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Economy: भारत की आर्थिक वृद्धि दर को लेकर क्या अनुमान? पश्चिम एशिया तनाव कितना असर, जानें रिपोर्ट का अनुमान

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Wed, 25 Mar 2026 01:01 PM IST
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सार

एसएंडपी ने भारत की जीडीपी वृद्धि 2026-27 में 7.1% और 2025-26 में 7.6% रहने का अनुमान जताया है, जिसमें खपत, निवेश और निर्यात प्रमुख भूमिका निभाएंगे। हालांकि पश्चिम एशिया तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ने की आशंका जताई गई है।

What are the projections for India's economic growth rate? What impact will tensions in West Asia have?
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार

वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर ताजा अनुमान जारी किया है। एजेंसी ने अगले वित्त वर्ष (2026-27) के लिए जीडीपी ग्रोथ 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक निजी खपत, निवेश में सुधार और मजबूत निर्यात इस वृद्धि के प्रमुख आधार होंगे।

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हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से सरकार की सब्सिडी लागत बढ़ेगी, जिससे राजकोषीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।

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वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी अपने अनुमान को बढ़ाया

एसएंडपी ने 2025-26 के लिए भी अपने अनुमान को 0.4 प्रतिशत बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, 2026-27 के लिए अनुमान में 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। एजेंसी का कहना है कि ऊंचे तेल दाम व्यापार घाटा बढ़ा सकते हैं, लेकिन सेवाओं के निर्यात में मजबूत अधिशेष से चालू खाता घाटा नियंत्रित रह सकता है।

महंगाई बढ़ने के अनुमान

महंगाई को लेकर एसएंडपी का अनुमान है कि यह वित्त वर्ष 2027 में बढ़कर 4.3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। ऐसे में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है, हालांकि सरकार पूरी तरह से कीमतों का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डालेगी।

मौद्रिक नीति को लेकर क्या?

मौद्रिक नीति को लेकर एजेंसी का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है और न्यूट्रल रुख बनाए रखेगा। लेकिन अगर ऊर्जा बाजार में व्यवधान ज्यादा गहरा और लंबा चलता है जैसे कि ब्रेंट क्रूड जून तिमाही में 185 डॉलर प्रति बैरल और 2026 में करीब 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाता है तो केंद्रीय बैंक को सख्ती करनी पड़ सकती है। ऐसे परिदृश्य में साल के दूसरे हिस्से में 25 आधार अंक की दर बढ़ोतरी संभव है।

एसएंडपी के बेसलाइन अनुमान के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड जून तिमाही में औसतन 92 डॉलर प्रति बैरल और 2026 में करीब 80 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है। रिपोर्ट यह भी मानकर चलती है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान अप्रैल की शुरुआत तक रहेगा और उसके बाद आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य होगी।

एसएंडपी ने यह भी कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देश, जिनमें भारत भी शामिल है, पश्चिम एशिया से ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर हैं। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से घरेलू मांग प्रभावित हो सकती है और सरकारों पर सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है।

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