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Explainer: क्यों बंद हुआ पेटीएम पेमेंट्स बैंक, RBI से लेकर हाईकोर्ट तक कब-क्या हुआ; ग्राहकों के पैसों का क्या?
Tue, 28 Jul 2026 07:57 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 28 Jul 2026 07:57 PM IST
सार
पेटीएम पेमेंट्स बैंक क्यों बंद हुआ है? इसके साथ क्या विवाद जुड़े रहे, क्यों रिजर्व बैंक ने इसके ऑपरेशन्स पर रोक लगाने से लेकर इसका लाइसेंस तक रद्द किया? कैसे पेटीएम से जुड़ा यह विवाद अदालत तक पहुंचा और अब क्या फैसला हुआ है? इससे कितने ग्राहकों पर और क्या असर पड़ेगा? आइये जानते हैं...
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पेटीएम पेमेंट्स बैंक।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को पेटीएम पेमेंट्स बैंक (पीपीबीएल) के लिक्विडेशन का आदेश दे दिया। इसी साल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की तरफ से इस बैक का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। इसके बाद अब हाईकोर्ट का यह फसला इस बैंक के बंद होने की प्रक्रिया में लगभग आखिरी मुहर है।
एक समय भारत में सबसे तेजी से बढ़ते पेटीएम पेमेंट्स बैंक का इस तरह बंद होना देशवासियों के लिए चौंकाने वाला रहा है। हालांकि, पेटीएम के इस वेंचर के साथ विवाद काफी समय से जुड़े रहे।
आइये जानते हैं पेटीएम पेमेंट्स बैंक क्यों बंद हुआ है? इसके साथ क्या विवाद जुड़े रहे, क्यों रिजर्व बैंक ने इसके ऑपरेशन्स पर रोक लगाने से लेकर इसका लाइसेंस तक रद्द किया? कैसे पेटीएम से जुड़ा यह विवाद अदालत तक पहुंचा और अब क्या फैसला हुआ है? इससे कितने ग्राहकों पर और क्या असर पड़ेगा? आइये जानते हैं...
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एक समय भारत में सबसे तेजी से बढ़ते पेटीएम पेमेंट्स बैंक का इस तरह बंद होना देशवासियों के लिए चौंकाने वाला रहा है। हालांकि, पेटीएम के इस वेंचर के साथ विवाद काफी समय से जुड़े रहे।
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आइये जानते हैं पेटीएम पेमेंट्स बैंक क्यों बंद हुआ है? इसके साथ क्या विवाद जुड़े रहे, क्यों रिजर्व बैंक ने इसके ऑपरेशन्स पर रोक लगाने से लेकर इसका लाइसेंस तक रद्द किया? कैसे पेटीएम से जुड़ा यह विवाद अदालत तक पहुंचा और अब क्या फैसला हुआ है? इससे कितने ग्राहकों पर और क्या असर पड़ेगा? आइये जानते हैं...
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पेटीएम पेमेंट्स बैंक क्यों बंद हो रहा है?
पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को बंद यानी उसकी परिसंपत्तियों को लिक्विडेट करने की प्रक्रिया दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद शुरू हो गई है। इस कार्रवाई का आदेश रिजर्व बैंक की तरफ से पेटीएम का लाइसेंस रद्द करने के बाद ही दिया गया। रिजर्व बैंक ने कुछ समय पहले पेटीएम पेमेंट्स बैंक की गतिविधियों पर सवाल उठाए थे। इनमें कई गतिविधियां नियमों से जुड़ी रहीं।
पेटीएम पेमेंट्स बैंक से क्या विवाद जुड़ते गए?
1. नियमों का लगातार उल्लंघन: यह बैंक लंबे समय से विनियामक मानदंडों का पालन करने में नाकाम रहा था। आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पेमेंट्स बैंकों को कर्ज देने से जुड़ी गतिविधियां करने की अनुमति नहीं है। पीपीबीएल ने इस नियम में एक कमी निकाल ली। वह सीधे तौर पर तो कर्ज नहीं दे रहा था, लेकिन वह तीसरे पक्षों के जरिए क्रेडिट-डिस्पेंसिंग यानी कर्ज वितरण की सुविधा दे रहा था, जिसने नियामकों का ध्यान खींचा।
2. जमाकर्ताओं के हितों के खिलाफ कार्य: आरबीआई ने पाया कि बैंक की गतिविधियां इस प्रकार से संचालित की जा रही थीं, जो खुद बैंक और इसके जमाकर्ताओं दोनों के हितों के लिए हानिकारक थीं। यह बैंक लंबे समय से आरबीआई के नियमों की अनदेखी कर रहा था। 2022 में आरबीआई के तत्कालीन गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि संस्थाओं को सुधरने के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है, लेकिन जब वे ऐसा नहीं करती हैं, तब सख्त कार्रवाई करनी पड़ती है। संस्थापक को वित्त मंत्री द्वारा भी नियमों का पालन करने के लिए स्पष्ट रूप से कहा गया था।
3. केवाईसी नियमों का उल्लंघन: आरबीआई ने कहा था कि बैंक ने केवाईसी (नो योर कस्टमर) नियमों का उल्लंघन किया था, जिसके चलते आरबीआई ने पहले इस पर 5.39 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। कुछ रिपोर्ट्स में एक जांच के हवाले से दावा किया गया था कि 1,000 से अधिक खाते एक ही पैन कार्ड से जुड़े हुए थे, जिसने मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गंभीर चिंताओं को जन्म दिया था। तब राजस्व सचिव की तरफ से स्पष्ट किया गया था कि यदि मनी लॉन्ड्रिंग के नए आरोप सामने आते हैं, तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से इसकी जांच की जाएगी।
3. केवाईसी नियमों का उल्लंघन: आरबीआई ने कहा था कि बैंक ने केवाईसी (नो योर कस्टमर) नियमों का उल्लंघन किया था, जिसके चलते आरबीआई ने पहले इस पर 5.39 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। कुछ रिपोर्ट्स में एक जांच के हवाले से दावा किया गया था कि 1,000 से अधिक खाते एक ही पैन कार्ड से जुड़े हुए थे, जिसने मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गंभीर चिंताओं को जन्म दिया था। तब राजस्व सचिव की तरफ से स्पष्ट किया गया था कि यदि मनी लॉन्ड्रिंग के नए आरोप सामने आते हैं, तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से इसकी जांच की जाएगी।
4. कॉरपोरेट गवर्नेंस की खामियां: बैंक के स्वामित्व और शासन संरचना पर भी सवाल उठे थे। पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड में 49% हिस्सेदारी पेटीएम (वन97 कम्युनिकेशंस) की थी और बाकी हिस्सेदारी संस्थापक विजय शेखर शर्मा के पास थी। हालांकि, कंपनी का दावा था कि बैंक स्वतंत्र रूप से काम करता है। आरबीआई को इसके ढांचे और मूल कंपनी के साथ हो रहे लेनदेन को लेकर चिंताएं थीं।
इन्हीं लगातार बढ़ते विवादों की वजह से पहले जनवरी और फरवरी 2024 में बैंक पर नए डिपॉजिट और टॉप-अप स्वीकार करने पर रोक लगाई गई और आखिरकार अप्रैल 2026 में इसका बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया गया।
इन्हीं लगातार बढ़ते विवादों की वजह से पहले जनवरी और फरवरी 2024 में बैंक पर नए डिपॉजिट और टॉप-अप स्वीकार करने पर रोक लगाई गई और आखिरकार अप्रैल 2026 में इसका बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया गया।
पेटीएम पेमेंट्स बैंक।
- फोटो : अमर उजाला
क्या है पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर कार्रवाई का घटनाक्रम?
2017: पेटीएम को अपनी वित्तीय सेवाओं के लिए एक अलग सब्सिडरी- पेटीएम पेमेंट्स बैंक को स्थापित करने और इसके भुगतान बैंक के रूप में कार्य करने का लाइसेंस हासिल हुआ। इसने भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी शुरू की।2018: आरबीआई के एक ऑडिट के बाद जून में पीपीबीएल को नए ग्राहकों के खाते खोलने से रोक दिया गया। तब केवाईसी से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर चिंताएं जताई गई थीं।
2019: जनवरी में पेटीएम पेमेंट्स बैंक को एक बार फिर से नए ग्राहकों को जोड़ने की छूट दे दी गई। आरबीआई ने इस दौरान कुछ अहम शर्तें लगाईं।
11 मार्च 2022: रिजर्व बैंक ने गंभीर निगरानी चिंताओं का हवाला देते हुए बैंक को नए ग्राहकों को जोड़ने से रोक दिया। इसके साथ ही, बैंक को एक बाहरी आईटी ऑडिट फर्म से अपने प्रौद्योगिकी सिस्टम का व्यापक ऑडिट कराने का निर्देश दिया गया।
31 जनवरी 2024 और 16 फरवरी 2024: नियमों के अनुपालन में नाकाम रहने की वजह से आरबीआई ने बैंक पर कड़े व्यावसायिक प्रतिबंध लगाए। इन आदेशों के तहत बैंक को मौजूदा ग्राहक खातों, प्रीपेड उपकरणों, फास्टैग या वॉलेट में नए जमा (डिपॉजिट), क्रेडिट और टॉप-अप स्वीकार करने से पूरी तरह रोक दिया गया। इसके अलावा, बैंक को 29 फरवरी तक अपनी मूल कंपनी और पेटीएम पेमेंट्स सर्विसेज के नोडल खातों को खत्म करने और 29 मार्च तक सभी लंबित पाइपलाइन लेनदेन को निपटाने का निर्देश दिया गया।
24 अप्रैल 2026: नियमों के लगातार उल्लंघन और बैंक का कामकाज जमाकर्ताओं के हितों के लिए हानिकारक पाए जाने पर, आरबीआई ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम की धारा 22(4) के तहत पीपीबीएल का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया। लाइसेंस रद्द करने के बाद आरबीआई ने बैंक को आधिकारिक रूप से बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।
24 अप्रैल 2026: नियमों के लगातार उल्लंघन और बैंक का कामकाज जमाकर्ताओं के हितों के लिए हानिकारक पाए जाने पर, आरबीआई ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम की धारा 22(4) के तहत पीपीबीएल का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया। लाइसेंस रद्द करने के बाद आरबीआई ने बैंक को आधिकारिक रूप से बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।
8 जुलाई 2026 और 22 जुलाई 2026: दिल्ली हाईकोर्ट ने आरबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए, 'बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949' और 'कंपनी अधिनियम, 2013' के प्रावधानों के तहत पेटीएम पेमेंट्स बैंक को पूरी तरह से बंद करने का आदेश दिया। न्यायालय ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के पूर्व मुख्य महाप्रबंधक गिरीकुमार एम. नायर को आधिकारिक लिक्विडेटर नियुक्त किया।
8 जुलाई 2026 से प्रभावी: न्यायालय के आदेश के तहत आधिकारिक लिक्विडेटर ने 8 जुलाई 2026 से बैंक के बोर्ड की सभी शक्तियों का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। अब वे बैंक के परिसमापन और इसे पूरी तरह से बंद करने की कानूनी प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं।
8 जुलाई 2026 से प्रभावी: न्यायालय के आदेश के तहत आधिकारिक लिक्विडेटर ने 8 जुलाई 2026 से बैंक के बोर्ड की सभी शक्तियों का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। अब वे बैंक के परिसमापन और इसे पूरी तरह से बंद करने की कानूनी प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं।
इससे कितने ग्राहकों पर और क्या असर पड़ेगा?
वित्तीय सलाहकार संस्था- मैक्वेरी कैपिटल के आंकड़ों के मुताबिक, पेटीएम पेमेंट्स बैंक में नए ग्राहकों के जुड़ने पर प्रतिबंध से पहले तक इसमें करीब 3.3 करोड़ से ज्यादा वॉलेट और खाते मौजूद थे, जो इस कार्रवाई से प्रभावित हुए। अब बैंक के बंद होने से भी ग्राहक प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, आरबीआई ने इसे लेकर स्पष्ट जानकारी भी दी है।ग्राहकों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित: सबसे अहम बात यह है कि ग्राहकों का पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है। आरबीआई ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बैंक को बंद करने के दौरान उसके पास ग्राहकों की पूरी जमा देनदारी चुकाने के लिए पर्याप्त नकदी मौजूद है।
मौजूदा बैलेंस का उपयोग: ग्राहक अपने बैंक खातों या वॉलेट में पहले से मौजूद शेष राशि का इस्तेमाल पेटीएम से जुड़ी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए बिना किसी प्रतिबंध के कर सकते हैं।
नए जमा और टॉप-अप पर रोक: इस कार्रवाई का सबसे बड़ा असर यह है कि ग्राहक अब अपने पेटीएम पेमेंट्स बैंक खातों, वॉलेट, प्रीपेड उपकरणों, फास्टैग और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) में कोई भी नया पैसा, क्रेडिट या टॉप-अप नहीं कर सकेंगे।
पेटीएम ऐप और यूपीआई सेवाएं सामान्य रहेंगी: ग्राहक पेटीएम ऐप इस्तेमाल यूपीआई, मोबाइल रिचार्ज और अन्य भुगतानों के लिए पहले की तरह ही निर्बाध रूप से कर सकते हैं। पेटीएम की मूल कंपनी- वन97 कम्युनिकेशंस ने अन्य तीसरे-पक्ष के बैंकों के साथ साझेदारी कर ली है। इसके चलते पेटीएम क्यूआर, साउंडबॉक्स, कार्ड मशीन और पेमेंट गेटवे जैसी उसकी प्रमुख व्यावसायिक सेवाएं बिना किसी रुकावट के काम करती रहेंगी।
बाकी निवेश सेवाओं पर भी असर नहीं: पेटीएम के व्यापक इकोसिस्टम का हिस्सा होने के बावजूद, पेटीएम गोल्ड और पेटीएम मनी जैसी निवेश सेवाएं इस विनियामक कार्रवाई से पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी और सामान्य रूप से अपना काम करती रहेंगी।
पेटीएम ऐप और यूपीआई सेवाएं सामान्य रहेंगी: ग्राहक पेटीएम ऐप इस्तेमाल यूपीआई, मोबाइल रिचार्ज और अन्य भुगतानों के लिए पहले की तरह ही निर्बाध रूप से कर सकते हैं। पेटीएम की मूल कंपनी- वन97 कम्युनिकेशंस ने अन्य तीसरे-पक्ष के बैंकों के साथ साझेदारी कर ली है। इसके चलते पेटीएम क्यूआर, साउंडबॉक्स, कार्ड मशीन और पेमेंट गेटवे जैसी उसकी प्रमुख व्यावसायिक सेवाएं बिना किसी रुकावट के काम करती रहेंगी।
बाकी निवेश सेवाओं पर भी असर नहीं: पेटीएम के व्यापक इकोसिस्टम का हिस्सा होने के बावजूद, पेटीएम गोल्ड और पेटीएम मनी जैसी निवेश सेवाएं इस विनियामक कार्रवाई से पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी और सामान्य रूप से अपना काम करती रहेंगी।