The Bonus Market Update: शेयर बाजार लगातार चौथे दिन फिसला; सेंसेक्स 508 अंक गिरा, निफ्टी 23400 से नीचे पहुंचा
घरेलू शेयर बाजार में प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सोमवार को शुरुआती कारोबार में हासिल बढ़त को बरकरार नहीं रख पाए और आखिरकार लगातार चौथे दिन लाल निशान पर बंद हुए। बाजार का विस्तृत हाल जानने के लिए पढ़ें खबर।
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विस्तार
घरेलू शेयर बाजार में हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बड़ा उतार-चढ़ाव दिखा। सोमवार को हरे निशान पर कारोबार की शुरुआत होने के बावजूद बेंचमार्क सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 508.40 अंक या 0.67% तक टूटकर 74,267.34 के स्तर पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में सेंसेक्स में 1,164.25 अंकों का भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। दूसरी ओर, निफ्टी 165.16 (-0.70%) अंक फिसलकर 23,382.60 पर पहुंच गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 12 पैसे गिरकर 94.97 (अस्थायी) पर बंद हुआ।
सोमवार के कारोबारी सत्र के दौरान एचयूएल और श्रीराम फाइनेंस जैसे शेयरों में लगभग तीन प्रतिशत की गिरावट दिखी। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन एनएसई पर सूचीबद्ध शेयरों में 2,201 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, वहीं 1151 शेयरों में बढ़ दर्ज की गई। 99 शेयरों में कोई बदलाव नहीं दिखा।
चार दिन में बड़ा नुकसान
घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को आई कमजोरी का प्रमुख कारण अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष से जुड़ा रोज नया अपडेट आना है। इन अपडेट्स का असर कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों पर पड़ता है और इससे निवेशकों का रुझान प्रभावित होता है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से जारी लगातार बिकवाली और बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी ने भी बाजार का माहौल खराब किया।
अगर पिछले चार दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो निवेशकों की भारी पूंजी डूब चुकी है। इन चार दिनों में सेंसेक्स कुल 2,221.62 अंकों (2.90%) और निफ्टी 649.1 अंकों (2.70%) की भारी गिरावट दर्ज कर चुका है।
गिरावट के मुख्य कारण
बाजार में आई इस सुनामी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच ताजा सैन्य संघर्ष है।
- भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका ने सप्ताहांत में ईरान द्वारा एक अमेरिकी ड्रोन गिराए जाने के बाद पलटवार करते हुए ईरान के रडार और ड्रोन ठिकानों पर बमबारी की है। इसके जवाब में ईरान ने भी हमले किए हैं और कुवैत में भी गोलीबारी की खबरें हैं। इसके साथ ही इस्राइल और लेबनान के बीच भी सीमा पर तनाव बढ़ गया है।
- महंगा कच्चा तेल: इस युद्ध के चौथे महीने में प्रवेश करने और कच्चे तेल के अहम मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' के बंद रहने की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) 3.34 प्रतिशत की जोरदार उछाल के साथ 94.16 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा क्रूड एक बड़ा आर्थिक खतरा है।
पावर, रियल्टी और एफएमसीजी में भारी बिकवाली
इस घबराहट के माहौल में निवेशकों ने चौतरफा मुनाफावसूली की है। व्यापक बाजार में भी मायूसी छाई रही; बीएसई मिडकैप सेलेक्ट इंडेक्स में 1.44 प्रतिशत और स्मॉलकैप सेलेक्ट इंडेक्स में 0.72 प्रतिशत की गिरावट आई। बीएसई पर 2,761 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि सिर्फ 1,589 शेयर ही बढ़त बना सके।
- गिरने वाले शेयर: सेक्टोरल आधार पर देखें तो पावर सेक्टर में सबसे ज्यादा 2.90% की गिरावट रही। इसके अलावा कैपिटल गुड्स, यूटिलिटीज, इंडस्ट्रियल्स, रियल्टी और एफएमसीजी सेक्टर भी 2% से अधिक टूट गए। हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी, एनटीपीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, कोटक बैंक और बजाज फाइनेंस सेंसेक्स के टॉप लूजर्स रहे।
- चढ़ने वाले शेयर: इस भारी गिरावट के बीच आईटी, एनर्जी और मेटल शेयरों ने बाजार को थोड़ा सहारा दिया। टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टीसीएस, इंडिगो और टाटा स्टील बढ़त के साथ हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहे।
विदेशी बिकवाली और एक्सपर्ट आउटलुक
भारतीय बाजार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का भारी दबाव बना हुआ है। एक्सचेंज के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को एफआईआई ने बाजार से 21,105.86 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयरों की भारी बिकवाली की थी, जब सेंसेक्स 1,092 अंक टूट गया था।
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, बाजार को शुरुआत में एक कूटनीतिक समाधान की उम्मीद थी, लेकिन अब ये उम्मीदें धूमिल होती दिख रही हैं, जिससे बाज़ार में सतर्कता और जोखिम से बचने का मूड हावी हो गया है। वहीं, जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर का मानना है कि युद्ध लंबा खिंचने और चौथे महीने में प्रवेश कर जाने के कारण बाजार के कुछ भागीदार अब यह उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले समय में जल्द ही कोई कूटनीतिक प्रगति या समझौता देखने को मिल सकता है।
कुल मिलाकर, जब तक पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक हालात स्थिर नहीं होते और कच्चे तेल की कीमतों की तेजी पर ब्रेक नहीं लगता, तब तक भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता बने रहने की पूरी आशंका है। फिलहाल, वैश्विक बाजारों की नज़रे अमेरिका और ईरान के कूटनीतिक कदमों पर टिकी हैं और निवेशकों के लिए सतर्कता बरतना ही सबसे सही रणनीति होगी।