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US Iran Conflict: ईरान पर अमेरिका का बड़ा आर्थिक प्रहार, तेल निर्यात नेटवर्क से जुड़े 50 से अधिक ठिकाने बैन

Wed, 15 Jul 2026 10:30 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 15 Jul 2026 10:30 AM IST
सार

ईरान के अवैध तेल निर्यात पर अमेरिका ने कड़ा प्रहार करते हुए 50 से अधिक ठिकानों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। पूरी रिपोर्ट पढ़ें और जानें कि वैश्विक तेल बाजार और जलमार्ग सुरक्षा पर इसका क्या असर होगा।

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US Strikes Hard on Iran's Oil Network, Sanctions over 50 targets over oil exports
अमेरिका ईरान के बीच बढ़ती तकरार - फोटो : amarujala.com

विस्तार

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने आर्थिक हमलों को और तेज कर दिया है। अमेरिकी वित्त विभाग के 'ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल' (ओएफएसी) ने ईरान के अवैध तेल परिवहन और प्रतिबंधों को दरकिनार करने वाले एक बड़े नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया है। इस कार्रवाई के तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र के दिग्गज मोहम्मद हुसैन शमखानी के नियंत्रण वाले समुद्री व्यापार नेटवर्क से जुड़े 50 से अधिक लोगों, कंपनियों और जहाजों को प्रतिबंधित सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाल दिया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हाल ही में हुए हमलों और बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका का यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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प्रतिबंधों के दायरे में कौन-कौन आया है?

अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा घोषित इन दंडात्मक उपायों में मुख्य रूप से मोहम्मद हुसैन शमखानी के व्यापक समुद्री व्यापार तंत्र को निशाना बनाया गया है। इस कार्रवाई के अंतर्गत कुल:

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  • छह लोगों को ब्लैकलिस्ट किया गया है, जिनमें असगर अघिली देहकोर्डी और बेहजाद मोघदास जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
  • 24 कॉरपोरेट कंपनियों और 20 समुद्री जहाजों पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ये सभी आरोपी वित्तीय ब्रोकरों, लॉजिस्टिक्स ऑपरेशंस, समुद्री प्रबंधकों और विदेशों में स्थित शेल कंपनियों के एक बेहद जटिल नेटवर्क के जरिए व्यापारिक प्रतिबंधों को बाईपास कर रहे थे। इस कार्रवाई के बाद, इन प्रतिबंधित पक्षों की अमेरिकी कानूनी अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी संपत्तियों या कानूनी हितों को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक कर दिया गया है।

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अमेरिका ने यह सख्त कदम क्यों उठाया है?

अमेरिकी प्रशासन का साफ तौर पर मानना है कि ईरान का यह अवैध तेल नेटवर्क उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार, "ईरानी शासन धोखे और फरेब पर जीवित है, और शमखानी का यह नेटवर्क उसके सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाले इंजनों में से एक है।" बेसेंट ने जोर देकर कहा कि इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य उस वित्तीय जीवन रेखा को काटना है जो अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों को हवा देती है। 


यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हमले बढ़े हैं, जिसका आरोप वाशिंगटन ने सीधे तौर पर तेहरान पर लगाया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि यह कार्रवाई शमखानी के अवैध शिपिंग और प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए तैयार की गई है, जिसके पैसे से व्यापारिक जहाजों पर हमलों की फंडिंग की जाती थी।

इस कार्रवाई का आर्थिक और वैश्विक असर क्या होगा?

इस कड़े कदम के वैश्विक स्तर पर दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं:

  • वित्तीय तंत्र पर चोट: शेल कंपनियों और प्रॉक्सी सेटअप का भंडाफोड़ होने से ईरान के लिए अपने तेल को विदेशी बाजारों में बेचना और उसका पैसा वापस तेहरान लाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
  • ऊर्जा बाजार में हलचल: ईरान के तेल शिपिंग नेटवर्क पर सीधी चोट से वैश्विक तेल आपूर्ति और इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
  • सुरक्षा और तनाव: होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना और ईरान के बीच तनाव और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण गलियारा प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी।

अब आगे क्या हो सकता है?

वाशिंगटन की इस चौतरफा कार्रवाई से यह साफ है कि वह ईरान पर अधिकतम आर्थिक दबाव बनाने की नीति पर कायम रहेगा। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, प्रतिबंधित नेटवर्क में ईरानी नागरिकों के साथ-साथ विदेशी नागरिक और विदेशी कंपनियां भी शामिल थीं, जो इस अवैध व्यापार को बढ़ावा दे रही थीं। अब देखना यह होगा कि इस कड़े आर्थिक प्रहार के बाद ईरान की क्या प्रतिक्रिया होती है और क्या इससे होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाती है या फिर तनाव और अधिक भड़कता है।

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