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'लोगों के बीच अपनी फजीहत न कराएं': संजय कपूर की वसीयत मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की सलाह, जानें पूरा मामला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 10 Feb 2026 01:03 PM IST
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सार
'लोगों के बीच अपनी फजीहत न कराएं': संजय कपूर की वसीयत मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की सलाह, जानें पूरा मामला
संजय कपूर का कुनबा
- फोटो : amarujala.com
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विस्तार
विरासत और वसीयत अक्सर परिवारों को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम करती है। कुछ ऐसा ही हाई-प्रोफाइल मामला दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर के एस्टेट को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहा है। हजारों करोड़ रुपये के पारिवारिक ट्रस्ट और संपत्ति पर नियंत्रण की इस जंग में हाई कोर्ट ने अब एक अहम और मानवीय हस्तक्षेप किया है। कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा है कि 'दौलत एक आशीर्वाद है, इसे अभिशाप न बनने दें' और पक्षों को सलाह दी है कि वे 'गंदे कपड़े सार्वजनिक रूप से धोने' के बजाय मध्यस्थता के जरिए मामले को सुलझाएं।
विवाद की जड़ में संजय कपूर की विरासत
इस कानूनी लड़ाई के केंद्र में संजय कपूर की विशाल संपत्ति और 'फैमिली ट्रस्ट' है। विवाद तब गहराया जब संजय कपूर की तीसरी पत्नी, प्रिया सचदेव कपूर ने दावा किया कि संजय ने 2025 में बनी एक वसीयत के जरिए अपनी पूरी व्यक्तिगत संपत्ति उनके नाम कर दी है।
हालांकि, इस दावे को संजय कपूर की पूर्व पत्नी करिश्मा कपूर (अपने दो बच्चों की ओर से) और संजय की मां, रानी कपूर ने कड़ी चुनौती दी है। करिश्मा कपूर पक्ष का आरोप है कि वसीयत फर्जी है। वहीं, रानी कपूर ने भी प्रिया के नियंत्रण और वसीयत की प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए फैमिली ट्रस्ट को अवैध घोषित करने के लिए मुकदमा दायर किया है।
28 करोड़ रुपये के डिविडेंड पर पेंच
यह मामला केवल पारिवारिक अहम का नहीं, बल्कि भारी-भरकम कॉरपोरेट हिस्सेदारी का भी है। रानी कपूर ने कोर्ट में फैमिली ट्रस्ट को रद्द करने की मांग की है, जिसका मूल्यांकन कई हजार करोड़ रुपये आंका गया है। इसके अलावा, रानी कपूर ने कोर्ट से निर्देश मांगे हैं कि लगभग ₹28 करोड़ का अंतरिम डिविडेंड प्रिया कपूर को हस्तांतरित न किया जाए। जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच ने मंगलवार को रानी कपूर की याचिका और प्रिया कपूर की ओर से अपनी सास के मुकदमे को खारिज करने के लिए दायर आवेदन, दोनों पर नोटिस जारी किए।
कोर्ट ने कहा- 'प्रोएक्टिव अप्रोच अपनाएं'
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस पुष्करणा ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह स्थिति बेहद दुखद है और अदालत में बहुत सारी निजी बातें उछालकर 'गंदे कपड़े सरेआम धोए जा रहे हैं'। कोर्ट ने कहा कि हालांकि सभी पक्षों को व्यक्तिगत क्षति हुई है, लेकिन ईश्वर ने उन्हें अथाह धन-संपदा दी है, जिसका आनंद सभी को मिलजुल कर उठाना चाहिए।
प्रिया कपूर का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल से मुखातिब होते हुए कोर्ट ने कहा, 'मिस्टर सिब्बल, यह कोर्ट आपसे उम्मीद करती है कि आप इसमें अधिक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाएंगे। चूंकि आप मामलों के शीर्ष पर हैं, आप इसे संभव बना सकते हैं'।
'मां ने बेटा खोया है, पत्नी अब अकेली है'
कोर्ट ने मामले के मानवीय पहलू को भी रेखांकित किया। जस्टिस पुष्करणा ने कहा कि रानी कपूर बुजुर्ग हैं और उन्होंने अपने जीवित रहते हुए अपने बेटे को खोया है, जो किसी भी माता-पिता के लिए असहनीय है। वहीं, कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रिया अब अकेली हैं और उन्हें अपने बच्चों की देखभाल करनी है, इसलिए उनके और बच्चों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
मध्यस्थता के लिए संभावनाएं तलाशने के निर्देश
अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी फैसला लेते समय सभी पक्षों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए। बेंच ने सभी वकीलों को निर्देश दिया है कि वे अपने मुवक्किलों से बात करें और मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने की संभावनाएं तलाशें। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को तय की गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या हजारों करोड़ रुपये के इस कॉरपोरेट-पारिवारिक विवाद में कोर्ट की 'मध्यस्थता' की नसीहत काम आती है, या यह कानूनी लड़ाई अभी और लंबी खिंचेगी।
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विवाद की जड़ में संजय कपूर की विरासत
इस कानूनी लड़ाई के केंद्र में संजय कपूर की विशाल संपत्ति और 'फैमिली ट्रस्ट' है। विवाद तब गहराया जब संजय कपूर की तीसरी पत्नी, प्रिया सचदेव कपूर ने दावा किया कि संजय ने 2025 में बनी एक वसीयत के जरिए अपनी पूरी व्यक्तिगत संपत्ति उनके नाम कर दी है।
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हालांकि, इस दावे को संजय कपूर की पूर्व पत्नी करिश्मा कपूर (अपने दो बच्चों की ओर से) और संजय की मां, रानी कपूर ने कड़ी चुनौती दी है। करिश्मा कपूर पक्ष का आरोप है कि वसीयत फर्जी है। वहीं, रानी कपूर ने भी प्रिया के नियंत्रण और वसीयत की प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए फैमिली ट्रस्ट को अवैध घोषित करने के लिए मुकदमा दायर किया है।
28 करोड़ रुपये के डिविडेंड पर पेंच
यह मामला केवल पारिवारिक अहम का नहीं, बल्कि भारी-भरकम कॉरपोरेट हिस्सेदारी का भी है। रानी कपूर ने कोर्ट में फैमिली ट्रस्ट को रद्द करने की मांग की है, जिसका मूल्यांकन कई हजार करोड़ रुपये आंका गया है। इसके अलावा, रानी कपूर ने कोर्ट से निर्देश मांगे हैं कि लगभग ₹28 करोड़ का अंतरिम डिविडेंड प्रिया कपूर को हस्तांतरित न किया जाए। जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच ने मंगलवार को रानी कपूर की याचिका और प्रिया कपूर की ओर से अपनी सास के मुकदमे को खारिज करने के लिए दायर आवेदन, दोनों पर नोटिस जारी किए।
कोर्ट ने कहा- 'प्रोएक्टिव अप्रोच अपनाएं'
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस पुष्करणा ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह स्थिति बेहद दुखद है और अदालत में बहुत सारी निजी बातें उछालकर 'गंदे कपड़े सरेआम धोए जा रहे हैं'। कोर्ट ने कहा कि हालांकि सभी पक्षों को व्यक्तिगत क्षति हुई है, लेकिन ईश्वर ने उन्हें अथाह धन-संपदा दी है, जिसका आनंद सभी को मिलजुल कर उठाना चाहिए।
प्रिया कपूर का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल से मुखातिब होते हुए कोर्ट ने कहा, 'मिस्टर सिब्बल, यह कोर्ट आपसे उम्मीद करती है कि आप इसमें अधिक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाएंगे। चूंकि आप मामलों के शीर्ष पर हैं, आप इसे संभव बना सकते हैं'।
'मां ने बेटा खोया है, पत्नी अब अकेली है'
कोर्ट ने मामले के मानवीय पहलू को भी रेखांकित किया। जस्टिस पुष्करणा ने कहा कि रानी कपूर बुजुर्ग हैं और उन्होंने अपने जीवित रहते हुए अपने बेटे को खोया है, जो किसी भी माता-पिता के लिए असहनीय है। वहीं, कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रिया अब अकेली हैं और उन्हें अपने बच्चों की देखभाल करनी है, इसलिए उनके और बच्चों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
मध्यस्थता के लिए संभावनाएं तलाशने के निर्देश
अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी फैसला लेते समय सभी पक्षों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए। बेंच ने सभी वकीलों को निर्देश दिया है कि वे अपने मुवक्किलों से बात करें और मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने की संभावनाएं तलाशें। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को तय की गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या हजारों करोड़ रुपये के इस कॉरपोरेट-पारिवारिक विवाद में कोर्ट की 'मध्यस्थता' की नसीहत काम आती है, या यह कानूनी लड़ाई अभी और लंबी खिंचेगी।
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