Tata Trusts: मेहली मिस्त्री ने बाई हीराबाई ट्रस्ट में वेणु व विजय की नियुक्ति को दी चुनौती, जानिए सबकुछ
टाटा समूह के 'बाई हीराबाई ट्रस्ट' में पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की नियुक्ति को अवैध बताकर चुनौती दी है। ट्रस्ट डीड के नियमों और रतन टाटा की विरासत से जुड़े इस विवाद की पूरी खबर जानने के लिए अभी पढ़ें।
विस्तार
टाटा समूह से जुड़े ट्रस्ट्स के प्रशासनिक ढांचे में एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। टाटा समूह के तीन प्रमुख ट्रस्टों के पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने 'बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन' में वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की बतौर ट्रस्टी नियुक्ति और उनके निरंतर प्रतिनिधित्व पर औपचारिक रूप से कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। शुक्रवार को मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष एक आवेदन देकर कहा है ये दोनों व्यक्ति ट्रस्टी बनने के योग्य नहीं हैं और इनकी नियुक्ति 1923 की ट्रस्ट डीड का साफ-साफ उल्लंघन है।
नियुक्ति पर सवाल और ट्रस्ट डीड के नियम
टीवीएस मोटर के एमेरिटस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन और पूर्व आईएएस अधिकारी विजय सिंह वर्तमान में इस ट्रस्ट में उपाध्यक्ष की भूमिका में हैं। मेहली मिस्त्री का तर्क है कि डीड के क्लॉज 6 और 18 के अनुसार, कोई भी अयोग्य ट्रस्टी 'मृत माना जाना चाहिए'। मिस्त्री का मुख्य दावा यह है कि श्रीनिवासन और सिंह पारसी जोरास्ट्रियन धर्म के अनुयायी नहीं हैं और उनका मुंबई में कोई स्थायी निवास नहीं है। ट्रस्ट डीड के अनुसार ये दोनों ही योग्यताएं ट्रस्टी बनने के लिए अनिवार्य हैं, और ऐसा न होने पर वे स्वतः ही अयोग्य माने जाएंगे।
कानूनी पक्ष और कड़ी कार्रवाई की मांग
मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए विस्तृत जांच शुरू करने की मांग की है। उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि सभी ट्रस्टियों को अपनी धर्म और निवास संबंधी पात्रता की पुष्टि करने वाले हलफनामे जमा करने का निर्देश दिया जाए। मिस्त्री का आरोप है कि इन अयोग्य व्यक्तियों की नियुक्ति धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात है, जो भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2024 और महाराष्ट्र सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम, 1950 के तहत कुप्रबंधन के दायरे में आता है। उनका कहना है कि ट्रस्टी के रूप में इनके द्वारा की गई कोई भी कार्रवाई कानूनी रूप से शून्य है।
मेहली मिस्त्री का रुख और पूर्व विवाद
मिस्त्री ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया है कि इस शिकायत का उद्देश्य ट्रस्ट में अपनी बहाली या वापसी कराना नहीं है। इस पूरे मामले के अन्य प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- पारदर्शिता और विरासत की रक्षा: मिस्त्री के अनुसार, उनका एकमात्र उद्देश्य ट्रस्ट के कथित अवैध कामकाज को उजागर करना तथा रतन टाटा व संस्थापकों के मूल्यों को पारसी समुदाय के कल्याण के लिए सुरक्षित रखना है।
- शांतिपूर्ण निकास की पृष्ठभूमि: इससे पहले, अक्टूबर 2024 में टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड ने मिस्त्री को आजीवन ट्रस्टी के रूप में फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन तीन ट्रस्टियों के विरोध के कारण यह नियुक्ति मंजूर नहीं हो सकी। विवाद को तूल देने के बजाय मिस्त्री ने दिवंगत रतन टाटा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए 4 नवंबर 2025 को ट्रस्ट से सम्मानजनक विदाई ले ली थी।
- पूर्व की आपत्तियां: फरवरी 2026 में, टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (टीईडीटी) में रहते हुए भी मिस्त्री ने ट्रस्ट्स में 'उपाध्यक्ष' के पद को समाप्त करने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि ट्रस्ट डीड में ऐसे किसी पद का कोई प्रावधान नहीं है।
बाई हीराबाई ट्रस्ट (BHJTNCI) की स्थापना 1923 में हुई थी और यह शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा के जरिए गुजरात के नवसारी में पारसी समुदाय के कल्याण का कार्य करता है। वर्तमान में इस ट्रस्ट के छह ट्रस्टी हैं, जिनमें चेयरमैन नोएल एन टाटा और शिकायत में उल्लिखित दोनों उपाध्यक्ष शामिल हैं। कॉरपोरेट और कानूनी विश्लेषकों की नजरें अब महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के फैसले पर टिकी हैं। यदि इस मामले में जांच के आदेश दिए जाते हैं, तो टाटा ट्रस्ट्स के शीर्ष स्तर पर बड़े प्रशासनिक बदलाव और कड़े अनुपालन नियम लागू होने की संभावना है।