसी बैंक 2% गिरा। पूरी बिजनेस न्यूज पढ़ें।

Opening Bell: Indian Market Sees Choppy Start Amid US-Iran Tensions; Nifty Holds Above 23,900
सेंसेक्स ओपनिंग बेल - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और विशेष रूप से ईरान पर अमेरिकी हमलों के प्रभाव के बीच, बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत उतार-चढ़ाव के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांकों ने मामूली गिरावट के साथ लाल निशान में शुरुआत की, क्योंकि निवेशक शांति समझौते की उम्मीदों पर इन हमलों के संभावित असर का आकलन कर रहे हैं। हालांकि, इस दबाव के बावजूद व्यापक बाजारों ने बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में अपना बेहतर प्रदर्शन जारी रखा है।

बाजार के मुख्य आंकड़े

बुधवार, 27 मई 2026 के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला:

  • सेंसेक्स: बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 479.26 (-0.62%) अंक टूटकर 76,009.70 के स्तर पर कारोबार करता दिखा
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  • निफ्टी: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स शुरुआती दबाव के कारण 118.00 (-0.49%) कमजोर होकर 23,913.70 के स्तर पर पहुंचा।
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  • प्रमुख स्टॉक्स का हाल: व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो बैंकिंग दिग्गज एचडीएफसी बैंक के शेयरों में दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि इटरनल के स्टॉक ने 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे निशान में कारोबार किया। 

वैश्विक तनाव और बाजार पर प्रभाव

बाजार में इस सतर्कता का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरती अनिश्चितता है। निवेशक ईरान पर अमेरिका द्वारा किए गए हमलों पर करीब से नजर बनाए हुए हैं और यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इसका अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर क्या असर होगा। यही कारण है कि बुधवार को बाजार लाल निशान में खुले और निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। 

शेयर बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू बाजार की क्रमिक तेजी आगे भी जारी रह सकती है। हालांकि, इसके लिए यह जरूरी है कि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहें और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम हों। फिलहाल, अमेरिका-ईरान वार्ता से मिल रहे मिले-जुले संकेतों और वैश्विक घटनाक्रमों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण निवेशकों का रुख सतर्क ही रहने की उम्मीद है।

बाजार पर अंतरराष्ट्रीय तनाव और विदेशी बिकवाली की मार

बाजार में इस तेज उतार-चढ़ाव की सबसे बड़ी वजह दुनिया भर में बढ़ रहा भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार निकाला जा रहा पैसा है। ईरान के दक्षिणी हिस्से में हुए नए अमेरिकी सैन्य हमलों ने मध्य पूर्व में कूटनीतिक शांति की उम्मीदों को काफी कमजोर कर दिया है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का डर निवेशकों को फिर से सताने लगा है। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों ने मंगलवार को ही 2,407 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच डाले, जिससे बाजार पर बिकवाली का भारी दबाव बन गया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा अस्थिर वैश्विक माहौल के कारण उभरते बाजारों में विदेशी निवेशक लगातार जोखिम लेने से बच रहे हैं और बिकवाली का रुख अपना रहे हैं।

इन दिग्गज शेयरों में दिखा सबसे ज्यादा एक्शन

इस उठापटक वाले कारोबारी माहौल में कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों को भारी नुकसान उठाना पड़ा, तो वहीं कुछ ने शानदार बढ़त भी बनाई। बाजार को नीचे खींचने वालों में एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एक्सिस बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) जैसे बड़े नाम सबसे आगे रहे। दूसरी तरफ, इस बिकवाली के दबाव के बावजूद एनटीपीसी (एनटीपीसी), पावर ग्रिड, इटरनल और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली और ये फायदे में रहे। इन सबके बीच, वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमत 1.56 प्रतिशत गिरकर 98 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई है, जो भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए एक राहत की बात हो सकती है।

निवेशकों के लिए आगे क्या हैं संकेत?

शेयर बाजार के जानकारों का साफ कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हालात अस्थिर रहेंगे, तब तक बाजार में ऐसा ही डर और उतार-चढ़ाव बना रहेगा। विश्लेषकों के मुताबिक, मध्य पूर्व में चल रहे इस लंबे तनाव और लगातार बदलते घटनाक्रमों के बीच निवेशक बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। ऐसे में बाजार के बड़े खिलाड़ी और छोटे निवेशक अब मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय शांति वार्ताओं की दिशा और विदेशी निवेशकों के अगले कदम पर ही अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं, क्योंकि इन्ही चीजों से तय होगा कि आने वाले दिनों में बाजार फिर से अपनी रफ्तार पकड़ेगा या गिरावट का सिलसिला जारी रहेगा।

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