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लड़ रही है दुनिया: अमेरिका-ईरान तनाव से बाजार डगमगाया, क्या करें म्यूचुअल फंड के निवेशक?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Mon, 06 Apr 2026 04:42 AM IST
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सार

अमेरिका-ईरान युद्ध के जल्द खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे। युद्ध जितना लंबा खिंचेगा, अनिश्चितता उतनी बढ़ेगी। बाजारों के लिए अनिश्चितता का मतलब अस्थिरता है। यह अस्थिरता पहले ही दिखने लगी है और आगे कोई नहीं जानता कि यह किस दिशा में जाएगी। हर निवेशक के मन में एक ही सवाल है ‘क्या मुझे अपना पैसा निकाल लेना चाहिए?’ आइए जानते हैं, निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए।

The World at War Markets Wobble Amid US-Iran Tensions What Should Mutual Fund Investors Do
mutual funds - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

रूस-यूक्रेन के बाद अब अमेरिका-ईरान युद्ध की खबरों ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। भारतीय शेयर बाजार भी इससे अछूते नहीं हैं। हमने 15% तक की बड़ी गिरावट देखी है। ऐसी स्थिति में म्यूचुअल फंड निवेशकों के मन में डर होना स्वाभाविक है। लेकिन याद रखिए, निवेश की सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि बाजार कैसा है, बल्कि इस पर निर्भर करती है कि आप ऐसे समय में कैसा व्यवहार करते हैं। जब पोर्टफोलियो लाल निशान में होता है, तो अच्छे-अच्छे दिग्गजों का धैर्य जवाब देने लगता है। लेकिन याद रखिए, निवेश की दुनिया में 'पैनिक' सबसे महंगा सौदा साबित होता है।

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धैर्य है असली 'वेल्थ क्रिएटर'
इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश का सबसे बड़ा नियम है: शांत रहना। अक्सर निवेशक घबराकर अपनी SIP रोक देते हैं या पैसा निकाल लेते हैं, यह सोचकर कि बाजार स्थिर होने पर वे फिर से निवेश करेंगे। लेकिन हकीकत में वह सही समय कभी नहीं आता। बाजार का स्वभाव ही उतार-चढ़ाव है। जिन्होंने लंबी अवधि तक धैर्य रखा है, इतिहास गवाह है कि उन्हीं को सबसे शानदार रिटर्न मिले हैं।
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गिरावट को 'सेल' के रूप में देखें

  • बाजार की गिरावट का मतलब है- कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स।
  • नए निवेशकों के लिए: यह प्रवेश करने का सबसे अच्छा समय है, क्योंकि आप निचले स्तर पर खरीदारी कर रहे हैं।
  • पुराने निवेशकों के लिए: अपनी निवेश लागत को 'औसत' करने का मौका है। बाजार की विभिन्न श्रेणियां (लार्ज, मिड, स्मॉल कैप) अभी 8-9% तक नीचे हैं। जब बाजार गिरता है, तो आपकी उसी SIP रकम में आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, जो बाजार सुधरने पर आपके मुनाफे को कई गुना बढ़ा देती हैं।


रिटर्न नहीं, रिस्क देखें

  • गिरावट के समय अक्सर निवेशक उस फंड की ओर भागते हैं, जो सबसे ज्यादा गिरा है। लेकिन आपका चुनाव आपके जोखिम लेने की क्षमता पर होना चाहिए-
  • लार्ज कैप फंड: स्थिरता और निरंतरता के लिए सबसे अच्छे हैं। लंबी अवधि के लिए पोर्टफोलियो का आधार।
  • मिड व स्मॉल कैप: इनमें तभी बने रहें या नया निवेश करें जब आपका नजरिया कम से कम 10-15 साल का हो।
  • हाइब्रिड या फ्लेक्सी कैप: यदि आप खुद चुनाव नहीं कर पा रहे हैं, तो ये फंड्स अच्छे विकल्प हैं, जो फंड मैनेजर को बाजार के अनुसार बदलाव की सुविधा देते हैं।

इन गलतियों से बचें

  • रिटर्न का पीछा न करें: केवल इसलिए स्मॉल कैप में निवेश न करें, क्योंकि पिछले साल उसने अच्छा रिटर्न दिया था। अत्यधिक अस्थिरता से दूर रहें।
  • एकमुश्त निवेश से बचें: जब तक अनिश्चितता बनी हुई है, एकमुश्त पैसा डालने के बजाय किश्तों में निवेश की रणनीति को अपनाएं।

विभिन्न म्यूचुअल फंड श्रेणियों में पिछले एक साल की गिरावट (मार्च 2026)

म्यूचुअल फंड श्रेणी फंड का नाम पिछले 1 साल की गिरावट (%)
लार्ज कैप फंड ITI Large Cap Fund -7.02
लार्ज कैप फंड LIC MF Large Cap -5.57
लार्ज कैप फंड Axis Large Cap Fund -5.02
लार्ज कैप फंड UTI Large Cap Fund -4.99
लार्ज कैप फंड PGIM Ind. Large Cap -4.95

 

म्यूचुअल फंड श्रेणी फंड का नाम पिछले 1 साल की गिरावट (%)
मिड कैप फंड Motilal Oswal Midcap Fund -10.50
मिड कैप फंड Quant Midcap Fund -8.16
मिड कैप फंड SBI Midcap Fund -4.70
मिड कैप फंड LIC MF Midcap Fund -4.57
मिड कैप फंड Taurus Mid Cap Fund -3.81
स्मॉल कैप फंड Tata Small Cap -17.41
स्मॉल कैप फंड JM Small Cap -9.49
स्मॉल कैप फंड LIC MF Small Cap -8.68
स्मॉल कैप फंड HSBC Small Cap -8.42
स्मॉल कैप फंड Kotak Small Cap -7.65


स्रोत: AMFI (आंकड़े मार्च 24, 2026 तक के हैं)

तो अब क्या करें?

  • SIP जारी रखें: बाजार नीचे है, आपको ज्यादा यूनिट्स मिलेंगी।
  • पोर्टफोलियो चेक करें: देखें कि गिरावट के बाद आपका एसेट एलोकेशन कितना बिगड़ा है।
  • धैर्य रखें: पांच साल बाद आप इस गिरावट को एक 'सुनहरे अवसर' के रूप में याद करेंगे।

लंबी अवधि के निवेशक योजना पर टिके रहें
बाजार की मौजूदा स्थिति एसेट एलोकेशन के महत्व को दोहराती है। आपके पोर्टफोलियो में इक्विटी के साथ-साथ डेट और गोल्ड का होना भी जरूरी है। एक म्यूचुअल फंड निवेशक के रूप में सबसे अच्छी सलाह यही है, अपनी योजना पर टिके रहें और शोर से दूर रहें। याद रखिए, इक्विटी का स्वभाव ही अस्थिरता है। जो इस लहर को झेल जाएगा, वही लंबी रेस का घोड़ा बनेगा। - जितेंद्र सोलंकी, पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट

सोना है बीमा, सट्टा नहीं

  • आज सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। जब दुनिया में डर होता है, तो लोग सोने की तरफ भागते हैं। लेकिन क्या यह भारी मात्रा में खरीदने का समय है?
  • सोना आपके पोर्टफोलियो का 'बीमा' है। जैसे बीमा एक्सीडेंट होने से पहले लिया जाता है, वैसे ही सोना भी शांति के समय खरीदना चाहिए था।
  • आज जब कीमतें आसमान पर हैं, तो नया निवेश करना 'महंगे में खरीदने' जैसा जोखिम भरा हो सकता है।
  • अपने पोर्टफोलियो का केवल 5-10% ही सोने में रखें, उससे ज्यादा नहीं।
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