सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Will junk food advertisements be banned? The Economic Survey makes a significant statement about obesity

Economic Survey: क्या जंक फूड के विज्ञापनों पर लगेगी रोक? आर्थिक सर्वे में मोटापे को लेकर कही गई बड़ी बात

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Thu, 29 Jan 2026 04:26 PM IST
विज्ञापन
सार

भारत में जंक फूड की बढ़ती खपत और बच्चों में मोटापे के बढ़ते मामलों पर आर्थिक सर्वेक्षण ने गंभीर चिंता जताई है। सर्वेक्षण ने सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक जंक फूड के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने, बच्चों को लक्षित मार्केटिंग पर रोक और खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल लगाने का सुझाव दिया है।

Will junk food advertisements be banned? The Economic Survey makes a significant statement about obesity
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) यानी जंक फूड की बढ़ती खपत और बच्चों में मोटापे के बढ़ते मामलों पर आर्थिक सर्वेक्षण ने गंभीर चिंता जताई है। सर्वेक्षण ने सुबह से देर रात तक ऐसे खाद्य पदार्थों के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया है। लोकसभा में पेश प्री-बजट दस्तावेज में कहा गया है कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड बाजारों में शामिल हो गया है, जो देश में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को बढ़ा रहा है।

Trending Videos

पांच वर्षों में बच्चों में अधिक वजन की समस्या बढ़कर 3.4% पहुंची

  • सर्वेक्षण के अनुसार, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में अधिक वजन की समस्या 2015-16 में 2.1 प्रतिशत थी, जो 2019-21 में बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन
  • अनुमान है कि 2020 में भारत में करीब 3.3 करोड़ बच्चे मोटापे से ग्रस्त थे, जो 2035 तक बढ़कर 8.3 करोड़ हो सकते हैं।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 24 प्रतिशत महिलाएं और 23 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में आते हैं।
  • वहीं 15 से 49 वर्ष की महिलाओं में 6.4 प्रतिशत मोटापे से ग्रस्त हैं, जबकि पुरुषों में 4 प्रतिशत अधिक वजन की समस्या पाई गई है।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर नियंत्रण के लिए आर्थिक सर्वेक्षण ने कई उपाय सुझाए 

  • इनमें हाई फैट, शुगर और नमक (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों पर चेतावनी के साथ फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग, बच्चों को लक्षित विज्ञापनों पर रोक, और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति को कमजोर न करने वाले व्यापार समझौते शामिल हैं।
  • सर्वेक्षण ने यह भी कहा कि सिर्फ उपभोक्ताओं के व्यवहार में बदलाव से स्वस्थ खानपान संभव नहीं है, बल्कि खाद्य प्रणाली से जुड़े समन्वित नीतिगत सुधार जरूरी हैं। इसमें यूपीएफ उत्पादन का नियमन, स्वस्थ आहार को बढ़ावा और जिम्मेदार मार्केटिंग शामिल है।
  • सर्वेक्षण के अनुसार, सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक सभी मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूपीएफ के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का विकल्प भी तलाशा जा सकता है। साथ ही डिजिटल मीडिया और बच्चों के लिए दूध व पेय पदार्थों के प्रचार पर भी सख्ती की सिफारिश की गई है।

इन देशों पर जंक फूड के विज्ञापनों पर प्रतिबंद लागू

आर्थिक सर्वेक्षण ने चिली, नॉर्वे और ब्रिटेन जैसे देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां जंक फूड के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लागू है। हाल ही में ब्रिटेन ने बच्चों पर प्रभाव कम करने के लिए रात 9 बजे से पहले जंक फूड विज्ञापनों पर रोक लगाई है।

मौजूदा नियमों की कमजोरियों पर उठाए गए सवाल

सर्वेक्षण ने मौजूदा नियमों की कमजोरियों पर भी सवाल उठाए हैं। इसमें कहा गया है कि विज्ञापन कोड और सीसीपीए दिशानिर्देशों में पोषण आधारित स्पष्ट मानक नहीं हैं, जिससे कंपनियां स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे दावे करके नियमों से बच निकलती हैं।

भारत में यूपीएफ के कारोबार के आंकड़े

आर्थिक सर्वेक्षण ने चेतावनी दी है कि भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की बिक्री तेजी से बढ़ रही है, जिससे क्रॉनिक बीमारियों और स्वास्थ्य असमानताओं का खतरा बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में यूपीएफ की बिक्री 2009 से 2023 के बीच 150 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है। वहीं 2006 में 0.9 अरब डॉलर से बढ़कर 2019 में करीब 38 अरब डॉलर तक पहुंच गई, यानी लगभग 40 गुना वृद्धि। इसी अवधि में पुरुषों और महिलाओं दोनों में मोटापा लगभग दोगुना हो गया है।

सर्वेक्षण ने जंक फूड की बढ़ती खपत से निपटने के लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाने की जरूरत बताई है, ताकि देश में बढ़ते मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed