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वर्ल्ड कैंसर डे: नसों तक फैले लीवर कैंसर में भी उम्मीद, सटीक रेडिएशन थेरेपी ने बढ़ाई जिंदगी; पीजीआई का शोध

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 04 Feb 2026 07:53 AM IST
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सार

स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडिएशन थेरेपी सर्जरी योग्य न रहे लीवर कैंसर मरीजों के लिए असरदार इलाज है। यह खुलासा पीजीआई के शोध में हुआ है। 

PGI research liver cancer spread to nerves precise radiation therapy increases lifespan World Cancer Day
लीवर कैंसर - फोटो : फाइल
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विस्तार
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लीवर कैंसर तब सबसे खतरनाक हो जाता है जब यह लीवर की मुख्य नस पोर्टल वेन तक फैल जाती है। इस स्थिति में इलाज के विकल्प बेहद सीमित हो जाते हैं। मेडिकल भाषा में इसे पोर्टल वेन ट्यूमर थ्रोम्बोसिस (पीवीटीटी) कहा जाता है और 35-50 प्रतिशत मामलों में मरीज इसी एडवांस स्टेज में सामने आते हैं। 

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पीजीआई के रेडियोथेरेपी विभाग में हुए शोध ने इस गंभीर स्थिति में मरीजों के लिए नई उम्मीद दिखाई है। शोध के अनुसार, स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडिएशन थेरेपी (एसबीआरटी) नसों तक फैले और सर्जरी के योग्य न रहे लीवर कैंसर मरीजों में असरदार इलाज साबित हो रही है। यह शोध वर्ल्ड जर्नल ऑफ हिमेटोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।
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मार्च 2020 से दिसंबर 2023 के बीच इलाज ले चुके 30 वयस्क मरीजों के आंकड़ों पर आधारित इस रेट्रोस्पेक्टिव सिंगल-सेंटर स्टडी में 90 प्रतिशत पुरुष शामिल थे जिनकी औसत उम्र 65 वर्ष थी। लीवर की स्थिति के अनुसार 53 प्रतिशत मरीज चाइल्ड प्यूघ ए और 46 प्रतिशत चाइल्ड प्यूघ बी श्रेणी में थे। करीब 60 प्रतिशत मरीजों में वीपी 4 स्तर की गंभीर बीमारी पाई गई जिसमें ट्यूमर मुख्य पोर्टल वेन तक पहुंच चुका था। मरीजों को ट्यूमर के आकार और आसपास के अंगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 30-50 ग्रे रेडिएशन 5-6 फ्रैक्शन में दी गई। औसतन ट्यूमर का आकार 6.1 सेंटीमीटर था। इलाज के बाद मरीजों की औसतन 15 महीने तक निगरानी की गई।

परिणाम रहे उत्साहजनक

स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडिएशन थेरेपी से 83.3 प्रतिशत मरीजों में ट्यूमर का अच्छा रिस्पॉन्स देखा गया। मीडियन ओवरऑल सर्वाइवल 13 महीने रही जबकि प्रोग्रेशन-फ्री सर्वाइवल 10.2 महीने दर्ज की गई। सबसे बड़ी राहत यह रही कि इलाज के दौरान कोई गंभीर (ग्रेड-4) टॉक्सिसिटी या जानलेवा साइड-इफेक्ट सामने नहीं आया। शोधकर्ताओं का कहना है कि पीवीटीटी के साथ लीवर कैंसर अब तक सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है, लेकिन SBRT न सिर्फ ट्यूमर कंट्रोल में असर दिखाती है, बल्कि मरीज की जीवन गुणवत्ता और जीवन अवधि भी बढ़ाती है।

स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडिएशन थेरेपी क्या है?

यह अत्यंत सटीक मशीनों की मदद से कम सत्रों में तेज लेकिन नियंत्रित रेडिएशन डोज ट्यूमर पर देती है। रेडिएशन केवल ट्यूमर को निशाना बनाता है और आसपास के स्वस्थ लीवर व अन्य महत्वपूर्ण अंगों को न्यूनतम नुकसान पहुंचाता है। सर्जरी न कर पाने वाले मरीजों के लिए यह सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है।

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