द बोनस मार्केट अपडेट: शुरुआती बढ़त गंवाकर 730 अंक टूटा सेंसेक्स, निफ्टी 22,450 के नीचे फिसला; जानिए क्यों
- पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। इस कारण भारतीय बाजार में एफआईआई की बड़ी बिकवाली दिखी है।
- शुक्रवार को सेंसेक्स 730 अंक और निफ्टी 260 अंक टूट गए और बाजार ने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी।
विस्तार
मजबूत शुरुआत के बाद शुक्रवार दोपहर के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में अचानक भारी बिकवाली हावी हो गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 114 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं, जिससे निवेशकों की धारणा काफी प्रभावित हुई। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से लगातार जारी बिकवाली ने घरेलू बाजार के दबाव को और बढ़ा दिया, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मुख्य सूचकांक लगभग 1 प्रतिशत तक टूट गए।
सूचकांकों में कितनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई?
शुक्रवार को सुबह के सत्र में बढ़त के साथ खुलने के बावजूद दोपहर के कारोबार तक बाजार में बिकवाली का दौर शुरू हो गया। बीएसई और एनएसई के मुख्य आंकड़े इस प्रकार दर्ज किए गए।
- सेंसेक्स का हाल: 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स शुरुआती बढ़त गंवाने के बाद दोपहर के कारोबार में 730.30 अंक यानी 1 प्रतिशत टूटकर 72,519.09 के निचले स्तर पर आ गया।
- निफ्टी में गिरावट: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स अपनी शुरुआती बढ़त को गंवाते हुए 260.75 अंक यानी 1.15 प्रतिशत गिरकर 22,426.90 के स्तर पर फिसल गया।
- लगातार दबाव: इससे एक दिन पहले गुरुवार को भी सेंसेक्स 460.30 अंक गिरकर 73,249.39 और निफ्टी 123.70 अंक गिरकर 22,687.65 पर बंद हुआ था, जो लगातार तीसरे सत्र की गिरावट थी।
बिकवाली का बाजार पर क्या असर पड़ा?
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, घरेलू इक्विटी बाजार ने दिन की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की थी, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण यह तेजी ज्यादा देर नहीं टिक सकी।
गिरावट के प्रमुख कारण क्या रहे?
- क्रूड ऑयल 114 डॉलर के पार: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 1 प्रतिशत बढ़कर 114 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई।
- एफआईआई की भारी बिकवाली: गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय बाजार से 3,458.70 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,891.32 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।
किन शेयरों और सेक्टर्स में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली?
शुक्रवार को सेंसेक्स के घटकों में टाटा स्टील सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला शेयर रहा, जिसमें 5 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। आइए जानते हैं बाजार की चाल कैसी रही।
- प्रमुख गिरावट वाले शेयर: टाटा स्टील के अलावा अडानी पोर्ट्स, टाइटन, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), एनटीपीसी, इंडिगो, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फिनसर्व और बजाज फाइनेंस में भारी बिकवाली रही।
- बढ़त दर्ज करने वाले शेयर: दूसरी तरफ, विपरीत माहौल के बावजूद इटरनल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इंफोसिस, लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) और एचडीएफसी बैंक बढ़त के साथ हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।
वैश्विक बाजारों से कैसे संकेत मिल रहे हैं?
वैश्विक बाजारों का रुख मिला-जुला रहा। एशियाई बाजारों ने शुरुआती नुकसान से उबरते हुए काफी हद तक सुधार दर्ज किया, जहां शंघाई का एसएसई कंपोजिट, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त के साथ बंद हुए, हालांकि जापान का निक्केई 225 गिरावट में बंद हुआ। वहीं दूसरी ओर यूरोपीय बाजारों में शुक्रवार को मंदी रही और अमेरिकी बाजार भी गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।
चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर के अनुसार, "हालिया प्राइस एक्शन निचले स्तरों पर सतर्क लिवाली को दर्शाता है, जबकि एफआईआई की ओर से लगातार बिकवाली और बढ़ी हुई अस्थिरता के चलते ट्रेडर्स चयनात्मक रुख अपना सकते हैं। बाजार की वैश्विक दबाव को पचाने और शुरुआती बढ़त को बनाए रखने की क्षमता ही अगली दिशा तय करने के लिए महत्वपूर्ण होगी।"
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया का संकट और एफआईआई की निरंतर बिकवाली शॉर्ट-टर्म में भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल के दाम स्थिर नहीं होते और विदेशी पूंजी की निकासी नहीं रुकती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।