The Bonus Market Update: शेयर बाजार में शुरुआती झटके; सेंसेक्स 500 अंक टूटा, निफ्टी 23,300 के नीचे फिसला
भारतीय शेयर बाजार में आज शुरुआती कारोबार में ही भारी गिरावट देखने को मिली। ओपनिंग के समय सेंसेक्स 500 अंक लुढ़का और निफ्टी 23,300 के नीचे फिसला। बाजार का पूरा हाल जानने के लिए क्लिक करें।
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विस्तार
गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट वैश्विक बाजारों में कमजोर रुझानों और पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता के कारण हुई। विदेशी फंड की लगातार निकासी भी बाजार पर भारी पड़ी।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 229.69 अंक गिरकर 74,139.32 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 66.30 अंक की गिरावट के साथ 23,339 पर पहुंचा। हालांकि उतार-चढ़ाव के बीच एक समय पर सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान पर भी कारोार करते दिखे। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से ट्रेंट, इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक और टाटा स्टील सबसे बड़े नुकसान में रहे। हालांकि, इटरनल, टाइटन, अदानी पोर्ट्स और टेक महिंद्रा के शेयरों में वृद्धि देखी गई। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 5,616.56 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची थी।
वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.97 फीसदी गिरकर 96.86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। बुधवार को सेंसेक्स 303.67 अंक या 0.41 फीसदी गिरकर 74,346.17 पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 77.95 अंक या 0.33 फीसदी की गिरावट के साथ 23,405.60 पर समाप्त हुआ था।
वैश्विक बाजार और विदेशी निवेश
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि निकट भविष्य में बाजार के लिए चुनौतियां अधिक हैं। पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिक्री बाजार पर दबाव डाल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में तेजी का माहौल है। यह भारत से और अधिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिक्री का संकेत देता है। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225, शंघाई का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार भी बुधवार को निचले स्तर पर बंद हुए थे।
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने बताया कि इजराइल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम समझौते के नवीनीकरण से कुछ राहत मिली है। हालांकि, व्यापक चिंताएं अभी भी अनसुलझी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार शत्रुता बनी हुई है। हाल के अमेरिकी हमलों के बाद ईरानी जवाबी कार्रवाई की रिपोर्टों ने अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। राजनयिक समाधान की दिशा में ठोस प्रगति की कमी बाजार को भू-राजनीतिक सुर्खियों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है। इसका विशेष रूप से ऊर्जा कीमतों और वैश्विक व्यापार प्रवाह पर प्रभाव पड़ता है।
बाजार पर दबाव के प्रमुख कारण
बाजार पर दबाव के मुख्य कारणों में वैश्विक स्तर पर कमजोर रुझान शामिल हैं। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव भी एक महत्वपूर्ण कारक है। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार इक्विटी बेचना भी बाजार को नीचे खींच रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी वैश्विक आर्थिक चिंताओं को दर्शाती है। इन सभी कारकों के कारण भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार में गिरावट देखी गई। निवेशकों को निकट भविष्य में बाजार में अस्थिरता बने रहने की आशंका है।