खदानों से ₹1600 करोड़ का कोयला गायब: कर्ज में डूबी कोयला कंपनी में ये क्या हो रहा है, मंत्री ने क्या कहा?
सिंगरेनी कोलियरीज (एससीसीएल) से 1600 करोड़ रुपये का 40 लाख टन कोयला गायब होने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। केंद्रीय कोयला मंत्री ने तेलंगाना के सीएम से तत्काल जांच की मांग की है। 51,500 करोड़ के बकाए और इस नए संकट का पूरा सच जानने के लिए विस्तृत बिजनेस न्यूज पढ़ें।
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विस्तार
तेलंगाना की प्रमुख कोयला खनन कंपनी सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) में एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कंपनी की खदानों से 1600 करोड़ रुपये का 40 लाख टन कोयला रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया है। इस घटना ने पहले से ही भारी वित्तीय दबाव झेल रही इस सरकारी कंपनी के कामकाज पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस गायब हुए कोयले का पूरा सच क्या है और केंद्र सरकार ने इस पर क्या सख्त कदम उठाए हैं।
1. सिंगरेनी खदानों से 1600 करोड़ का कोयला कैसे गायब हुआ?
हाल ही में कई समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सिंगरेनी कोलियरीज (एससीसीएल) से करीब 40 लाख टन कोयला गायब हो गया है। इस लापता कोयले की बाजार कीमत लगभग 1,600 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसके कारण कंपनी को एक बड़ा वित्तीय नुकसान हुआ है।
2. इस गंभीर मामले पर केंद्रीय कोयला मंत्री ने क्या कदम उठाया है?
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने 10 जून, 2026 को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी को एक आधिकारिक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने राज्य सरकार से मामले की तत्काल जांच करने का आग्रह किया है, ताकि गायब हुए कोयले की सच्चाई और कथित अनियमितताओं का पता लगाया जा सके।
3. क्या सिंगरेनी कोलियरीज पहले से ही भारी वित्तीय संकट में है?
हां, यह कोयला कंपनी पहले से ही गहरे वित्तीय संकट से गुजर रही है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, तेलंगाना सरकार पर सिंगरेनी कोलियरीज का 51,500 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। इस भारी-भरकम बकाए के कारण कंपनी की वित्तीय स्थिति पहले ही तनावपूर्ण है, और अब 1600 करोड़ के कोयले के गायब होने की इन रिपोर्ट्स ने कंपनी की आर्थिक स्थिरता को और खतरे में डाल दिया है।
4. सिंगरेनी कोलियरीज का मालिकाना हक किसके पास है?
सिंगरेनी कोलियरीज केंद्र और राज्य सरकार का एक संयुक्त उपक्रम है। इस कंपनी में तेलंगाना सरकार और केंद्र सरकार की क्रमशः 51:49 के अनुपात में इक्विटी हिस्सेदारी है। यानी कंपनी का 51 फीसदी मालिकाना हक राज्य सरकार के पास और 49 फीसदी हिस्सा केंद्र के पास है।
5. भविष्य में ऐसी वित्तीय सेंधमारी को रोकने के लिए केंद्र ने क्या सुझाव दिए हैं?
कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने कंपनी के प्रभावी कामकाज के लिए पर्याप्त सुरक्षा तंत्र और मजबूत आंतरिक नियंत्रण की मांग की है। उन्होंने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि वह तकनीकी निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल करे और समय-समय पर इसकी समीक्षा करे। इससे कमजोरियों को समय रहते पकड़ा जा सकेगा, जिससे सिस्टम की खामियां दूर होंगी और ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोका जा सकेगा। इससे कंपनी की कार्यकुशलता और साख भी मजबूत होगी।
6. कंपनी के कर्मचारियों के भविष्य और कल्याण पर मंत्री ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की है ताकि कंपनी का संचालन बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चलता रहे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सिंगरेनी कोलियरीज (एससीसीएल) से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी कर्मियों के हितों और कल्याण की पूरी तरह रक्षा की जानी चाहिए।
सिंगरेनी कोलियरीज में 40 लाख टन कोयले का गायब होना सिर्फ एक सामान्य चोरी का मामला नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी सिस्टमैटिक विफलता की ओर इशारा करता है। 51,500 करोड़ रुपये के भारी बकाए और इस नई वित्तीय सेंधमारी के बाद, अब यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार इस मामले में कितनी तेजी से जांच पूरी कर कंपनी की पारदर्शिता को बहाल करती है।