सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   RBI has granted additional time on capital market regulations, with changes taking effect from July 1

RBI: कैपिटल मार्केट नियमों पर रिजर्व बैंक ने दी अतिरिक्त मोहलत, 1 जुलाई से प्रभावी होंगे बदलाव, जानिए

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Tue, 31 Mar 2026 11:21 AM IST
विज्ञापन
सार

RBI ने कैपिटल मार्केट एक्सपोज़र से जुड़े नए नियमों को लागू करने की तारीख 1 अप्रैल से बढ़ाकर 1 जुलाई 2026 कर दी है। यह फैसला बैंकों और बाजार से मिले फीडबैक के बाद लिया गया है, ताकि उन्हें तैयारी के लिए अधिक समय मिल सके। आइए विस्तार से जानते हैं। 

RBI has granted additional time on capital market regulations, with changes taking effect from July 1
आरबीआई गवर्नर - फोटो : RBI
विज्ञापन

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पूंजी बाजार एक्सपोजर से जुड़े संशोधित फ्रेमवर्क के लागू होने की समयसीमा तीन महीने के लिए बढ़ा दी है। अब ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 के बजाय 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे।

Trending Videos


केंद्रीय बैंक का यह फैसला बैंकों, कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज (CMIs) और उद्योग संगठनों से मिले फीडबैक के बाद लिया गया है। इन संस्थाओं ने नए नियमों को लागू करने में परिचालन और व्याख्यात्मक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

किन क्षेत्रों में स्पष्टता प्रदान की गई?

आरबीआई ने इस फ्रेमवर्क के लिए 13 फरवरी 2026 को संशोधन निर्देश जारी किए थे, जो सार्वजनिक परामर्श के बाद तैयार किए गए थे। अब RBI ने अधिग्रहण वित्त , वित्तीय परिसंपत्तियों के खिलाफ ऋण और सीएमआई को दिए जाने वाले क्रेडिट एक्सपोजर जैसे क्षेत्रों में स्पष्टता भी प्रदान की है।

संशोधित नियमों में क्या खास?

संशोधित नियमों के तहत अधिग्रहण वित्त के दायरे को बढ़ाकर अब इसमें विलय और समामेलन को भी शामिल किया गया है। हालांकि, इस तरह की फंडिंग केवल गैर-वित्तीय कंपनियों में नियंत्रण हासिल करने के लिए ही दी जाएगी, जिससे स्पष्ट है कि आरबीआई का फोकस केवल नियंत्रण आधारित सौदों पर है, न कि छोटे निवेशों पर।


अगर लक्ष्य कंपनी एक होल्डिंग कंपनी है, तो बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि संभावित तालमेल सिर्फ मूल कंपनी ही नहीं बल्कि उसकी सभी सहायक कंपनियों में भी मौजूद हो।

कंपनियों के लिए अधिग्रहण वित्त नियमों में बदलाव

नए फ्रेमवर्क में कंपनियों को अधिग्रहण वित्त को भारतीय या विदेशी सहायक कंपनियों के माध्यम से लेने की अनुमति भी दी गई है। वहीं, रीफाइनेंसिंग नियमों को सख्त किया गया है। बैंक अब केवल उसी स्थिति में अधिग्रहण ऋण का पुनर्वित्त कर सकेंगे जब सौदा पूरा हो जाए और नियंत्रण स्थापित हो जाए। साथ ही, यह राशि केवल मूल ऋण चुकाने के लिए ही इस्तेमाल की जा सकेगी।

इसके अलावा, अगर अधिग्रहण वित्त किसी सहायक कंपनी या विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) को दिया जाता है, तो अधिग्रहण करने वाली कंपनी की कॉरपोरेट गारंटी अनिवार्य होगी, जिससे क्रेडिट सुरक्षा मजबूत होगी।

बैंकों के लिए यह स्थगन  सिस्टम और प्रक्रियाओं को नए नियमों के अनुरूप ढालने का अतिरिक्त समय देगा, जबकि स्पष्ट परिभाषाओं से कानूनी अस्पष्टता और जोखिम भी कम होने की उम्मीद है।

वहीं, अधिग्रहण करने वाली कंपनियों के लिए यह फ्रेमवर्क अवसर और सीमाएं दोनों लेकर आया है, जहां एक ओर विलय और सहायक कंपनियों के जरिए फंडिंग के विकल्प बढ़े हैं, वहीं दूसरी ओर केवल नियंत्रण आधारित अधिग्रहण की अनुमति और सख्त रीफाइनेंसिंग शर्तें लागू की गई हैं।

कोलैटरल को लेकर क्या हुए बदलाव?

कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज को भी राहत देते हुए आरबीआई ने 100% नकद या नकद-समान संपार्श्विक या कोलैटरल के खिलाफ प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए बैंक फंडिंग की अनुमति दी है। साथ ही, मार्केट मेकर्स को उन्हीं सिक्योरिटीज़ के खिलाफ फंडिंग लेने की पाबंदी भी हटा दी गई है, जिनका वे बाजार निर्माण में उपयोग करते हैं।



विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed