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मेटा के खिलाफ मुकदमे पर US की अदालत में सुनवाई: सोशल मीडिया की लत मामले में जुकरबर्ग ने दी गवाही, जानिए मामला

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Thu, 19 Feb 2026 09:01 AM IST
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सार

लॉस एंजेलिस में चल रहे एक अहम मुकदमे में मार्क जुकरबर्ग ने अदालत में गवाही दी, जिसमें मेटा और यूट्यूब पर बच्चों और किशोरों को सोशल मीडिया का आदी बनाने वाले फीचर बनाने का आरोप है। मेटा ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि कंपनी ने युवाओं की सुरक्षा के लिए कई सुधार किए हैं।

US court hears lawsuit against Meta: Zuckerberg testifies in social media addiction case
मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग - फोटो : PTI
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विस्तार

बच्चों और किशोरों को सोशल मीडिया का आदी बनाने के आरोपों से जुड़े एक अहम मुकदमे में मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने बुधवार को अदालत में गवाही दी। लॉस एंजेलिस काउंटी सुपीरियर कोर्ट में चल रहे इस मामले में मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी) और गूगल के स्वामित्व वाले यूट्यूब पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर ऐसे फीचर बनाए जो कम उम्र के यूजर्स को लंबे समय तक ऐप पर बनाए रखते हैं।

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क्या है मामला?

यह मुकदमा 20 वर्षीय युवती कैली और उसकी मां की ओर से दायर किया गया है। उनका दावा है कि कैली ने 6 साल की उम्र से ही सोशल मीडिया एप्स का इस्तेमाल शुरू कर दिया था और ऑटो-स्क्रॉल जैसे फीचर्स के कारण वह इन प्लेटफॉर्म्स की आदी हो गई, जिससे उसे चिंता, डिप्रेशन और बॉडी इमेज से जुड़ी समस्याएं हुईं।

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क्या यूजर्स का फायदा उठा रही कंपनियां?

अदालत में बहस के दौरान वकील मार्क लेनियर ने जुकरबर्ग से पूछा कि क्या कंपनियों को कमजोर यूजर्स का फायदा उठाना चाहिए। इस पर जुकरबर्ग ने कहा कि एक जिम्मेदार कंपनी को अपने यूजर्स की मदद करनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इंस्टाग्राम पर उम्र संबंधी पाबंदियों को लागू करना चुनौतीपूर्ण है, जबकि कंपनी की नीति के अनुसार 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चे अकाउंट नहीं बना सकते।

इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी के ईमेल से क्या बात आई सामने?

वकीलों ने 2022 के कथित आंतरिक दस्तावेज भी पेश किए, जिनमें इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी ने लिखा था कि एप का मुख्य लक्ष्य यूजर्स, खासकर किशोरों की एंगेजमेंट बढ़ाना है। इसके अलावा 2016 के एक ईमेल का भी जिक्र हुआ, जिसमें एप पर बिताए जाने वाले समय को बढ़ाने का लक्ष्य बताया गया था। जुकरबर्ग ने माना कि पहले ऐसे लक्ष्य तय किए गए थे, लेकिन बाद में उनमें बदलाव किया गया।

कंपनी लगातार सुधार करने की कोशिश कर रही- जुकरबर्ग का तर्क

करीब आठ घंटे की गवाही के दौरान जुकरबर्ग ने कहा कि कोई भी प्रोडक्ट परफेक्ट नहीं होता और कंपनी लगातार सुधार करने की कोशिश करती है। उन्होंने यह भी दोहराया कि मेटा युवा यूजर्स की सुरक्षा के लिए पैरेंटल कंट्रोल और टीन अकाउंट जैसे सुरक्षा उपाय लागू कर चुका है।

1500 से अधिक मुकदमे पहले से हो चुके हैं दायर

यह मामला देशभर में दायर 1500 से अधिक समान मुकदमों में पहला है जो जूरी ट्रायल तक पहुंचा है और इससे यह तय हो सकता है कि टेक कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म के डिजाइन और उसके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव के लिए किस हद तक जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। दूसरी ओर, कंपनियां इन आरोपों से इनकार करते हुए कह रही हैं कि मानसिक स्वास्थ्य पर असर कई कारकों से तय होता है, केवल सोशल मीडिया से नहीं।


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