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कर्ज का चक्रव्यूह: कहीं आप भी तो नहीं कर रहे इतनी बड़ी गलती? 50 प्रतिशत कमाई EMI में जा रही तो संभल जाइए
Mon, 10 Aug 2026 06:20 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 10 Aug 2026 06:20 AM IST
सार
आज के दौर में फोन, क्रेडिट कार्ड, छुट्टियां और महंगी चीजें ईएमआई पर खरीदना आसान हो गया है, लेकिन यही सुविधा धीरे-धीरे कर्ज के जाल में भी फंसा सकती है। समीर की तरह अगर आपकी आधी से ज्यादा कमाई ईएमआई में जा रही है, बचत खत्म हो गई है और पुराने कर्ज की किस्त चुकाने के लिए नया कर्ज लेना पड़ रहा है, तो क्या आप भी खतरे की स्थिति में पहुंच चुके हैं? आइए, विस्तार से जानते हैं कि सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर विपिन पालीवाल और क्या-क्या बता रहे हैं...
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35 साल से कम उम्र के युवाओं पर क्यों बढ़ रहा कर्ज का दबाव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
30 साल के समीर की कहानी आज के उन युवाओं जैसी है, जो अच्छी नौकरी और नियमित आमदनी के बावजूद धीरे-धीरे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। समीर की मासिक आय 40,000 रुपये है। पहले उसने 38,000 रुपये का स्मार्टफोन ईएमआई पर लिया। किस्त खत्म हुई तो दोस्तों के साथ घूमने के लिए पर्सनल लोन ले लिया। इसके बाद रोजमर्रा और लाइफस्टाइल के खर्च के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ता गया। आज उसकी सैलरी आते ही करीब 30,000 रुपये किस्तों में चले जाते हैं। उसने कभी भुगतान में डिफॉल्ट नहीं किया, इसलिए क्रेडिट स्कोर खराब नहीं हुआ, लेकिन उसके पास महीने के बाकी खर्चों के लिए बहुत कम पैसा बचता है। यही स्थिति धीरे-धीरे कर्ज के ऐसे चक्र में बदल सकती है, जहां पुरानी देनदारी चुकाने के लिए नई देनदारी लेनी पड़ती है।
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क्या देश में युवाओं के बीच कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ा है?
ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय रूप से अत्यधिक कर्ज के बोझ तले दबे उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2016-17 के 5 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 18 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। इसके बाद यह कुछ घटकर 15 प्रतिशत पर आई है। चिंता की बात यह है कि कर्ज का दबाव 35 साल से कम उम्र के युवाओं में ज्यादा दिखाई देता है। यह आयु वर्ग भारत के कुल क्रेडिट बाजार का करीब 39 प्रतिशत हिस्सा रखता है। यानी युवाओं के बीच कर्ज की उपलब्धता बढ़ी है और उसके साथ खर्च करने की क्षमता भी बढ़ी है। समस्या तब शुरू होती है जब आय बढ़ने से पहले ही खर्च और ईएमआई बढ़ने लगती है।
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किस तरह के कर्ज ने युवाओं पर सबसे ज्यादा दबाव बढ़ाया है?
इस बदलाव में उपभोग से जुड़े कर्ज की बड़ी भूमिका है। इसमें पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड और कंज्यूमर ड्यूरेबल फाइनेंस शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार ऐसे उत्पाद रखने वाले सक्रिय उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत से बढ़कर 51 प्रतिशत हो गई है। यानी अब कर्ज का इस्तेमाल केवल घर, वाहन या खेती जैसे बड़े और जरूरी कामों के लिए ही नहीं हो रहा है। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, छुट्टियां और लाइफस्टाइल से जुड़े खर्च भी कर्ज के जरिए पूरे किए जा रहे हैं। पहले नया कर्ज लेना किसी बड़ी जरूरत से जुड़ा माना जाता था, लेकिन अब करीब 38,000 रुपये के औसत स्मार्टफोन और दूसरे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स भी कर्ज लेने की बड़ी वजह बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्य भी क्रेडिट ग्रोथ के प्रमुख हिस्सेदार बन रहे हैं।
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