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बदल गया है आयकर रिटर्न फॉर्म: जल्दबाजी में सबमिट किया तो आ सकता है नोटिस, जानें दाखिल करने से पहले की चेकलिस्ट

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला। Published by: राकेश कुमार Updated Mon, 01 Jun 2026 05:02 AM IST
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सार

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आईटीआर फॉर्म्स में बड़े बदलाव किए गए हैं, जिसमें ITR-1 और ITR-4 का दायरा बढ़ाने के साथ ही बैंक बैलेंस की जानकारी और न मिले किराए का कॉलम अनिवार्य किया गया है। अब आधार नामांकन आईडी की जगह केवल वास्तविक आधार नंबर ही मान्य होगा और पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत डिडक्शन क्लेम करने के नियम कड़े कर दिए गए हैं। 
 

income tax return filing changes financial year 2025 26 itr forms checklist
बदल गया है आयकर रिटर्न फॉर्म - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न भरने की शुरुआत हो चुकी है। लेकिन ठहरिए! नए आयकर कानून के पूर्ण क्रियान्वयन के साथ इस बार फॉर्म्स के भीतर ऐसे गहरे बदलाव किए गए हैं, जिन्हें समझे बिना अगर आपने जल्दबाजी में सबमिट का बटन दबाया, तो आयकर नोटिस आना लगभग तय है। आयकर रिटर्न फॉर्म में हुए बदलावों का उद्देश्य टैक्स रिपोर्टिंग को डाटा-संचालित, मानकीकृत और मिलान करने में आसान बनाना है। लीजिए, साल का वह वक्त फिर आ गया है, जब आपको अपनी जेब, बैंक स्टेटमेंट्स और कमाई का पूरा हिसाब-किताब एक जगह समेट कर बैठना होगा।


वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न भरने का बिगुल बज चुका है! लेकिन रुकिए! इस बार की टैक्स फाइलिंग कोई रूटीन कागजी कार्रवाई नहीं है। नए आयकर कानून के पूरी तरह जमीन पर उतरने के साथ ही इस बार रिटर्न फॉर्म्स के भीतर कई बड़े बदलाव और नए चक्रव्यूह तैयार किए गए हैं। अगर आप भी अपनी गाढ़ी कमाई पर टैक्स बचाना चाहते हैं, पेनाल्टी व नोटिस के झंझटों से दूर रहना चाहते हैं, तो फॉर्म पर सीधे हाथ लगाने से पहले इस बार बदले हुए नियमों को अच्छी तरह से समझना जरूरी है।
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ITR-1 का दायरा बढ़ा
पहले यदि आपके पास एक से अधिक मकान से किराये की आय होती थी, तो आप सीधे बड़े फॉर्म्स के चक्कर में फंस जाते थे। अब सरकार ने ITR-1 और ITR-4 दोनों का दायरा बढ़ा दिया है। अब दो मकानों से आय रखने वाले करदाता भी इन सरल फॉर्म्स के जरिये अपना टैक्स भर सकते हैं।
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जो किराया नहीं मिला उसका नया कॉलम
यह वह किराया है जो मकान मालिक को मिलना था, पर किरायेदार ने दिया नहीं। ITR-1 और ITR-4 दोनों में एक नया स्पेशल कॉलम जोड़ा गया है, ताकि आपको न मिले हुए पैसे पर टैक्स न देना पड़े।

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ITR-4 में बैंक बैलेंस बताना जरूरी
छोटे व्यापारियों, फ्रीलांसर्स और कंसल्टेंट्स के लिए भरा जाने वाला आईटीआर-4 (सुगम) इस बार काफी सख्त और विस्तृत हो गया है। वित्तीय विवरणों के कॉलम में अब तक बैंक खाते का बैलेंस बताना वैकल्पिक था। इस बार इसे अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही संपत्तियों वाले हिस्से में आपके निवेश को पूछने के लिए भी नया फील्ड जोड़ा गया है। अब तक जो लोग आधार कार्ड न होने पर आधार नामांकन आईडी का इस्तेमाल कर लेते थे, उनके लिए रास्ते बंद हो चुके हैं। अब सिर्फ वास्तविक आधार नंबर ही स्वीकार किया जाएगा।
इस फॉर्म में अब आप धारा 112A के तहत 1.25 लाख रुपये तक के शेयर या म्यूचुअल फंड के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स को घोषित कर सकते हैं, बशर्ते आपका कोई पुराना कैपिटल लॉस आगे कैरी-फॉरवर्ड न हो रहा हो।

पुरानी टैक्स व्यवस्था को हतोत्साहित करने का नया जाल
अगर आप अब भी पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत डिडक्शन का क्लेम करके टैक्स बचाना चाहते हैं, तो विभाग ने आपके लिए नियम और कड़े कर दिए हैं। अब ई-फाइलिंग पोर्टल पर धारा 80C से 80U तक की कटौतियों को आप सीधे हाथ से टाइप नहीं कर पाएंगे। इसके लिए बाकायदा एक ड्रॉप-डाउन मेन्यू दिया गया है, जहां से आपको सटीक क्लॉज और उप-धारा को चुनना होगा। धारा 89A के तहत विदेशी रिटायरमेंट खातों पर मिलने वाली दोहरे कराधान की राहत को अब ITR-1 और ITR-4 से पूरी तरह हटा दिया गया है। इस राहत का दावा अब ITR-2 और ITR-3 के जरिये ही संभव होगा।

किसके लिए कौन सा फॉर्म?
आयकर विभाग का सिस्टम पूरी तरह डाटा संचालित है, यानी आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपको स्क्रूटनी के जाल में फंसा सकती है।
 
ITR फॉर्म किसके लिए उपयुक्त?
ITR-1 (सहज) 50 लाख रुपये तक आय वाले निवासी व्यक्ति, जिनकी आय सैलरी, दो मकानों, अन्य स्रोतों, 5,000 रुपये तक कृषि आय या 1.25 लाख रुपये तक LTCG (धारा 112A) से हो
ITR-2 ऐसे व्यक्ति और HUF जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से आय नहीं है
ITR-3 बिजनेस या प्रोफेशन से आय वाले व्यक्ति और HUF
ITR-4 (सुगम) अनुमानित आय (Presumptive Taxation) योजना चुनने वाले छोटे व्यवसायी, पेशेवर और पार्टनरशिप फर्म
ITR-5 LLP, पार्टनरशिप फर्म, AOP, BOI, ट्रस्ट और सहकारी समितियां
ITR-6 सभी प्रकार की कंपनियां
ITR-7 चैरिटेबल/धार्मिक ट्रस्ट, सेक्शन-8 कंपनियां, राजनीतिक दल और शैक्षणिक संस्थान

15 जून से पहले फाइल न करें ITR
अगर आप वेतनभोगी हैं, तो शुरुआती यूटिलिटी देखकर तुरंत रिटर्न भरने की गलती न करें। 15 जून तक इंतजार करें। नियोक्ता द्वारा काटा गया TDS और आपके वित्तीय लेन-देन के सारे आंकड़े फॉर्म 26AS और AIS में पूरी तरह अपडेट होने में 15 जून तक का समय लगता है। अगर आपने AIS और 26AS के पूरी तरह मैच होने से पहले रिटर्न दाखिल कर दिया, तो कोई न कोई आय छूट जाएगी। बाद में संशोधित रिटर्न भरने की लंबी कसरत करनी पड़ेगी। इसलिए सही डाटा के साथ रिटर्न भरें।  -गौरी चड्ढा, टैक्स एक्सपर्ट

ITR दाखिल करने से पहले की चेकलिस्ट
  • AIS, फॉर्म 26AS, फॉर्म 16 और बैंक स्टेटमेंट को आपस में मिलान करें
  • सभी टीडीएस क्रेडिट को ध्यान से सत्यापित करें
  • ब्रोकर की रिपोर्ट के साथ पूंजीगत लाभ का मिलान करें
  • पिछले वर्षों के कैरी-फॉरवर्ड लॉसेज की जांच करें
  • चैप्टर VI-A के तहत दावा की गई कटौतियों की समीक्षा करें
  • कर-मुक्त आय के खुलासों को सत्यापित करें
  • जहां लागू हो, वहां विदेशी संपत्ति के खुलासे पूरे होना सुनिश्चित करें
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