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Ola Electric: ओला इलेक्ट्रिक की बढ़ीं मुश्किलें, NCLT ने भेजा तीसरा दिवालियापन नोटिस, जानें क्या है पूरा विवाद

Sat, 11 Jul 2026 02:22 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Sat, 11 Jul 2026 02:22 PM IST
सार

इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता Ola Electric की कानूनी चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं। कंपनी के खिलाफ अब तीसरी दिवाला याचिका दायर की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की बंगलूरू बेंच ने इस मामले में कंपनी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।

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Ola Electric Faces Third Insolvency Petition: NCLT Issues Notice Over Rs 9.57 Cr Unpaid Dues
Ola Electric Scooter - फोटो : X

विस्तार

भारतीय इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) बाजार की दिग्गज कंपनी ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अभी कुछ ही दिन पहले यह खबर सामने आई थी कि स्टर्लिंग ई-मोबिलिटी सॉल्यूशंस (Sterling E-Mobility Solutions) और एनीवॉल्व मैंडो ई-मोबिलिटी (Anevolve Mando eMobility) ने कंपनी के खिलाफ दिवालियापन की कार्रवाई शुरू की है। अब इस शेयर बाजार में लिस्टेड ईवी निर्माता को एक और बड़े झटके का सामना करना पड़ा है। क्योंकि कंपनी के खिलाफ तीसरी दिवालियापन याचिका दायर की गई है।

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एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की बंगलूरू बेंच ने ओला इलेक्ट्रिक के वेंडर सियोन ई-ह्वा समिट मोबिलिटी कृष्णागिरी प्राइवेट लिमिटेड (Seoyon E-Hwa Summit Mobility Krishnagiri Pvt. Ltd.) द्वारा दायर याचिका पर ओला इलेक्ट्रिक को नोटिस जारी किया है। वेंडर ने कथित तौर पर 9.57 करोड़ रुपये के भुगतान में बकाया न चुकाने को लेकर ओला को अदालत में घसीटा है।

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ज्यूडिशियल मेंबर सुनील कुमार अग्रवाल और टेक्निकल मेंबर बनवारी लाल मीणा की पीठ ने कहा कि वेंडर द्वारा 11 मार्च 2026 के बोर्ड रेजोल्यूशन की मूल हस्ताक्षरित कॉपी और हस्ताक्षरकर्ता के पहचान दस्तावेज जमा करने के बाद, प्रतिवादी (ओला इलेक्ट्रिक) को नोटिस भेज दिया जाए। ट्रिब्यूनल ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त तय की है।

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Ola Electric Faces Third Insolvency Petition: NCLT Issues Notice Over Rs 9.57 Cr Unpaid Dues
Ola Electric Scooter Plant - फोटो : Ola Electric

वेंडर और ओला इलेक्ट्रिक के बीच पैसों का क्या विवाद है?

सियोन ई-ह्वा समिट मोबिलिटी के वकील ध्यान चिन्नप्पा ने ट्रिब्यूनल के सामने इस पूरे विवाद का लेखा-जोखा रखा। जिसकी अहम बाते ये हैं:

  • ऑटो पार्ट्स की सप्लाई और मूल बकाया: वेंडर कंपनी ओला इलेक्ट्रिक को ऑटोमोबाइल पार्ट्स की सप्लाई करती थी। जब वेंडर ने 2 अप्रैल को ओला को डिमांड नोटिस भेजा था, तब ईवी निर्माता पर कुल 21.19 करोड़ रुपये का बकाया था।

  • देनदारी पर विवाद: डिमांड नोटिस मिलने के बाद, ओला इलेक्ट्रिक ने वारंटी और स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई से जुड़ी समस्याओं का हवाला देते हुए इस देनदारी पर आपत्ति जताई थी।

  • आंशिक भुगतान और मौजूदा बकाया: हालांकि, बाद में ओला इलेक्ट्रिक ने 21.19 करोड़ रुपये में से 10.62 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। लेकिन इसके बाद भी 9.57 करोड़ रुपये की राशि बकाया रह गई, जिसे न चुकाने पर वेंडर ने NCLT का दरवाजा खटखटाया।

Ola Electric Faces Third Insolvency Petition: NCLT Issues Notice Over Rs 9.57 Cr Unpaid Dues
Bhavish Aggarwal, Ola Electric founder and CMD - फोटो : PTI

बाकी दो वेंडर्स के मामलों पर ओला इलेक्ट्रिक की क्या सफाई है?

एनीवॉल्व मैंडो और स्टर्लिंग ई-मोबिलिटी द्वारा दायर शुरुआती दो याचिकाओं पर भाविश अग्रवाल की अगुवाई वाली कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को स्पष्टीकरण दिया है:

  • पहले से चल रहा विवाद: ओला इलेक्ट्रिक का कहना है कि यह पूरा मामला "पहले से मौजूद विवादों" से जुड़ा है, जो पहले से ही मध्यस्थता के अधीन हैं।

  • वारंटी और परफॉर्मेंस की समस्या: कंपनी ने बताया कि उसने इन दोनों वेंडर्स द्वारा सप्लाई किए गए कुछ पार्ट्स की वारंटी और परफॉर्मेंस (कामकाज) को लेकर पहले ही चिंताएं उठाई थीं।

  • कोर्ट का रुख: ईवी निर्माता ने मध्यस्थता कार्यवाही शुरू कर दी है और आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सिलिएशन एक्ट, 1996 के तहत बंगलूरू की कमर्शियल कोर्ट का रुख भी किया है। ताकि जब तक आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल का गठन नहीं हो जाता, तब तक अंतरिम राहत मिल सके।

पुरानी बात: यह पहली बार नहीं है जब ओला इस संकट में फंसी है। पिछले साल मार्च में रजिस्ट्रेशन सर्विस प्रोवाइडर रोजमर्टा ग्रुप (Rosmerta Group) ने भी ओला के खिलाफ दिवालियापन याचिका दायर की थी। हालांकि, बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया और याचिका वापस ले ली गई थी।

Ola Electric Faces Third Insolvency Petition: NCLT Issues Notice Over Rs 9.57 Cr Unpaid Dues
Ola Electric Scooter - फोटो : X/@bhash

कैसी है ओला इलेक्ट्रिक की मौजूदा वित्तीय और व्यावसायिक स्थिति? 

यह नया कानूनी संकट ऐसे समय में आया है जब ओला इलेक्ट्रिक पिछले कुछ चुनौतीपूर्ण वर्षों के बाद अपने कामकाज को पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है। कंपनी की मौजूदा स्थिति को ऐसे समझा जा सकता है:

  • बिक्री और मार्केट शेयर में गिरावट: पिछले एक साल में कंपनी की बिक्री और बाजार हिस्सेदारी में भारी गिरावट आई है, जबकि ग्राहकों की बढ़ती शिकायतों के बीच कंपनी का घाटा लगातार ऊंचा बना हुआ है।

  • वित्तीय आंकड़े (Q4 FY26): वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4) में ओला इलेक्ट्रिक का शुद्ध घाटा सालाना आधार पर (YoY) 43 प्रतिशत कम होकर 500 करोड़ रुपये रहा। वहीं कम डिलीवरी के कारण कंपनी का राजस्व सालाना आधार पर 57% गिरकर 265 करोड़ रुपये पर आ गया।

  • फंडिंग और भविष्य के लक्ष्य: पिछले महीने ही कंपनी ने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए 780.24 करोड़ रुपये जुटाए हैं।

  • आने वाले समय की योजना: ओला इलेक्ट्रिक ने कहा है कि उसका लक्ष्य चालू कैलेंडर वर्ष के भीतर अपने मार्केट शेयर को वापस 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत पर लाना है। इसके साथ ही वह अपने इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल कारोबार का विस्तार करेगी। और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में अपनी गीगाफैक्ट्री की क्षमता को बढ़ाकर 6 GWh करेगी।

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