रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी जारी: 2026 की पहली छमाही में 11% बढ़ी घरों की बिक्री, जानिए दिल्ली-एनसीआर का हाल
साल की पहली छमाही में भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में घरों की बिक्री 11% बढ़ी। जानिए बेंगलुरु के हाउसिंग मार्केट में आए जबरदस्त उछाल, NCR की सुस्ती और नई प्रॉपर्टी की कीमतों में 20% तक की बढ़ोतरी के बारे में विस्तार से।
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साल 2026 की पहली छमाही (H1CY26) में भारत का रियल एस्टेट बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है। ब्रोकरेज फर्म नुवामा की हालिया रिपोर्ट के आंकड़ों ने यह साबित कर दिया है कि प्रॉपर्टी बाजार में खरीदारों का रुझान अब भी काफी मजबूत है। लग्जरी और प्रीमियम सेगमेंट की जबरदस्त मांग के कारण न केवल घरों की बिक्री के मूल्य में उछाल आया है, बल्कि कीमतों में भी खासी तेजी देखी गई है। लेकिन इस शानदार ग्रोथ के बीच बाजार के रुझान बदल रहे हैं; दक्षिण भारत के शहर विकास का इंजन बन गए हैं, जबकि दिल्ली-एनसीआर का हाउसिंग बाजार सुस्त पड़ता दिखाई दे रहा है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि प्रॉपर्टी बाजार के मौजूदा आंकड़े क्या कहते हैं और आने वाले समय में रियल एस्टेट सेक्टर किस दिशा में जाएगा।
वर्ष 2026 की पहली छमाही में देशभर में घरों की बिक्री का क्या हाल रहा?
नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 के शुरुआती छह महीनों (H1CY26) में देशभर में घरों की बिक्री के मूल्य (वैल्यू) में 11 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। अगर सिर्फ दूसरी तिमाही (Q2CY26) की बात करें, तो यह बढ़ोतरी नौ फीसदी रही। इसके अलावा, जून 2026 में प्रॉपर्टी बिक्री मूल्य में सालाना आधार (YoY) पर पांच फीसदी और मासिक आधार (MoM) पर छह फीसदी का इजाफा देखा गया है। ये आंकड़े साफ इशारा करते हैं कि महंगे होते कर्ज के बावजूद प्रॉपर्टी मार्केट में निवेशकों और घर खरीदारों का पैसा लगातार आ रहा है।
कौन से शहर बने रियल एस्टेट के 'सुपरस्टार' और कहां आई गिरावट?
बिक्री के मामले में दक्षिण भारत का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा है। मूल्य के लिहाज से (Demand Value) बेंगलुरु में सालाना आधार पर 37 फीसदी और चेन्नई में 26 फीसदी का भारी उछाल आया है। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR), पुणे और कोलकाता में भी 13 फीसदी की अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है।
अगर बिक्री की मात्रा (Volume) की बात करें, तो बेंगलुरु 22 फीसदी की छलांग के साथ सबसे आगे रहा, जबकि अन्य प्रमुख शहरों में 4 से 9 फीसदी की ग्रोथ देखी गई। इसके उलट, नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) का बाजार निराशाजनक रहा; यहाँ बिक्री मूल्य में सात फीसदी और बिक्री मात्रा में 18 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
नए प्रोजेक्ट्स (सप्लाई) और बिना बिके घरों (इन्वेंट्री) का क्या गणित है?
सप्लाई यानी नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग में क्षेत्रीय स्तर पर काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। H1CY26 के दौरान बाजार में कुल सप्लाई में नौ फीसदी की बढ़ोतरी हुई। MMR, बेंगलुरु, कोलकाता और हैदराबाद में नई लॉन्चिंग में 10 से 43 फीसदी की तेजी आई। वहीं, NCR और चेन्नई में नए प्रोजेक्ट्स 21 से 34 फीसदी तक घट गए। डिमांड और सप्लाई दोनों पैमानों पर शानदार वृद्धि के साथ बेंगलुरु सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाला बाजार बन गया है।
बिना बिके घरों की बात करें, तो राष्ट्रीय स्तर पर यह 20 महीने के स्तर पर स्थिर है। प्रमुख बाजारों में पुणे सबसे बेहतर स्थिति में है, जहाँ इन्वेंट्री केवल 14 महीने की है। अन्य शहरों में यह 17 से 22 महीने के बीच है, जबकि हैदराबाद में बिना बिके घरों का भंडार सबसे ज्यादा (29 महीने) है।
क्या घरों की कीमतों में भी भारी उछाल आया है?
बिल्कुल। लग्जरी और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में लगातार बनी हुई मजबूत मांग के कारण दूसरी तिमाही (Q2CY26) में सभी प्रमुख शहरों में घरों के दाम बढ़े हैं। कीमतों में बढ़ोतरी के मामले में चेन्नई सबसे आगे रहा, जहां सालाना आधार पर 20 फीसदी का भारी जंप देखने को मिला। इसके अलावा, अन्य बड़े शहरों में भी प्रॉपर्टी के दामों में चार से आठ फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
रियल एस्टेट सेक्टर के भविष्य और शेयरों के लिए क्या है आउटलुक?
नुवामा रिपोर्ट के मुताबिक, रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन मुख्य रूप से 'वॉल्यूम ग्रोथ' यानी बिकने वाले घरों की संख्या पर निर्भर करेगा। रिपोर्ट में बिल्डरों को साफ सलाह दी गई है कि बिक्री की इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए उन्हें अपना फोकस सिर्फ 'लग्जरी सेगमेंट' से हटाकर 'मिड-इनकम और प्रीमियम सेगमेंट' की तरफ मोड़ना होगा। साथ ही, कीमतों और टिकट साइज को सीमित रखकर अफोर्डेबिलिटी बरकरार रखना सबसे जरूरी होगा। रिपोर्ट का अनुमान है कि एनसीआर के बाजार में, विशेषकर पांच से 10 करोड़ रुपये वाले ब्रैकेट में, अभी और चुनौतियां बनी रहेंगी। वहीं, बेंगलुरु और चेन्नई लगातार विकास के पथ पर आगे बढ़ने के लिए सबसे मजबूत स्थिति में हैं।
रियल एस्टेट बाजार का यह रुख स्पष्ट करता है कि खरीदार अब बहुत सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं। जहां बेंगलुरु और चेन्नई जैसे आईटी हब मिड-सेगमेंट और प्रीमियम घरों की मांग के कारण उड़ान भर रहे हैं, वहीं एनसीआर के बाजार को वापसी करने के लिए डेवलपर्स को अपनी रणनीति और प्राइसिंग में बड़ा बदलाव करना होगा।