रसोई से बाजार तक की बड़ी क्रांति: PMFME योजना के तहत दो लाख ऋणों का आंकड़ा पार, 11 लाख रोजगार से मिली यह मदद
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में बड़ा बदलाव! पीएमएफएमई (PMFME) योजना के तहत 2 लाख से अधिक सूक्ष्म उद्योगों को ऋण स्वीकृत। रोजगार और महिला उद्यमिता के इन ऐतिहासिक आंकड़ों की पूरी रिपोर्ट पढ़ें। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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भारत के सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बेहद ऐतिहासिक और अभूतपूर्व मुकाम हासिल कर लिया है। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में घोषणा की है कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण (PMFME) योजना के तहत 2 लाख से अधिक सूक्ष्म उद्यमों को ऋण (क्रैडिट-लिंक्ड लोन) स्वीकृत करने का मील का पत्थर पार कर लिया गया है। शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम में सरकार ने साफ किया कि यह नीति अब केवल कागजी नहीं, बल्कि जमीन पर एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुकी है जो देश के कोने-कोने में रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते खोल रही है। इस योजना ने अब तक कुल 20,300 करोड़ रुपये से अधिक के परियोजना निवेश को आकर्षित करने में सफलता पाई है।
इस योजना ने ग्रामीण उद्यमिता और रोजगार की तस्वीर कैसे बदली है?
इस सरकारी पहल ने भारतीय ग्रामीण बाजार को संगठित और मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई है। योजना के तहत स्वीकृत किए गए 2 लाख से अधिक ऋणों का सबसे बड़ा प्रभाव रोजगार सृजन पर पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना के माध्यम से देश भर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 11 लाख रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।
उद्यमिता के लिहाज से इस योजना की सबसे बड़ी सफलता यह है कि इसमें शामिल लगभग 90 प्रतिशत लाभार्थी पहली पीढ़ी के उद्यमी हैं। इसके अलावा, इस क्षेत्र को औपचारिक अर्थव्यवस्था के दायरे में लाने के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं, जिसके तहत 75,000 से अधिक पीएमएफएमई-समर्थित उद्यमों ने उद्यम आधार, उद्यम असिस्ट, एफएसएसएआई और जीएसटी जैसे पंजीकरणों के माध्यम से औपचारिक अर्थव्यवस्था में प्रवेश किया है।
महिला सशक्तिकरण और राज्यों के प्रदर्शन को लेकर क्या आंकड़े सामने आए हैं?
महिला सशक्तिकरण के मोर्चे पर यह योजना विकसित भारत के दृष्टिकोण को हकीकत में बदल रही है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस नीति के तहत विशेष प्रोत्साहन दिए गए हैं:
- महिला उद्यमियों का दबदबा: इस योजना के कुल लाभार्थियों में से लगभग 44 प्रतिशत महिला उद्यमी हैं।
- कौशल विकास में भागीदारी: योजना के तहत अब तक प्रशिक्षित किए गए 1.76 लाख से अधिक लाभार्थियों में से 77 प्रतिशत महिलाएं हैं।
- सीड कैपिटल सपोर्ट: योजना के तहत 4.18 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों को सीड कैपिटल (शुरुआती पूंजी) का महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया गया है।
देश के भौगोलिक परिदृश्य की बात करें तो केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने झारखंड के रांची से आए इंद्रजीत सिंह को 2 लाखवें लाभार्थी के रूप में सम्मानित करते हुए उन्हें ऋण स्वीकृति पत्र और प्रमाण पत्र प्रदान किया।
स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव ए.पी. दास जोशी के अनुसार, पीएमएफएमई योजना सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए वित्त, औपचारिकीकरण, प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण और बाजार पहुंच को एक साथ जोड़ने वाला एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान कर रही है। इस दिशा में कई रणनीतिक कदम उठाए गए हैं:
- वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी): स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए एक जिला एक उत्पाद दृष्टिकोण को लागू किया गया है।
- 40 साझा ब्रांड और 200 उत्पाद: इसके तहत देश भर में मखाना, बाजरा (मिलेट्स), मसाले और जीआई टैग वाले उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए 40 साझा ब्रांड विकसित किए गए हैं जो करीब 200 उत्पादों को कवर करते हैं।
- इन्क्यूबेशन सेंटर्स का नेटवर्क: देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 80 कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर्स की मंजूरी दी गई है, जिनमें से 32 चालू हो चुके हैं।
- एंड-टू-एंड सपोर्ट और जागरूकता: लाभार्थियों को वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण से लेकर ब्रांडिंग, मार्केटिंग और मार्केट लिंकेज की एंड-टू-एंड सुविधाएं दी जा रही हैं। देश के ग्रामीण हिस्सों तक इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी मल्टीमीडिया जागरूकता अभियान भी शुरू किया गया है।
इस अभियान का भविष्य क्या है?
पीएमएफएमई योजना ने देश के सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को औपचारिक रूप देकर एक ठोस और टिकाऊ ढांचा तैयार किया है। सरकार का यह कदम न केवल ग्रामीण आजीविका में सुधार कर रहा है, बल्कि स्थानीय मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत कर कृषि विकास को नई गति दे रहा है। 2 लाख लाभार्थियों का यह मील का पत्थर आत्मनिर्भर भारत और 'विकसित भारत @2047' के राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक बेहद मजबूत और दीर्घकालिक नींव साबित होगा।