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एसबीआई चेयरमैन बोले: ब्याज दर बढ़ने से सुस्त पड़ सकती है कंजप्शन क्रेडिट, पर एसेट क्वालिटी पर खतरा नहीं

Mon, 26 Oct 2026 03:58 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 26 Oct 2026 03:58 PM IST
सार

आरबीआई की संभावित दर बढ़ोतरी से कंजप्शन क्रेडिट और डिस्क्रैशनरी डिमांड प्रभावित हो सकती है, लेकिन रिटेल एसेट क्वालिटी पर कोई खतरा नहीं है। जानिए एसबीआई चेयरमैन सीएस सेट्टी के बयान, योनो भारत ऐप और यूपीआई एमडीआर पर पूरी रिपोर्ट।

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RBI Rate Hikes May Dampen Consumption Credit Demand, Retail Asset Quality Remains Safe: SBI Chairman CS Setty
एसबीआई चेयरमैन सीएस सेट्टी - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बढ़ती महंगाई को देखते हुए तीन साल के लंबे अंतराल के बाद ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू किया है। इसका असर आने वाले समय में व्यक्तिगत उपभोग और कर्ज की मांग पर दिखाई दे सकता है।  देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के चेयरमैन और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) के प्रमुख सीएस सेट्टी ने यह बात कही है।

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उन्होंने कहा है कि दर बढ़ोतरी के इस चरण से कंजप्शन और डिस्क्रैशनरी क्रेडिट डिमांड (गैर-जरूरी वस्तुओं के लिए कर्ज) प्रभावित हो सकती है। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि इससे बैंकिंग सिस्टम के स्तर पर रिटेल एसेट क्वालिटी को लेकर घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। मुंबई में आयोजित 'बिजनेस स्टैंडर्ड बीएफएसआई इनसाइट समिट' में बोलते हुए सेट्टी ने बैंकिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी।

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क्या दर बढ़ोतरी से क्रेडिट डिमांड और एसेट क्वालिटी पर असर पड़ेगा?

आरबीआई द्वारा चालू महीने में रेपो रेट में 0.25% (25 बीपीएस) की बढ़ोतरी के साथ ही अपनी नीतिगत रुख को 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया गया है। सेट्टी के अनुसार, दिसंबर 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई द्वारा 0.50% की एक और बढ़ोतरी की जा सकती है, जिसके बाद फरवरी 2027 की बैठक में दरों में ठहराव आने की उम्मीद है। 

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उन्होंने साफ किया कि यदि ब्याज दरों में कुल 0.75% की बढ़ोतरी होती है, तो कंजप्शन क्रेडिट और डिस्क्रैशनरी डिमांड पर दबाव पड़ेगा। हालांकि, चालू वित्त वर्ष में 7.1% की मजबूत जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान के चलते उत्पादक क्षेत्रों से कर्ज की मांग में सुस्ती की संभावना नहीं है। बाहरी बेंचमार्क (ईबीएलआर) से जुड़े लोन तुरंत महंगे होने के बावजूद, सिस्टम स्तर पर रिटेल लोन की एसेट क्वालिटी सुरक्षित बनी रहेगी, हालांकि अत्यधिक कर्ज में दबे कुछ व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के लिए पुनर्भुगतान थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

यूपीआई पर एमडीआर चार्ज लागू करने पर क्या बोले एसबीआई चेयरमैन?

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए सेट्टी ने कहा कि इससे बैंकों को अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और रिस्क इंजन में निवेश बढ़ाने का वित्तीय आधार मिलेगा। 

उन्होंने बताया कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) सभी प्रमुख हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एमडीआर लागू होने पर भी मर्चेंट्स द्वारा ग्राहकों पर कोई अतिरिक्त शुल्क न डाला जाए।

जनधन खाताधारकों के लिए कौन-सा नया डिजिटल एप आ रहा है?

एसबीआई अपने 53 करोड़ कुल जमाकर्ताओं के विशाल आधार में से 17 करोड़ से अधिक जनधन खाताधारकों के लिए अपने लोकप्रिय ऐप का एक विशेष वर्जन योनो भारत विकसित कर रहा है। 

अगले एक वर्ष में लॉन्च होने वाले इस नए प्लेटफॉर्म के जरिए बैंक का लक्ष्य योनो के यूजर बेस को मौजूदा 11 करोड़ से बढ़ाकर 2030 तक 30 करोड़ पहुंचाना है। सेट्टी के अनुसार, ग्राहकों को डिजिटल माध्यम से सेवा देना बैंक के लिए बेहद किफायती है; जहां शाखा में एक ग्राहक के आने पर 40 रुपये से अधिक का खर्च आता है, वहीं डिजिटल ट्रांजैक्शन की लागत महज 1 रुपये बैठती है।

विदेशी जमाओं के इस्तेमाल पर बैंक की क्या योजना है?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल और नौकरियों पर इसके प्रभाव के संबंध में सेट्टी ने स्पष्ट किया कि एआई का क्रियान्वयन केवल इंसानी श्रम को हटाने के लिए नहीं, बल्कि उत्पादकता लाभ के आधार पर तय किया जाता है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कई पश्चिमी कंपनियों ने आक्रामक रूप से एआई अपनाने के बाद यह महसूस किया है कि एआई एजेंट के बजाय मानव कर्मचारियों को रखना अधिक व्यावहारिक है। 

इसके अलावा, हाल ही में बंद हुई कंसेशनल स्वैप स्कीम के तहत जुटाए गए 133 बिलियन डॉलर से अधिक के प्रवासी जमा का उपयोग बैंक किसी अनियंत्रित या आक्रामक लोन में नहीं करेंगे, बल्कि इन फंड्स को आगामी तीन तिमाहियों के भीतर सुरक्षित रूप से इस्तेमाल किया जाएगा।



आरबीआई के कड़े मौद्रिक रुख और संभावित दर बढ़ोतरी के बावजूद भारतीय बैंकिंग क्षेत्र का रिटेल एसेट क्वालिटी आउटलुक मजबूत बना हुआ है। एसबीआई का ध्यान कर्ज वितरण में वित्तीय अनुशासन बरतने के साथ-साथ 'योनो भारत' और यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से देश के दूर-दराज इलाकों तक किफायती डिजिटल बैंकिंग का विस्तार करने पर केंद्रित है।

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