RBI MPC: आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने नीतिगत दरों में क्यों नहीं किया बदलाव? एमपीसी के मिनट्स में मिला यह जवाब
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा और मौद्रिक नीति समिति ने लगातार चौथी बार ब्याज दरें अपरिवर्तित रखीं। समिति महंगाई के मार्ग और वैश्विक अनिश्चितताओं पर अधिक स्पष्टता का इंतजार कर रही है।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संजय मल्होत्रा और मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्यों ने इस महीने की शुरुआत में ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने का फैसला किया। दर-निर्धारण समिति की बुधवार को जारी बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार, मल्होत्रा महंगाई के मार्ग पर अधिक निश्चितता का इंतजार करना चाहते हैं। यह लगातार चौथी बार है जब एमपीसी ने बेंचमार्क नीति दर (रेपो) में कोई बदलाव नहीं किया है।
छह सदस्यीय एमपीसी ने अमेरिका-ईरान संघर्ष से बढ़ी ऊर्जा लागत के व्यापक महंगाई दबावों में बदलने की स्पष्टता का इंतजार करने का विकल्प चुना। मल्होत्रा ने बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष, आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और अनियमित मानसून के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है।
उन्होंने कहा कि आपूर्ति-पक्ष के झटके पर मौद्रिक प्रतिक्रिया तभी उचित है जब इसके महंगाई के सामान्यीकरण, महंगाई की उम्मीदों के अस्थिर होने या लगातार महंगाई का संकेत मिले। मल्होत्रा ने यह भी कहा कि जोखिम बने हुए हैं, लेकिन अब तक इसके सबूत सीमित हैं। उन्होंने कहा कि वह नीति दर के किसी भी पुनर्समायोजन के लिए महंगाई के मार्ग पर अधिक निश्चितता आने का इंतजार करना पसंद करेंगे। इसमें वास्तविक आंकड़ों की निरंतरता और महंगाई के सामान्य व स्थिर होने का अनुमानित स्तर शामिल है। मल्होत्रा ने खाद्य, ईंधन और अन्य इनपुट कीमतों में वृद्धि के व्यापक महंगाई में बदलने तथा उम्मीदों के अस्थिर होने के जोखिमों पर सतर्क रहने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
क्या महंगाई पर स्पष्टता का इंतजार है?
आरबीआई के संजय मल्होत्रा ने कहा कि वह महंगाई के मार्ग पर अधिक निश्चिंतता चाहते हैं। उन्होंने वास्तविक आंकड़ों की निरंतरता और महंगाई के सामान्य होने के स्तरों पर स्पष्टता की बात कही। मल्होत्रा ने यह भी बताया कि आपूर्ति-पक्ष के झटके पर मौद्रिक प्रतिक्रिया तभी आवश्यक है जब महंगाई व्यापक रूप से फैलने लगे। उन्होंने कहा कि ऐसे जोखिमों के सामने आने पर नीतिगत सख्ती की आवश्यकता हो सकती है। फिलहाल, ऐसे जोखिमों के सबूत सीमित हैं।
वैश्विक और मौसमी जोखिमों का क्या असर?
डिप्टी गवर्नर और एमपीसी सदस्य पूनम गुप्ता का विचार था कि वैश्विक घटनाक्रम और मौसम संबंधी जोखिमों के कारण लगातार अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसे में इंतजार और निगरानी करना सबसे अच्छा तरीका होगा। गुप्ता ने बताया कि इससे मौसम संबंधी अनिश्चितताओं को पूरी तरह से स्थिर होने का समय मिलेगा। साथ ही, यह पता चल पाएगा कि आपूर्ति-पक्ष की महंगाई कितनी जड़ें जमा रही है। इससे वैश्विक स्तर पर भी अधिक स्पष्टता मिल सकेगी।
अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन कैसा रहा?
मल्होत्रा ने बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान आया है। इसके अलावा, अनिश्चितता बढ़ी है और मानसून भी अब तक अनियमित रहा है। इन चुनौतियों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि खाद्य, ईंधन और अन्य इनपुट कीमतों में वृद्धि के जोखिम बने हुए हैं। इन जोखिमों से महंगाई व्यापक रूप से बढ़ सकती है।