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US में वसूले गए टैरिफ का रिफंड शुरू: वॉलमार्ट को 10 बिलियन डॉलर मिल सकते हैं, बाकी कंपनियों को कितना मिलेगा?

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Riya Dubey Updated Tue, 21 Apr 2026 09:10 AM IST
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सार

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए कुछ टैरिफ को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक बताया है, जिसके बाद अमेरिकी कंपनियों को रिफंड मिलना शुरू हो सकता है। सीबीपी इस हफ्ते ऑनलाइन पोर्टल शुरू करेगा, जहां कंपनियां दावा दाखिल करेंगी। वॉलमार्ट, टारगेट और नाइकी जैसी बड़ी कंपनियों को अरबों डॉलर वापस मिलने की उम्मीद है।

Refunds begin for tariffs levied in the US: Walmart could receive this billion dollar
ट्रंप प्रशासन को पैसे लौटाने होंगे - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए कुछ आयात शुल्क (टैरिफ) अब अमेरिकी कंपनियों को वापस मिल सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इन टैक्सों को असंवैधानिक बताया है। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) इस हफ्ते एक ऑनलाइन सिस्टम शुरू करने जा रहा है। इसके जरिए कंपनियां और आयातक अपना रिफंड क्लेम कर सकेंगे। 
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कंपनियों को मिलेगा बड़ा फायदा

इस फैसले से उन अमेरिकी कंपनियों को अरबों डॉलर वापस मिल सकते हैं, जिन्होंने विदेशों से सामान मंगाने पर अतिरिक्त टैक्स चुकाया था। वॉलमार्ट जैसी बड़ी कंपनियों को भारी रिफंड मिलने की संभावना है। फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार वॉलमार्ट को लगभग 10.2 अरब डॉलर मिल सकते हैं, जबकि टारगेट (2.2 अरब डॉलर) और नाइकी (1 अरब डॉलर) को भी अरबों डॉलर की वापसी की उम्मीद है। अन्य खुदरा विक्रेताओं को कम राशि मिलेगी, जिनमें गैप (400 मिलियन डॉलर), कोहल्स (550 मिलियन डॉलर) और होम डिपो (540 मिलियन डॉलर) शामिल हैं। वॉलमार्ट के मुख्य वित्तीय अधिकारी जॉन रेनी ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि वापसी की प्रक्रिया बहुत जल्दी पूरी हो जाएगी, और जब यह राशि प्राप्त होगी, तो इसे कंपनी के वित्तीय विवरणों में दर्शाया जाएगा। 
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सीबीपी के अनुसार, 3.3 लाख से ज्यादा आयातकों ने 5.3 करोड़ से अधिक शिपमेंट पर करीब 166 अरब डॉलर टैरिफ के रूप में जमा किए थे। 14 अप्रैल तक 56,497 आयातकों ने एजेंसी के इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम में रजिस्ट्रेशन कराया था, जिससे वे ब्याज सहित 127 अरब डॉलर तक के रिफंड के पात्र बन सकते हैं।

कैसे मिलेगा रिफंड?

कंपनियों को उन सामानों का पूरा विवरण देना होगा, जिन पर टैरिफ चुकाया गया था। दावा सही पाए जाने पर 60 से 90 दिनों के भीतर रिफंड जारी किया जा सकता है।

हालांकि शुरुआत में सभी मामलों को शामिल नहीं किया जाएगा। पहले चरण में उन्हीं मामलों पर कार्रवाई होगी, जहां टैरिफ का अनुमान लगाया गया था लेकिन अंतिम हिसाब नहीं हुआ था, या जिन दावों की समयसीमा अंतिम लेखांकन के 80 दिनों के भीतर है।

विशेषज्ञों ने दी सावधानी बरतने की सलाह

कानूनी विशेषज्ञों ने कंपनियों से आवेदन करते समय सावधानी बरतने को कहा है। विशेषज्ञ मेघन सुपिनो ने कहा कि अगर किसी फाइल में एक भी एंट्री गलत हुई या पात्र नहीं हुई, तो पूरा दावा या संबंधित हिस्सा खारिज हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सिस्टम शुरू होने के शुरुआती दिनों में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं, इसलिए कंपनियों को धैर्य रखना चाहिए।

विशेषज्ञ न्घी हुइन्ह ने कहा कि कंपनियों को हर आवेदन का रिकॉर्ड रखना होगा, क्योंकि एक फाइल में हजारों एंट्री हो सकती हैं और छोटी गलती से दावा रद्द हो सकता है।

कोर्ट ने क्या कहा था?

20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के फैसले में कहा था कि ट्रंप प्रशासन ने 1977 के इमरजेंसी पावर्स कानून का इस्तेमाल कर टैरिफ लगाकर अपनी सीमा पार कर दी थी। बाद में अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने कहा कि प्रभावित कंपनियों को पैसा वापस मिलना चाहिए।

छोटे कारोबारियों को भी राहत

छोटे कारोबार भी अब रिफंड की तैयारी में हैं। मिनेसोटा की कंपनी आफ्टर एक्शन सिगार्स के सह-संस्थापक ब्रैड जैक्सन ने कहा कि उनकी कंपनी ने पिछले साल 34,000 डॉलर टैरिफ चुकाया था और अब दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने चिंता जताई कि अगर रिफंड आने में कई महीने लगते हैं, तो इससे नकदी संकट की समस्या तुरंत हल नहीं होगी।

ग्राहकों को मिलेगा फायदा या नहीं?

रिफंड सीधे कंपनियों को मिलेगा, लेकिन जरूरी नहीं कि आम ग्राहकों को भी फायदा मिले। कई कंपनियों ने टैरिफ का बोझ ग्राहकों पर कीमत बढ़ाकर डाला था, और अब उन्हें वह पैसा लौटाना अनिवार्य नहीं है।
हालांकि फेडएक्स और यूपीएस जैसी डिलीवरी कंपनियां, जिन्होंने कुछ मामलों में ग्राहकों से सीधे शुल्क लिया था, रिफंड लौटाने की तैयारी कर रही हैं।

धीरे-धीरे जारी होंगे भुगतान

सीबीपी ने कहा है कि दावों की जांच के बाद चरणबद्ध तरीके से भुगतान किया जाएगा। यह प्रक्रिया टैरिफ से प्रभावित कारोबारों को आर्थिक राहत देने की दिशा में शुरुआती बड़ा कदम मानी जा रही है।

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