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रिपोर्ट में दावा: उम्मीद से बेहतर रह सकती है पहली तिमाही की GDP ग्रोथ, भारत की अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार
Sun, 02 Aug 2026 02:46 PM IST
Devesh Tripathi
आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 02 Aug 2026 02:46 PM IST
सार
एसबीआई रिसर्च की नई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि अपेक्षा से बेहतर रह सकती है और जीडीपी लगभग 7 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नियंत्रित महंगाई, बेहतर व्यापक आर्थिक परिस्थितियां और जुलाई में हुई अच्छी बारिश से अर्थव्यवस्था को समर्थन मिला है।
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जीडीपी
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
बेहतर होते व्यापक आर्थिक हालात के बीच वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7 प्रतिशत रह सकती है। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी पिछली तीन मौद्रिक नीति समीक्षाओं में पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति को देखते हुए वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया था।
एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "अब हमारा मानना है कि परिस्थितियां बदल चुकी हैं और पहली तिमाही की वृद्धि दर अनुमान से कहीं बेहतर रह सकती है।" दूसरी ओर, अप्रैल 2026 तक आयातित महंगाई नियंत्रित रही, क्योंकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों के माध्यम से भारतीय उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा।
महंगाई पर क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट में कहा गया, "उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई की दिशा अगले दो तिमाहियों में 5 प्रतिशत से अधिक रह सकती है। हालांकि, पहली तिमाही में महंगाई दर 3.9 प्रतिशत रही। पूरे वित्त वर्ष 27 के लिए महंगाई का अनुमान फिलहाल 5 प्रतिशत है, जो आरबीआई के निर्धारित लक्ष्य दायरे के भीतर है।"
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जुलाई की बारिश से कैसे मिली राहत?
जून में धीमी शुरुआत और 40 प्रतिशत वर्षा की कमी के बावजूद जुलाई में हुई अच्छी बारिश से देशभर में कुल वर्षा की कमी घटकर लगभग 13 प्रतिशत रह गई। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार और आंध्र प्रदेश जैसे कुछ खाद्यान्न उत्पादक राज्यों को छोड़कर जुलाई में लगभग सभी राज्यों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। जुलाई खरीफ बुवाई का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया, "भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून के दूसरे चरण (अगस्त-सितंबर) के दौरान देश में सामान्य से कम (दीर्घकालिक औसत का 94 प्रतिशत से कम) वर्षा होने का अनुमान जताया है।"
अल नीनो का पड़ेगा क्या असर?
इसके अतिरिक्त, जून के मध्य से अल नीनो प्रभाव शुरू हो चुका है और यह लगातार मजबूत हो रहा है। आने वाले महीनों में इसके और तीव्र होने की संभावना है। अल नीनो की मौजूदा स्थिति और इसके सामान्य जीवनचक्र को देखते हुए इसके 2027 की शरद ऋतु तक बने रहने की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल देश के प्रमुख जलाशयों में पर्याप्त जल भंडारण उपलब्ध है। यह सामान्य स्तर के बराबर है, हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कम है। मानसून आगे बढ़ने के साथ इसमें और सुधार होने की संभावना है।
एसबीआई रिसर्च ने कहा, "अब तक खरीफ की बुवाई 2025 के स्तर की तुलना में केवल 4.7 प्रतिशत कम है, जो बेहतर फसल का संकेत देती है। इससे आगे चलकर खाद्य महंगाई पर बहुत कम या कोई प्रभाव नहीं पड़ने की उम्मीद है। हालांकि, देर से सक्रिय रहने वाला एल नीनो रबी फसलों को प्रभावित कर सकता है।"
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एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "अब हमारा मानना है कि परिस्थितियां बदल चुकी हैं और पहली तिमाही की वृद्धि दर अनुमान से कहीं बेहतर रह सकती है।" दूसरी ओर, अप्रैल 2026 तक आयातित महंगाई नियंत्रित रही, क्योंकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों के माध्यम से भारतीय उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा।
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महंगाई पर क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट में कहा गया, "उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई की दिशा अगले दो तिमाहियों में 5 प्रतिशत से अधिक रह सकती है। हालांकि, पहली तिमाही में महंगाई दर 3.9 प्रतिशत रही। पूरे वित्त वर्ष 27 के लिए महंगाई का अनुमान फिलहाल 5 प्रतिशत है, जो आरबीआई के निर्धारित लक्ष्य दायरे के भीतर है।"
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जुलाई की बारिश से कैसे मिली राहत?
जून में धीमी शुरुआत और 40 प्रतिशत वर्षा की कमी के बावजूद जुलाई में हुई अच्छी बारिश से देशभर में कुल वर्षा की कमी घटकर लगभग 13 प्रतिशत रह गई। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार और आंध्र प्रदेश जैसे कुछ खाद्यान्न उत्पादक राज्यों को छोड़कर जुलाई में लगभग सभी राज्यों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। जुलाई खरीफ बुवाई का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया, "भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून के दूसरे चरण (अगस्त-सितंबर) के दौरान देश में सामान्य से कम (दीर्घकालिक औसत का 94 प्रतिशत से कम) वर्षा होने का अनुमान जताया है।"
अल नीनो का पड़ेगा क्या असर?
इसके अतिरिक्त, जून के मध्य से अल नीनो प्रभाव शुरू हो चुका है और यह लगातार मजबूत हो रहा है। आने वाले महीनों में इसके और तीव्र होने की संभावना है। अल नीनो की मौजूदा स्थिति और इसके सामान्य जीवनचक्र को देखते हुए इसके 2027 की शरद ऋतु तक बने रहने की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल देश के प्रमुख जलाशयों में पर्याप्त जल भंडारण उपलब्ध है। यह सामान्य स्तर के बराबर है, हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कम है। मानसून आगे बढ़ने के साथ इसमें और सुधार होने की संभावना है।
एसबीआई रिसर्च ने कहा, "अब तक खरीफ की बुवाई 2025 के स्तर की तुलना में केवल 4.7 प्रतिशत कम है, जो बेहतर फसल का संकेत देती है। इससे आगे चलकर खाद्य महंगाई पर बहुत कम या कोई प्रभाव नहीं पड़ने की उम्मीद है। हालांकि, देर से सक्रिय रहने वाला एल नीनो रबी फसलों को प्रभावित कर सकता है।"