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रिजर्व बैंक: आरबीआई ने कड़े किए नियम, संजय मल्होत्रा बोले- रुपये को सट्टेबाजी से बचाएगी विशेष डॉलर विंडो

Wed, 14 Oct 2026 05:48 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 14 Oct 2026 05:48 PM IST
सार

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित गतिविधि सुनिश्चित करने और सट्टेबाजी रोकने के लिए केंद्रीय बैंक के हालिया उपायों पर बात की। इसमें तेल कंपनियों के लिए विशेष डॉलर विंडो और डेरिवेटिव नियमों को सख्त करना शामिल है।

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RBI's Big Move: Strict Rules to Protect Rupee from Speculation, Dollar Window
आरबीआई गवर्नर - फोटो : RBI

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित गतिविधि सुनिश्चित करने के लिए कई अहम उपाय किए हैं। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि इन कदमों का उद्देश्य अनुचित सट्टा गतिविधि पर अंकुश लगाना है। इसमें तेल विपणन कंपनियों के लिए एक विशेष डॉलर विंडो बनाना भी शामिल है। पिछले सप्ताह आरबीआई ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव व्यापार से जुड़े नियमों को सख्त किया था।
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आरबीआई ने बैंकों को डॉलर खरीद के लिए 20 फीसदी आरक्षित निधि बनाने का निर्देश दिया है। यह कदम रुपये के खिलाफ सट्टा दांव को कम करने के लिए उठाया गया है। तीन सरकारी तेल विपणन कंपनियां डॉलर की सबसे बड़ी उपभोक्ता हैं। उनकी कच्चे तेल के आयात बिल की जरूरतों को देखते हुए यह विशेष विंडो बनाई गई है।
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गवर्नर मल्होत्रा ने एक साक्षात्कार में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इन उपायों का प्राथमिक उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता लाना है। रद किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों की पुनः बुकिंग पर रोक लगा दी गई है। यह भी अनुचित सट्टा दांव को रोकेगा।
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आरबीआई ने ये उपाय क्यों किए?

आरबीआई ने अत्यधिक सट्टा पोजिशनिंग के जवाब में विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि की आवश्यकता शुरू की है। गवर्नर ने बताया कि केंद्रीय बैंक रुपये के लिए कोई विशिष्ट मूल्य स्तर लक्षित नहीं करता। इसका ध्यान मुद्रा में व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करने पर है। साथ ही अत्यधिक सट्टेबाजी को रोकना भी इसका लक्ष्य है। मल्होत्रा ने कहा कि उन्होंने अत्यधिक अस्थिरता और एकतरफा दांव देखे थे। ये दांव रुपये के वास्तविक मूल्य को निर्धारित करने से बाजार शक्तियों को रोक रहे थे।

भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति क्या है?

गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि घरेलू वृद्धि सभी मोर्चों पर बहुत अच्छी चल रही है। बैंक अच्छी तरह से पूंजीकृत, लाभदायक और लगातार बढ़ रहे हैं। कंपनियों में निवेश के शुरुआती संकेत भी दिख रहे हैं, वे लाभदायक हैं। आय वृद्धि में भी सुधार हो रहा है। परिवारों की बैलेंस शीट भी काफी लचीली और मजबूत हैं। हालांकि परिवारों द्वारा उच्च लीवरेज है, फिर भी बैलेंस शीट मजबूत हैं।

क्या भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है?

मल्होत्रा के अनुसार, भारतीय मैक्रो और वित्तीय संस्थान कुल मिलाकर मजबूत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भू-राजनीतिक चुनौतियों पर कड़ी नजर रखना आवश्यक है। इन चुनौतियों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना महत्वपूर्ण है। विदेशी मुद्रा बाजार का प्राथमिक उद्देश्य अंतर्निहित विदेशी मुद्रा आवश्यकताओं को पूरा करना है। यह इक्विटी बाजार से अलग है, जहां प्रतिभागी शेयर मूल्य आंदोलनों पर राय ले सकते हैं।
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