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भारत में बढ़ सकती है महंगाई: रिपोर्ट में डरावनी चेतावनी, पश्चिम एशिया संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Sat, 28 Mar 2026 12:28 PM IST
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सार

अमेरिका-ईरान तनाव से तेल महंगा हो रहा है और लंबे समय तक महंगा रह सकता है। इससे भारत में महंगाई बढ़कर छह से सात फीसदी से ऊपर जा सकती है और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। आइए विस्तार से जानते हैं। 

West Asia tensions pose a major threat to the global economy, with fears of rising inflation in India
इस्राइली और अमेरिकी हमलों के बाद पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/पीटीआई
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विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक बाजार एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव को नजरअंदाज कर रहे हैं। सिस्टमैटिक्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा हालात केवल तात्कालिक उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि वैश्विक परिदृश्य में एक बड़े बदलाव का संकेत हैं, जो आगे चलकर बार-बार उभर सकते हैं और लंबी अवधि तक अनिश्चितता बनाए रख सकते हैं।

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वैश्विक बाजार उम्मीद और डर के बीच झूल रहा है

रिपोर्ट के अनुसार, बाजार फिलहाल हर युद्ध से जुड़ी खबर पर उम्मीद और डर के बीच झूल रहे हैं, लेकिन इसके पीछे एक गहरा बदलाव चल रहा है। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में बदलती नीतियां और ईरान की प्रतिक्रिया मिलकर ऐसी स्थिति बना रही हैं, जहां निवेशकों के लिए लंबी अवधि के जोखिमों का आकलन करना मुश्किल हो गया है।

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रिपोर्ट ने इसे वैश्विक भू-राजनीतिक ढांचे में एक बड़े मेटामॉर्फोसिस के रूप में बताया है, जिसमें अमेरिका और चीन के नेतृत्व वाले ग्लोबल साउथ के बीच शक्ति संतुलन बदल रहा है। इससे आने वाले समय में इस तरह के तनाव और टकराव बार-बार देखने को मिल सकते हैं।

संकट का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर दिख रहा

आर्थिक मोर्चे पर रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि इस संकट का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास या उससे ऊपर पहुंच चुकी है, जो न सिर्फ सप्लाई से जुड़े जोखिम बल्कि बढ़ते जियोपॉलिटिकल प्रीमियम को भी दर्शाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर तनाव कम भी होता है, तब भी कच्चे तेल और गैस की सप्लाई में बाधाएं बनी रह सकती हैं, जिससे कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।

भारी कर्ज बढ़ा रही चिंता

इसके साथ ही वैश्विक कर्ज भी चिंता का बड़ा कारण बनता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के दौरान वैश्विक कर्ज करीब 29 ट्रिलियन डॉलर बढ़कर 348 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे सरकारों की आर्थिक प्रोत्साहन देने की क्षमता सीमित हो सकती है।

भारत को लेकर क्या आशंका?

भारत को लेकर रिपोर्ट में विशेष रूप से चेतावनी दी गई है कि ऊंचे कच्चे तेल के दाम और कमजोर मांग मिलकर स्टैगफ्लेशन की स्थिति पैदा कर सकते हैं। इससे हाल के आर्थिक सुधारों पर असर पड़ सकता है और घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में भारत की खुदरा महंगाई दर 6 से 7 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है।

अंत में रिपोर्ट ने कहा है कि मौजूदा हालात अस्थायी नहीं हैं। ऊंचे तेल के दाम, सख्त वित्तीय परिस्थितियां और बार-बार होने वाले भू-राजनीतिक झटके अब वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थायी विशेषताएं बन सकते हैं, जिससे लंबी अवधि तक समायोजन का दौर जारी रह सकता है।

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