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फैसले लिखने में एआई पर रोक: हाईकोर्ट ने सभी AI टूल्स के इस्तेमाल पर लगाया प्रतिबंध; उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Tue, 07 Apr 2026 07:46 AM IST
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सार
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कदम न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। एआई से तैयार सामग्री की सटीकता, स्रोत और कानूनी वैधता को लेकर पहले भी चिंताएं जताई जा चुकी हैं।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
न्यायिक प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के बीच पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट प्रशासन ने सभी न्यायिक अधिकारियों को निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि वे फैसले लिखने या कानूनी शोध के लिए चैटजीपीटी, जैमिनी, माइक्रोसॉफ्ट कोपायलट और मेटा जैसे एआई टूल्स का उपयोग न करें।
सोमवार को यह आदेश पंजाब और हरियाणा के सभी जिलों सहित चंडीगढ़ के जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को भेजा गया। पत्र में कहा गया कि मुख्य न्यायाधीश के निर्देशानुसार अधीनस्थ सभी न्यायिक अधिकारी एआई टूल्स का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करें।
हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि कोई अधिकारी इन निर्देशों का उल्लंघन करता है तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा और उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कदम न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। एआई से तैयार सामग्री की सटीकता, स्रोत और कानूनी वैधता को लेकर पहले भी चिंताएं जताई जा चुकी हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले गुजरात हाईकोर्ट भी इसी तरह का फैसला ले चुका है। वहां न्यायाधीशों और अदालत कर्मियों के लिए आदेश और निर्णय तैयार करने में एआई के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है।
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सोमवार को यह आदेश पंजाब और हरियाणा के सभी जिलों सहित चंडीगढ़ के जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को भेजा गया। पत्र में कहा गया कि मुख्य न्यायाधीश के निर्देशानुसार अधीनस्थ सभी न्यायिक अधिकारी एआई टूल्स का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करें।
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हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि कोई अधिकारी इन निर्देशों का उल्लंघन करता है तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा और उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कदम न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। एआई से तैयार सामग्री की सटीकता, स्रोत और कानूनी वैधता को लेकर पहले भी चिंताएं जताई जा चुकी हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले गुजरात हाईकोर्ट भी इसी तरह का फैसला ले चुका है। वहां न्यायाधीशों और अदालत कर्मियों के लिए आदेश और निर्णय तैयार करने में एआई के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है।