द बोनस मार्केट अपडेट: सेंसेक्स में 1200 अंकों से अधिक की भारी गिरावट, निफ्टी 23,050 के करीब; सभी सेक्टर लाल
Sensex और Nifty में आज भारी गिरावट क्यों आई? जानिए बॉन्ड यील्ड, फेड की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की आशंका, तेल की कीमतों और कमजोर वैश्विक रुझानों का शेयर बाजार पर असर कैसा है।
विस्तार
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार की शुरुआत भारी बिकवाली के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी भी 23,250 के नीचे फिसल गया। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में दबाव ज्यादा रहा। व्यापक बाजार में भी बिकवाली दिखी और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 करीब 1-1 फीसदी नीचे आ गए। बाजार में इस गिरावट के पीछे घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर कई कारण बताए जा रहे हैं।
बाजार में आज इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
सुबह 9:36 बजे सेंसेक्स 526.98 अंक यानी 0.70 फीसदी गिरकर 74,301.27 पर था। वहीं निफ्टी 178 अंक यानी 0.76 फीसदी टूटकर 23,268.80 पर आ गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा नीचे भी गया।
बाजार में कमजोरी के पीछे चार प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं- बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल, अमेरिकी फेड की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कमजोर वैश्विक संकेत।
क्या बॉन्ड यील्ड में तेजी ने बाजार पर दबाव बढ़ाया?
बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी बाजार के लिए अहम चिंता बन गई है। रिपोर्ट के मुताबिक यील्ड 19 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। आम तौर पर बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों के लिए निश्चित आय वाले साधनों का आकर्षण बढ़ सकता है और इक्विटी बाजार पर दबाव बन सकता है।
इसका असर खास तौर पर उन शेयरों पर देखा जा सकता है जिनके मूल्यांकन ब्याज दरों और भविष्य की कमाई की उम्मीदों से जुड़े होते हैं।
क्या फेड की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें भी वजह हैं?
अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव भी निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाल रहा है। ऊंची ब्याज दरों की संभावना से वैश्विक स्तर पर जोखिम वाले एसेट्स पर दबाव बढ़ सकता है।
भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों के रुख पर भी वैश्विक ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड की दिशा का असर पड़ता है।
क्या कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ी चिंता?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से आयात लागत और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
बाजार में निवेशक तेल की कीमतों की दिशा पर भी नजर रख रहे हैं।
क्या कमजोर वैश्विक संकेतों ने गिरावट को और बढ़ाया?
एशियाई और वैश्विक बाजारों से मिले संकेत भी पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.2 फीसदी नीचे, जबकि जापान का टॉपिक्स 0.1 फीसदी ऊपर था। ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 0.7 फीसदी, हांगकांग का हेंगसेंग 0.4 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 0.8 फीसदी गिरा। यूरो स्टॉक्स फ्यूचर्स भी 0.3 फीसदी नीचे था।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दिखी?
गुरुवार को शुरुआती कारोबार में सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में करीब 2 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। इसके अलावा व्यापक बाजार में भी बिकवाली तेज रही और मिडकैप तथा स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 1 फीसदी नीचे आ गए।
आगे बाजार के लिए किन संकेतों पर नजर रहेगी?
अब निवेशकों की नजर बॉन्ड यील्ड, अमेरिकी फेड से जुड़े संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक शेयर बाजारों पर रहेगी। घरेलू स्तर पर बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में बिकवाली की दिशा भी बाजार की चाल के लिए महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल शुरुआती कारोबार के संकेत बताते हैं कि बाजार में जोखिम से बचने का रुख मजबूत है।