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Hindi News ›   Business ›   Bazar ›   India's Rice Exports Rise 5% Amid West Asia Crisis, Non-Basmati Leads Growth

Rice Export: पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत का चावल निर्यात पांच फीसदी बढ़ा, गैर-बासमती बना सहारा

Wed, 29 Jul 2026 12:02 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 29 Jul 2026 12:02 PM IST
सार

वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में भारत का चावल निर्यात 5 फीसदी बढ़कर 12.27 दस लाख मीट्रिक टन हुआ। पश्चिम एशिया में संघर्ष के बावजूद गैर-बासमती चावल की मजबूत मांग ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई। मक्का और गेहूं के निर्यात में भी उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया। आइए इस बारे में विस्तार से जानें। 

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India's Rice Exports Rise 5% Amid West Asia Crisis, Non-Basmati Leads Growth
चावल निर्यात - फोटो : amarujala.com

विस्तार

वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में भारत का चावल निर्यात पांच फीसदी बढ़कर 12.27 दस लाख मीट्रिक टन हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह 11.68 दस लाख टन था। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष चल रहा है। इससे व्यापार प्रभावित होने के बावजूद भारत ने बेहतर प्रदर्शन किया है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है, जिसकी वैश्विक बाजार में 40 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है। यह थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे अन्य बड़े निर्यातकों के कुल निर्यात से भी अधिक है। इस वृद्धि से वैश्विक बाजार में चावल की कीमतें नियंत्रित रहने की उम्मीद है। एल नीनो मौसम स्वरूप से उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। फिर भी, अफ्रीका और एशिया के गरीब देशों को सस्ता चावल उपलब्ध होता रहेगा।

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क्या बासमती चावल के निर्यात में कमी आई?

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, बासमती चावल का निर्यात 5.5 फीसदी कम होकर 3.36 दस लाख टन रह गया। ईरान समेत कुछ खाड़ी देशों में व्यापार प्रभावित होने से यह गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, गैर-बासमती चावल ने शानदार प्रदर्शन किया। इसका निर्यात 9.6 फीसदी बढ़कर 8.9 दस लाख टन पहुंच गया। अफ्रीकी देशों से मिली अच्छी मांग का इसे सीधा फायदा हुआ।

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भारत को निर्यात में लाभ क्यों हुआ?

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में व्यापारियों ने बताया कि भारत के पास भरपूर मात्रा में चावल उपलब्ध है। इस कारण भारतीय चावल थाईलैंड, वियतनाम और म्यांमार जैसे अन्य बड़े निर्यातक देशों की तुलना में काफी सस्ता है। भारत मुख्य रूप से बांग्लादेश, बेनिन, आइवरी कोस्ट, गिनी और कैमरून जैसे देशों को गैर-बासमती चावल भेजता है। प्रीमियम बासमती चावल सऊदी अरब, इराक, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बाजारों में जाता है। भारत के कृषि निर्यात में चावल अभी भी सबसे मजबूत हिस्सा बना हुआ है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संकट के बावजूद गैर-बासमती चावल की मजबूत मांग ने निर्यात को संभाल रखा है।

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क्या अन्य अनाजों का निर्यात भी बढ़ा?

इस दौरान भारत का मक्का निर्यात भी जबरदस्त बढ़ा। यह 400 फीसदी उछलकर 1.42 दस लाख टन पहुंच गया। रिकॉर्ड उत्पादन के कारण घरेलू कीमतें कम हुईं। वियतनाम, बांग्लादेश और मलयेशिया जैसे देशों से मक्के की मांग बढ़ी। गेहूं का निर्यात भी बढ़कर 1,61,187 टन हो गया। पिछले साल यह सिर्फ 1,463 टन था। नेपाल ने भारत से गेहूं खरीदना शुरू किया। इसके बाद सरकार ने निर्यात पर लगी पाबंदियां हटा दी थीं।

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