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टाटा ट्रस्ट्स: 40 से 50 गैर-लाभकारी अस्पताल बनाने की तैयारी, वित्त वर्ष 2026 में बांटे 1,556 करोड़ रुपये
Sun, 18 Oct 2026 12:03 PM IST
देवेश त्रिपाठी
एएनआई, मुंबई
एएनआई, मुंबई
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sun, 18 Oct 2026 12:03 PM IST
सार
टाटा ट्रस्ट्स देशभर में 40 से 50 गैर-लाभकारी सामान्य अस्पतालों का नेटवर्क बनाने की योजना पर काम कर रहा है। चेयरमैन नोएल टाटा के अनुसार, इस मॉडल में इलाज का खर्च उठा सकने वाले मरीजों से मिलने वाली राशि जरूरतमंदों की मदद में इस्तेमाल होगी।
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टाटा ट्रस्ट्स
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत के सबसे बड़े परोपकारी समूह टाटा ट्रस्ट्स ने मार्च 2026 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान 1,556.31 करोड़ रुपये वितरित किए। इसके साथ टाटा ट्रस्ट्स देशभर में 40 से 50 गैर-लाभकारी सामान्य अस्पतालों का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ और किफायती दरों पर उपलब्ध कराना है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी।
प्रस्तावित मॉडल के तहत इलाज का खर्च उठाने में सक्षम मरीजों से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल उन लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद के लिए किया जाएगा, जो इलाज का खर्च नहीं उठा सकते।
40 से 50 गैर-लाभकारी अस्पतालों का नेटवर्क बनाने की योजना
नोएल टाटा ने वार्षिक रिपोर्ट में अपने संदेश में कहा, "हम देशभर में 40 से 50 गैर-लाभकारी सामान्य अस्पतालों का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। इसके तहत इलाज का खर्च उठा सकने वाले लोगों की मदद से उन लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी, जो इसका खर्च नहीं उठा सकते।" हालांकि, रिपोर्ट में अस्पतालों के निर्माण के लिए प्रस्तावित निवेश, उनके स्थान और परियोजना की समयसीमा का खुलासा नहीं किया गया है।
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2026 से 2031 तक स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष जोर
टाटा ट्रस्ट्स ने 2026 से 2031 के लिए पांच वर्षीय स्वास्थ्य रणनीति भी तैयार की है। इसके तहत करीब 75 ब्लॉक में 25 लाख लोगों तक पहुंचने और 100 से अधिक सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाओं को मजबूत करने का लक्ष्य है। रणनीति में 10 लाख बुजुर्गों तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने, 20 हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करने और मधुमेह व उच्च रक्तचाप के बेहतर प्रबंधन पर भी जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के ग्रामीण और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित क्षेत्रों में किफायती इलाज तक पहुंचने में अब भी कई चुनौतियां हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना जरूरी है।
वित्त वर्ष 2026 में 1,556 करोड़ रुपये वितरित
टाटा ट्रस्ट्स ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 1,556.31 करोड़ रुपये वितरित किए। इसमें सबसे अधिक 457.62 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास और आजीविका से जुड़े कार्यों के लिए आवंटित किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, कुल राशि में से 1,353.32 करोड़ रुपये संस्थागत अनुदान और सीधे संचालित परियोजनाओं पर खर्च किए गए, जबकि 202.99 करोड़ रुपये व्यक्तिगत अनुदान के रूप में दिए गए।
शिक्षा के लिए 270.26 करोड़ रुपये, कैंसर देखभाल के लिए 178.46 करोड़ रुपये, संस्थानों के लिए 169.31 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 105.97 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। व्यक्तिगत अनुदान के तहत चिकित्सा सहायता के लिए 143.30 करोड़ रुपये और शिक्षा के लिए 59.38 करोड़ रुपये दिए गए।
कैंसर देखभाल कार्यक्रमों के तहत हजारों मरीजों को मदद
टाटा ट्रस्ट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में उसके कैंसर देखभाल कार्यक्रमों के तहत 1,06,626 बाह्य रोगी परामर्श दिए गए। इस दौरान कीमोथेरेपी के 24,874 चक्र पूरे किए गए और 2,879 सर्जरी की गईं। स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा, ग्रामीण आजीविका कार्यक्रमों से करीब चार लाख परिवारों को सहायता मिली। वहीं, शिक्षा संबंधी पहलों के जरिए 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 21 लाख विद्यार्थियों तक पहुंच बनाई गई।
लंबे समय तक असर डालने वाली संस्थाएं बनाने पर जोर
नोएल टाटा ने कहा कि परोपकारी कार्यों की सफलता का आकलन केवल खर्च की गई राशि या लाभार्थियों की संख्या से नहीं होना चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि किए गए प्रयासों से कितना वास्तविक बदलाव आया और वह बदलाव कितने समय तक कायम रहेगा।
उन्होंने कहा, "हमें यह पूछना चाहिए कि हमारे योगदान से क्या बदलाव आया है और क्या यह बदलाव लंबे समय तक बना रहेगा।" टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि वह टिकाऊ सामाजिक प्रभाव पैदा करने और देश की दीर्घकालिक जरूरतों को पूरा करने वाली संस्थाएं विकसित करने पर ध्यान देता रहेगा।
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प्रस्तावित मॉडल के तहत इलाज का खर्च उठाने में सक्षम मरीजों से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल उन लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद के लिए किया जाएगा, जो इलाज का खर्च नहीं उठा सकते।
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40 से 50 गैर-लाभकारी अस्पतालों का नेटवर्क बनाने की योजना
नोएल टाटा ने वार्षिक रिपोर्ट में अपने संदेश में कहा, "हम देशभर में 40 से 50 गैर-लाभकारी सामान्य अस्पतालों का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। इसके तहत इलाज का खर्च उठा सकने वाले लोगों की मदद से उन लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी, जो इसका खर्च नहीं उठा सकते।" हालांकि, रिपोर्ट में अस्पतालों के निर्माण के लिए प्रस्तावित निवेश, उनके स्थान और परियोजना की समयसीमा का खुलासा नहीं किया गया है।
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2026 से 2031 तक स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष जोर
टाटा ट्रस्ट्स ने 2026 से 2031 के लिए पांच वर्षीय स्वास्थ्य रणनीति भी तैयार की है। इसके तहत करीब 75 ब्लॉक में 25 लाख लोगों तक पहुंचने और 100 से अधिक सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाओं को मजबूत करने का लक्ष्य है। रणनीति में 10 लाख बुजुर्गों तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने, 20 हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करने और मधुमेह व उच्च रक्तचाप के बेहतर प्रबंधन पर भी जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के ग्रामीण और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित क्षेत्रों में किफायती इलाज तक पहुंचने में अब भी कई चुनौतियां हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना जरूरी है।
वित्त वर्ष 2026 में 1,556 करोड़ रुपये वितरित
टाटा ट्रस्ट्स ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 1,556.31 करोड़ रुपये वितरित किए। इसमें सबसे अधिक 457.62 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास और आजीविका से जुड़े कार्यों के लिए आवंटित किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, कुल राशि में से 1,353.32 करोड़ रुपये संस्थागत अनुदान और सीधे संचालित परियोजनाओं पर खर्च किए गए, जबकि 202.99 करोड़ रुपये व्यक्तिगत अनुदान के रूप में दिए गए।
शिक्षा के लिए 270.26 करोड़ रुपये, कैंसर देखभाल के लिए 178.46 करोड़ रुपये, संस्थानों के लिए 169.31 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 105.97 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। व्यक्तिगत अनुदान के तहत चिकित्सा सहायता के लिए 143.30 करोड़ रुपये और शिक्षा के लिए 59.38 करोड़ रुपये दिए गए।
कैंसर देखभाल कार्यक्रमों के तहत हजारों मरीजों को मदद
टाटा ट्रस्ट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में उसके कैंसर देखभाल कार्यक्रमों के तहत 1,06,626 बाह्य रोगी परामर्श दिए गए। इस दौरान कीमोथेरेपी के 24,874 चक्र पूरे किए गए और 2,879 सर्जरी की गईं। स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा, ग्रामीण आजीविका कार्यक्रमों से करीब चार लाख परिवारों को सहायता मिली। वहीं, शिक्षा संबंधी पहलों के जरिए 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 21 लाख विद्यार्थियों तक पहुंच बनाई गई।
लंबे समय तक असर डालने वाली संस्थाएं बनाने पर जोर
नोएल टाटा ने कहा कि परोपकारी कार्यों की सफलता का आकलन केवल खर्च की गई राशि या लाभार्थियों की संख्या से नहीं होना चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि किए गए प्रयासों से कितना वास्तविक बदलाव आया और वह बदलाव कितने समय तक कायम रहेगा।
उन्होंने कहा, "हमें यह पूछना चाहिए कि हमारे योगदान से क्या बदलाव आया है और क्या यह बदलाव लंबे समय तक बना रहेगा।" टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि वह टिकाऊ सामाजिक प्रभाव पैदा करने और देश की दीर्घकालिक जरूरतों को पूरा करने वाली संस्थाएं विकसित करने पर ध्यान देता रहेगा।