बिजनेस अपडेट्स: सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो ने लॉन्च किया जिया चैट; हवाईअड्डे वैश्विक हब बनेंगे, अदाणी की खास रणनीति
भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो ने बिजनेस के लिए 'जिया चैट' नामक एक नया यूनिफाइड एआई इंटरफेस लॉन्च किया है। जोहो के सह-संस्थापक और चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि वर्तमान में बाजार में बहुत सारे टूल्स होने के कारण 'यूजर इंटरफेस का संकट' है। इससे निपटने के लिए जिया चैट को लाया गया है। इससे कर्मचारियों को अलग-अलग ऐप्स और टूल्स के बीच बार-बार स्विच करने की जरूरत नहीं होगी। वे एक ही चैट इंटरफेस से जानकारी खोजना, लीड जेनरेट करना, डाटा एनालिसिस और सपोर्ट से जुड़ी समस्याओं को सुलझा सकते हैं। यह यूजर्स के लिए टोकन की खपत को कम करेगा।
अदाणी समूह नियामक शुल्क घटाने और हवाई अड्डों को वैश्विक हब बनाने की रणनीति पर
अडाणी समूह नियामक शुल्क को न्यूनतम करने की रणनीति पर काम कर रहा है। कंपनी गैर-एयरोनॉटिकल शुल्क और सिटी-साइड विकास को बढ़ाकर यह लक्ष्य हासिल करेगी। अदाणी एयरपोर्ट्स होल्डिंग लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण बंसल ने यह जानकारी दी। उनका उद्देश्य नियामक राजस्व आधार को शून्य करना है। नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को एक वैश्विक केंद्र बनाने की महत्वाकांक्षा है। बंसल ने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय यातायात के लिए एक राष्ट्रीय वाहक चाहिए। इंडिगो और एयर इंडिया के 1,800 विमानों के ऑर्डर से 2032 तक भारत हब बन सकता है। मुंबई हवाई अड्डे के टी1 को जनवरी 15, 2027 से ध्वस्त किया जाएगा। यातायात को टर्मिनल 2 और नवी मुंबई हवाई अड्डे पर स्थानांतरित किया जाएगा। अदाणी समूह विमानन कारोबार में नहीं उतरेगा, हवाई अड्डे के विकास पर ध्यान देगा। अगले दशक में 100 दस लाख से 500 दस लाख यात्री क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है।
नमक, चीनी या फैट में से एक भी ज्यादा तो पैकेट पर लगेगा लाल चेतावनी लेबल
केंद्र सरकार ने पैकेटबंद खाने के पदार्थों को लेकर नियमों एवं मानकों को और सख्त कर दिया है। अगर किसी खाने के उत्पाद में नमक, चीनी या फैट में से एक भी तत्व तय सीमा से अधिक पाया जाता है, तो उसके पैकेट पर लाल रंग का चेतावनी (वार्निंग) निशान लगाना अनिवार्य होगा। इसे 100 अरब डॉलर के फूड इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर यह जानकारी दी है। पहले के प्रस्ताव में नियम था कि जब कम से कम दो पोषक तत्व तय सीमा से अधिक होंगे, तभी चेतावनी निशान लगाया जाएगा। लेकिन, स्वास्थ्य विशेषज्ञों एवं एक्टिविस्ट्स के विरोध और सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के बाद केंद्र ने दो पोषक तत्व वाली योजना को अब बदल दिया है। एफएसएसएआई ने कोर्ट को बताया, नए चेतावनी लेबल एक ही चरण में लागू होंगे। हालांकि प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट से इसके लिए और थोड़ा समय मांगते हुए कहा कि वह चार महीनों में इन लेबलिंग नियमों को अंतिम रूप देकर जारी कर देगा।