{"_id":"6a5c7cba9852c9a89c039b5e","slug":"haryana-bjp-factionalism-resurfaces-internal-rift-deepens-amid-public-war-of-words-2026-07-19","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"भाजपा में नहीं थम रही गुटबाजी: कार्यक्रम में नेताओं की गैरहाजिरी, दक्षिण हरियाणा में खींचतान फिर चर्चा में आई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाजपा में नहीं थम रही गुटबाजी: कार्यक्रम में नेताओं की गैरहाजिरी, दक्षिण हरियाणा में खींचतान फिर चर्चा में आई
Sun, 19 Jul 2026 02:40 PM IST
Sharukh Khan
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Sharukh Khan
Updated Sun, 19 Jul 2026 02:40 PM IST
सार
दक्षिण हरियाणा भाजपा में गुटबाजी नहीं थम रही है। मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन में श्रेय की जंग और खेत बचाओ कार्यक्रम से नेताओं की गैरहाजिरी ने दक्षिण हरियाणा भाजपा की अंदरूनी खींचतान को फिर चर्चा में ला दिया है।
विज्ञापन
Haryana BJP
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दक्षिण हरियाणा में भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आती दिख रही है। पिछले कुछ समय से केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह के समर्थक खेमे और पूर्व मंत्री डॉ.अभय सिंह यादव व वरिष्ठ नेता राव नरबीर सिंह के बीच लगातार बयानबाजी हो रही है।
यह टकराव अब केवल संगठन के भीतर की चर्चा नहीं रह गया, बल्कि सार्वजनिक मंचों पर भी दिखाई देने लगा है। रेवाड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने इन राजनीतिक मतभेदों को और स्पष्ट कर दिया।
मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन समारोह में पूर्व मंत्री अभय सिंह यादव ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि उनकी स्थिति उस पिता जैसी हो गई है, जिसने बेटी को पाल-पोसकर बड़ा किया, लेकिन कन्यादान के समय उसे ही दूर कर दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह टकराव अब केवल संगठन के भीतर की चर्चा नहीं रह गया, बल्कि सार्वजनिक मंचों पर भी दिखाई देने लगा है। रेवाड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने इन राजनीतिक मतभेदों को और स्पष्ट कर दिया।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन समारोह में पूर्व मंत्री अभय सिंह यादव ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि उनकी स्थिति उस पिता जैसी हो गई है, जिसने बेटी को पाल-पोसकर बड़ा किया, लेकिन कन्यादान के समय उसे ही दूर कर दिया गया।
विज्ञापन
दरअसल वे कहना चाहते थे कि कोरियावास मेडिकल कॉलेज को लेकर उन्होंने खूब दौड़ भाग की मगर उसके उद्घाटन का श्रेय किसी दूसरे के पास चला गया। इसके जवाब में मंत्री आरती राव ने भी बिना नाम लिए कहा कि किसी एक व्यक्ति के होने या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
दोनों नेताओं के ये बयान यह संकेत देने के लिए काफी हैं कि दक्षिण हरियाणा भाजपा में रिश्ते सहज नहीं हैं। हालांकि दोनों खेमे के बीच पहले भी इस तरह की बयानबाजी चलती रही है। इससे पहले रेवाड़ी में आयोजित खेत बचाओ अभियान का कार्यक्रम भी राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जैसे बड़े नेताओं की मौजूदगी के बावजूद केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और जिले के तीनों भाजपा विधायक कार्यक्रम से दूर रहे। इतना ही नहीं, पार्टी के पांच मंडल अध्यक्षों ने भी इसमें भाग नहीं लिया। इतने बड़े स्तर पर स्थानीय नेतृत्व की गैरमौजूदगी को सामान्य राजनीतिक संयोग मानना मुश्किल है।
इसी तरह जब जिला जनसंपर्क एवं कष्ट निवारण समितियों के प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति में भी आपसी गुटबाजी देखने को मिली थी। प्रदेश सरकार ने जिला जनसंपर्क एवं कष्ट निवारण समितियों के प्रभारी मंत्रियों की सूची जारी करते हुए राव नरबीर को रेवाड़ी और हांसी की जिम्मेदारी सौंपी थी।
जब यह सूची बाहर आई तो इस पर केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत ने आपत्ति जता दी और कुछ ही घंटे बाद राव नरबीर को रेवाड़ी से हटाकर झज्जर में नियुक्त कर दिया था। रेवाड़ी राव इंद्रजीत का गृह क्षेत्र है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दक्षिण हरियाणा भाजपा लंबे समय से अलग-अलग शक्ति केंद्रों में बंटी हुई नजर आ रही है।
अभी खत्म नहीं हुई अंदरूनी असहमति
चुनावी जीत के बावजूद स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल की कमी समय-समय पर सामने आती रही है। सार्वजनिक मंचों पर दिए जा रहे बयान और कार्यक्रमों से दूरी यह संदेश दे रही है कि अंदरूनी असहमति अभी खत्म नहीं हुई है।
चुनावी जीत के बावजूद स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल की कमी समय-समय पर सामने आती रही है। सार्वजनिक मंचों पर दिए जा रहे बयान और कार्यक्रमों से दूरी यह संदेश दे रही है कि अंदरूनी असहमति अभी खत्म नहीं हुई है।
हालांकि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अब तक इन घटनाओं पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बोला है, लेकिन यदि यह खींचतान लंबी चली तो इसका असर संगठन की एकजुटता और भविष्य की चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।
भाजपा का परिवार बहुत बड़ा है। छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं। संवाद के जरिये यह सब बातें सुलझ जाएंगी, जहां जरूरत पड़ी वहां कार्रवाई भी की जाएगी।-अर्चना गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष