द बोनस मार्केट अपडेट: शेयर बाजार में गिरावट; सेंसेक्स 300 अंक टूटा, निफ्टी 22700 के नीचे पहुंचा
आज मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 300 अंक से अधिक गिरकर 73,305 पर और निफ्टी 22,700 के नीचे आ गया। एशियाई पेंट्स और इंफोसिस जैसे शेयरों में एक फीसदी की गिरावट आई। सऊदी अरब पर हमलों से आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ी।
विस्तार
सोमवार को आई रिकवरी के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार एक बार फिर वैश्विक मैक्रो दबाव के आगे पस्त होता नजर आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के 115 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंचने, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मौद्रिक नीति फैसले से पहले निवेशकों की सतर्कता के कारण घरेलू बाजार गैप-डाउन होकर खुले। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 377.47 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,229.20 पर कारोबार कर रहा था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 76.50 अंक या 0.34 प्रतिशत गिरकर 22,676.70 के स्तर पर आ गया। शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले दो पैसे बढ़कर 95.13 पर पहुंच गया।
शेयर बाजार में आज अचानक गिरावट की मुख्य वजहें क्या रहीं?
वैश्विक मोर्चे पर बन रहे प्रतिकूल हालात ने भारतीय बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल अंतरराष्ट्रीय बाजार में 114.91 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि क्रूड ऑयल 100.85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसके अलावा अमेरिका की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 4.97 प्रतिशत के पास बने रहना बाजार के लिए बड़ा अल्पकालिक जोखिम बना हुआ है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार के अनुसार, 114 डॉलर से ऊपर बना कच्चा तेल और ऊंची यूएस बॉन्ड यील्ड विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को 'रिस्क-ऑफ' (जोखिम से दूर रहने) के रुख में बनाए रख रही है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और वहां होने वाले मध्यवधि चुनाव से जुड़ा राजनीतिक घटनाक्रम भी निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर रहा है।
कॉरपोरेट मार्जिन पर इसका क्या असर होगा?
बाजार विश्लेषक विपिन डिक्सेना का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें कंपनियों की इनपुट और ट्रांसपोर्टेशन लागत को बढ़ा सकती हैं। इससे कॉरपोरेट मुनाफे पर सीधा दबाव पड़ेगा और भारत का कुल आयात बिल बढ़ेगा। उन्होंने आगाह किया कि मुद्रा जोखिम और वैश्विक ब्याज दरों में अनिश्चितता के चलते कंपनियों की आय वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, दूसरी तिमाही के बेहतर कॉरपोरेट नतीजे और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का मजबूत फंड फ्लो विदेशी निवेशकों की बिकवाली को संभालने का प्रयास कर रहा है। विजयकुमार के अनुसार, पश्चिम एशिया में उत्पन्न तनाव और ईरान रणनीति को लेकर कोई भी अप्रत्याशित कदम कच्चे तेल की कीमतों को और भड़का सकता है।
किन सेक्टरों और प्रमुख शेयरों पर पड़ा बिकवाली का सबसे बड़ा असर?
शुरुआती कारोबार में बाजार का प्रदर्शन मिला-जुला रहा, लेकिन कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। मेटल, आईटी, एफएमसीजी, ऑयल एंड गैस और सीमेंट सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई।
- टॉप लूजर्स (घटने वाले शेयर): एनएससी और बीएससी पर इन्फोसिस, टीसीएस, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एशियन पेंट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, आईटीसी, बजाज फिनसर्व, टाइटन, जेएसडब्ल्यू स्टील और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर प्रमुख रूप से नुकसान में रहे।
- टॉप गेनर्स (बढ़ने वाले शेयर): दूसरी तरफ, बीईएल, पावर ग्रिड, मारुति सुजुकी, एनटीपीसी, सन फार्मा, टाटा कंज्यूमर, इंडिगो, एलएंडटी, और अदानी पोर्ट्स के शेयर मजबूती के साथ हरे निशान में कारोबार करते दिखे।
तकनीकी स्तर पर निफ्टी के लिए आगे का क्या गणित है?
तकनीकी चार्ट पर विश्लेषक विपिन दीक्सेना के अनुसार, निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 22,875 से 23,000 के स्तर पर स्थित है। यदि निफ्टी इस रेजिस्टेंस लेवल को तोड़कर ऊपर टिकता है, तो रिकवरी आगे बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, नीचे की तरफ निफ्टी के लिए पहला मुख्य सपोर्ट 22,500 के पास है, जिसके बाद 22,250 का दूसरा सपोर्ट लेवल आता है। इस सपोर्ट स्तर से नीचे खिसकने पर बाजार में फिर से बिकवाली की नई लहर देखने को मिल सकती है।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के उछाल और अमेरिका से आ रहे मैक्रो संकेतों ने भारतीय बाजार की रिकवरी पर दबाव बना दिया है। हालांकि घरेलू फंड इनफ्लो और कॉरपोरेट आय से बाजार को सहारा मिल रहा है, लेकिन अल्पकालिक स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि घरेलू खरीदार विदेशी बिकवाली को कितनी मजबूती से पचा पाते हैं।