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Rajkot Cyber Fraud: 2500 करोड़ रुपये के घोटाले में निजी बैंकों के तीन अधिकारी गिरफ्तार, जानिए पूरा मामला

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Tue, 21 Apr 2026 10:17 AM IST
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सार

गुजरात के राजकोट में 2,500 करोड़ रुपये के साइबर धोखाधड़ी मामले में यस बैंक, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक के तीन अधिकारी गिरफ्तार। हवाला कनेक्शन और 20 लोगों की गिरफ्तारी से जुड़ी पूरी खबर पढ़ें।

Rs 2500 cr cyber fraud in Gujarat: 3 officials of private banks arrested; 20 held so far
आर्थिक अपराध। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

भारतीय बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा और आंतरिक अनुपालनपर सवाल खड़े करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। गुजरात के राजकोट जिले में पुलिस ने 2,500 करोड़ रुपये के एक विशाल साइबर धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस बड़े वित्तीय घोटाले में संलिप्तता के आरोप में तीन प्रमुख निजी बैंकों के अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है, जिसके साथ ही इस मामले में अब तक गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या 20 तक पहुंच गई है।

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घोटाले का बढ़ता दायरा 

राजकोट (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक विजय गुर्जर द्वारा सोमवार को दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पुलिस की शुरुआती जांच में इस धोखाधड़ी की रकम 1,500 करोड़ रुपये आंकी गई थी। हालांकि, जांच आगे बढ़ने पर इस साइबर धोखाधड़ी से जुड़े कुल लेन-देन का आंकड़ा अब 2,500 करोड़ रुपये को पार कर गया है। 

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पुलिस ने इस रैकेट से जुड़े नेटवर्क को खंगालते हुए अब तक 85 बैंक खातों की पहचान की है। इसके अतिरिक्त, इस बड़े घोटाले को लेकर राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर 535 शिकायतें भी दर्ज की जा चुकी हैं।

आरोपियों की पहचान और कार्यप्रणाली

इस वित्तीय गड़बड़ी में गिरफ्तार किए गए तीनों अधिकारी नामी निजी बैंकों से जुड़े हैं। इनकी पहचान पडधरी स्थित यस बैंक के पर्सनल मैनेजर मौलिक कमानी, जामनगर स्थित एक्सिस बैंक के मैनेजर कल्पेश डांगरिया और एचडीएफसी बैंक के पर्सनल बैंकर अनुराग बलधा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, डांगरिया और बलधा इससे पहले यस बैंक में भी कार्यरत थे। जांच एजेंसियों ने धोखाधड़ी को अंजाम देने के इन तरीकों का खुलासा किया है:

  • मौलिक कमानी: इन्होंने पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों को संदिग्ध बैंक खाते खोलने और उनके संचालन में मदद की। उच्च-मूल्य वाले लेनदेन पर बजने वाले बैंकिंग अलर्ट से बचने के लिए कमानी ने अतिरिक्त दस्तावेज जमा किए ताकि खाते सक्रिय रहें। इसके अलावा, यह नकद निकासी कर उसे 'हवाला' (अवैध धन हस्तांतरण प्रणाली) के माध्यम से ट्रांसफर करने में भी शामिल थे, जिसके डिजिटल साक्ष्य उनके मोबाइल उपकरण से बरामद हुए हैं।
  • कल्पेश डांगरिया: इन पर फर्जी और गलत पहचान का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी वाले खाते खुलवाने का आरोप है। इन्होंने कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) से संबंधित कागजातों सहित अन्य दस्तावेजों को इस तरह तैयार किया कि बैंक का सिस्टम इन संदिग्ध लेनदेनों को पकड़ न सके।
  • अनुराग बलधा: इस संगठित गिरोह के हिस्से के रूप में, इन्होंने सत्यापन और प्रमाणन की प्रक्रियाओं को पूरा करके नए बैंक खाते खोले।

पुलिस अधीक्षक के अनुसार, गिरफ्तार किए गए ये तीनों बैंक अधिकारी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं, जबकि इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपी न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद हैं। 2,500 करोड़ रुपये का यह विशाल घोटाला वित्तीय संस्थानों के भीतर 'इनसाइडर' यानी आंतरिक खतरों को उजागर करता है।

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