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पुलिस पहरे में चला बुलडोजर: सेक्टर-45 में घरों से निकाले गए लोग, सीएचबी की कार्रवाई पर उबाल
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) की बिल्डिंग वॉयलेशन के खिलाफ कार्रवाई का बड़े स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। सोमवार को सेक्टर-45 डी में पुलिस की मौजूदगी के बीच डेमोलिशन ड्राइव चलाई गई जहां लोगों को घरों से बाहर निकालकर अवैध निर्माण तोड़े गए। इस कार्रवाई के बाद शहरभर में आक्रोश फैल गया है और 19 अप्रैल को बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की गई है।
सीएचबी की इंफोर्समेंट टीम ने जिन मकानों को पहले नोटिस जारी किए थे, वहां पुलिस बल के साथ पहुंचकर कार्रवाई की। कई घरों में घुसकर लोगों को बाहर निकाला गया जिसके बाद छतों, बालकनियों और सीढ़ियों पर किए गए निर्माण को तोड़ा गया। विरोध करने वालों को मौके पर ही हिरासत में लिया गया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन 35-40 साल पुराने मामलों को सुलझाने में विफल रहा है और अब सीधे बुलडोजर चलाकर लोगों को बेघर किया जा रहा है। उनका कहना है कि हाल ही में लाई गई नीड बेस्ड चेंज पॉलिसी भी राहत देने के बजाय भ्रम पैदा करने वाली बन गई है।
मामूली निर्माण पर नोटिस देना बंद किया जाए
सीएचबी रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन के चेयरमैन प्रोफेसर निर्मल दत्त ने कहा कि इस समस्या का एकमात्र समाधान वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) स्कीम है। उन्होंने कहा कि वर्षों में बढ़ते परिवारों की जरूरत के अनुसार लोगों ने घरों में बदलाव किए, जिन्हें अब वॉयलेशन बताकर तोड़ा जा रहा है। निर्मल दत्त ने कहा कि बुधवार को जनता दरबार में प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर इस मुद्दे को उठाएंगे। इस दौरान सर्वदलीय कमेटी के सदस्य भी मौजूद रहेंगे। वहीं, क्राफ्ड के चेयरमैन हितेश पुरी ने मांग उठाई कि स्टोरी लाइन और बाउंड्री वॉल के भीतर किए गए मामूली निर्माण पर नोटिस देना बंद किया जाए। उनका कहना है कि जिन बदलावों से इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा प्रभावित नहीं होती, उन्हें हटाना अनुचित है।
नेताओं को भी नहीं बख्शा, विरोध पर हिरासत
कार्रवाई के दौरान जब एरिया काउंसलर कुलदीप कुमार और आरडब्ल्यूए के जनरल सेक्रेटरी सन्नी औलख ने विरोध जताया तो पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। इस दौरान लोगों ने प्रशासन और सत्ताधारी दल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सर्वदलीय कमेटी के सदस्य पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने बताया कि 19 अप्रैल को पूरे शहर में रैली निकालकर इस कार्रवाई का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल कानूनी नहीं बल्कि मानवीय मुद्दा है, जिसे संवेदनशीलता से सुलझाया जाना चाहिए।
प्रशासन का पक्ष
चंडीगढ़ प्रशासन के मुताबिक बिल्डिंग वॉयलेशन के कारण कई इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। ऐसे में कार्रवाई आवश्यक है। हालांकि, बढ़ते विरोध के बीच अब यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर तूल पकड़ता जा रहा है।
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सीएचबी की इंफोर्समेंट टीम ने जिन मकानों को पहले नोटिस जारी किए थे, वहां पुलिस बल के साथ पहुंचकर कार्रवाई की। कई घरों में घुसकर लोगों को बाहर निकाला गया जिसके बाद छतों, बालकनियों और सीढ़ियों पर किए गए निर्माण को तोड़ा गया। विरोध करने वालों को मौके पर ही हिरासत में लिया गया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन 35-40 साल पुराने मामलों को सुलझाने में विफल रहा है और अब सीधे बुलडोजर चलाकर लोगों को बेघर किया जा रहा है। उनका कहना है कि हाल ही में लाई गई नीड बेस्ड चेंज पॉलिसी भी राहत देने के बजाय भ्रम पैदा करने वाली बन गई है।
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मामूली निर्माण पर नोटिस देना बंद किया जाए
सीएचबी रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन के चेयरमैन प्रोफेसर निर्मल दत्त ने कहा कि इस समस्या का एकमात्र समाधान वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) स्कीम है। उन्होंने कहा कि वर्षों में बढ़ते परिवारों की जरूरत के अनुसार लोगों ने घरों में बदलाव किए, जिन्हें अब वॉयलेशन बताकर तोड़ा जा रहा है। निर्मल दत्त ने कहा कि बुधवार को जनता दरबार में प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर इस मुद्दे को उठाएंगे। इस दौरान सर्वदलीय कमेटी के सदस्य भी मौजूद रहेंगे। वहीं, क्राफ्ड के चेयरमैन हितेश पुरी ने मांग उठाई कि स्टोरी लाइन और बाउंड्री वॉल के भीतर किए गए मामूली निर्माण पर नोटिस देना बंद किया जाए। उनका कहना है कि जिन बदलावों से इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा प्रभावित नहीं होती, उन्हें हटाना अनुचित है।
नेताओं को भी नहीं बख्शा, विरोध पर हिरासत
कार्रवाई के दौरान जब एरिया काउंसलर कुलदीप कुमार और आरडब्ल्यूए के जनरल सेक्रेटरी सन्नी औलख ने विरोध जताया तो पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। इस दौरान लोगों ने प्रशासन और सत्ताधारी दल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सर्वदलीय कमेटी के सदस्य पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने बताया कि 19 अप्रैल को पूरे शहर में रैली निकालकर इस कार्रवाई का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल कानूनी नहीं बल्कि मानवीय मुद्दा है, जिसे संवेदनशीलता से सुलझाया जाना चाहिए।
प्रशासन का पक्ष
चंडीगढ़ प्रशासन के मुताबिक बिल्डिंग वॉयलेशन के कारण कई इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। ऐसे में कार्रवाई आवश्यक है। हालांकि, बढ़ते विरोध के बीच अब यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर तूल पकड़ता जा रहा है।